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Shimla: अतुल कौशिक बोले- निजी विवि में शैक्षणिक गिरावट और छात्र सुरक्षा पर सवाल, उठाने होंगे कदम

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 03 Apr 2026 05:51 PM IST
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सार

 निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सेवानिवृत्त मेजर जनरल अतुल कौशिक ने कहा कि प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में संकट गहरा रहा है। 

Atul Kaushik States: Questions Raised Over Academic Decline and Student Safety in Private Universities, Steps
राज्य निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सेवानिवृत्त मेजर जनरल अतुल कौशिक। - फोटो : संवाद
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विस्तार

राज्य निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सेवानिवृत्त मेजर जनरल अतुल कौशिक ने कहा कि प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में संकट गहरा रहा है। इसके लिए समय रहते कदम उठाने होंगे। उन्होंने कमजोर निगरानी तंत्र, शैक्षणिक गिरावट और छात्र सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को जारी बयान में अतुल कौशिक ने कहा कि उनके कार्यकाल के बाद आयोग में नेतृत्व का अभाव बना हुआ है। इससे निजी विश्वविद्यालयों की निगरानी कमजोर हुई है और जवाबदेही घट गई है। उन्होंने बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान आयोग ने मानकों के अनुसार कार्रवाई करते हुए 15 कुलपतियों को अयोग्य पाए जाने पर पद से हटाया था।

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इस कार्रवाई से विश्वविद्यालयों में शीर्ष स्तर की नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। हालांकि, एक मामले में न्यायालय से स्थगन आदेश मिलने के कारण संबंधित कुलपति अब भी पद पर कार्यरत हैं। राज्य के कुछ निजी विश्वविद्यालयों में छात्र आत्महत्या, नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और छात्र हिंसा जैसी घटनाओं ने संस्थागत प्रशासन और छात्र कल्याण पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मेरा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब तक नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इससे आयोग की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई है और स्वतंत्र निगरानी तंत्र कमजोर पड़ गया है।

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अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद छात्र उच्च शिक्षा के लिए बाहरी राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं। इसे स्थानीय निजी विश्वविद्यालयों में घटते विश्वास के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों में बढ़ते व्यावसायीकरण को भी संकट का कारण बताया है। पूर्व अध्यक्ष ने सरकार से आयोग में नए अध्यक्ष की शीघ्र नियुक्ति, यूजीसी मानकों का सख्ती से पालन, फीस और प्लेसमेंट दावों का स्वतंत्र ऑडिट तथा छात्र सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की मांग की है। उन्होंने चेताया कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो विश्वविद्यालय केवल डिग्री वितरण केंद्र बनकर रह जाएंगे और इसका सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ेगा।

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