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Kullu: बुद्धि सिंह बोले- श्वेत क्रांति के लिए प्रदेश में लगेंगे 400 करोड़ के प्रोजेक्ट

संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 09 Mar 2026 08:07 PM IST
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सार

प्रदेश में महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह मिलने के साथ प्रदेश को आर्थिक मजबूती प्रदान होगी।  मिल्कफेड के चेयरमैन बुद्धि सिंह ठाकुर ने सोमवार को कुल्लू के देवसदन में दुग्ध उत्पादकों के लिए लगाए गए प्रशिक्षण शिविर में कही।

Buddhi Singh said – Projects worth Rs 400 crore will be set up in the state for the White Revolution.
मिल्कफेड के चेयरमैन बुद्धि सिंह ठाकुर। - फोटो : संवाद
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विस्तार

श्वेत क्रांति को मजबूती प्रदान करने के लिए प्रदेश में 400 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं। इससे प्रदेश में महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह मिलने के साथ प्रदेश को आर्थिक मजबूती प्रदान होगी। मिल्कफेड के चेयरमैन बुद्धि सिंह ठाकुर ने सोमवार को कुल्लू के देवसदन में दुग्ध उत्पादकों के लिए लगाए गए प्रशिक्षण शिविर में कही। उन्होंने कहा कि राज्य में 6 मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें कांगड़ा के धर्मशाला में डेढ़ सौ लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला आधुनिक तकनीक युक्त प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस पर 225 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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 यह प्लांट गुजरात के आनंद की तर्ज पर बनेगा। यह प्लांट छह महीने के भीतर बनकर तैयार होगा। यह प्लांट कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर और ऊना जिलों का केंद्र होगा। इसी तर्ज पर नाहन और नालागढ़ में भी 35-35 करोड़ के प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाने की योजना है और उनका शिलान्यास एक महीने के भीतर किया जाएगा, ताकि ये भी जल्द बनकर तैयार हो सकें। कुल्लू के मौहल में 35 करोड़ रुपये की क्षमता बाला प्रोसेसिंग प्लांट बनाया जाएगा। हमीरपुर और ऊना में भी 18-18 करोड़ रुपये की लागत से मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे। साथ में शिमला के रोहडू में भी प्लांट लगाने क योजना है।

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बोले प्रदेश में यह हटकर हो रहा काम
बुद्धि सिंह ठाकुर ने कहा कि देश में हिमाचल प्रदेश ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां किसानों को दूध का समर्थन मूल्य मिल रहा है। किसानों को गाय के दूध की मात्रा और गुणवत्ता कैसे बढ़े, इसको लेकर उन्हें जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के दूसरे राज्यों की तुलना में दुग्ध सोसायटियों को भी कमीशन ज्यादा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि मिल्कफेड शिमला से ही ईआरपी एप के जरिए कलेक्शन सेंटर से लेकर चिलिंग प्लांट तक नजर बनाए हुए हैं, ताकि दूध की गुणवत्ता के साथ किसी तरह का खिलवाड़ न हो।

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