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शाम 5:43 से रात 8:23 बजे तक लोहड़ी जलाने और पूजा का शुभ मुहूर्त
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मकर संक्रांति से एक दिन पहले 13 जनवरी को मनाया जाएगा लोहड़ी का त्योहार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी मनाई जाएगी। यह त्योहार पंजाब, हरियाणा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। लोहड़ी का त्योहार 13 जनवरी यानी मंगलवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार इस वर्ष लोहड़ी जलाने और पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:43 से रात 8:23 बजे तक रहेगा। इस दिन अग्नि प्रज्वलित कर लोहड़ी मनाना बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने की पूर्व संध्या भी है। इसके बाद दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।
गंज बाजार के राधा कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि 13 जनवरी को दिन में 3:18 बजे तक भद्रा रहने वाली है। इसके बाद दिन पूजा और लोहड़ी जलाने के लिए शुभ है। इसके अगले दिन मकर संक्रांति को घी के साथ खिचड़ी खिलाई जाती है। लोहड़ी की रात बच्चे घर-घर जाकर लोकगीत सुनाते हैं। इस अवसर पर शहर के गुरुद्वारों में खिचड़ी का प्रसाद बांटा जाता है।
पौराणिक मान्यता है कि इस दिन सुंदरी और मुंदरी नाम की लड़कियों को सौदागरों से बचाकर दुल्ला भट्टी ने हिंदू लड़कों से उनकी शादी करवा दी थी। इसके अलावा यह मान्यता भी है कि संत कबीर की पत्नी लोई की याद में इस पर्व को मनाया जाता है। वहीं एक और मान्यता के अनुसार द्वापर युग में जब सभी लोग मकर संक्रांति का पर्व मनाने में व्यस्त थे उस समय बाल श्रीकृष्ण को मारने के लिए कंस ने लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल भेजा था। इस राक्षसी को बालक कृष्ण ने मार डाला था। लोहिता नामक राक्षसी के नाम पर ही लोहड़ी उत्सव का नाम रखा गया। उसी घटना को याद करते हुए लोहड़ी पर्व मनाया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी मनाई जाएगी। यह त्योहार पंजाब, हरियाणा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। लोहड़ी का त्योहार 13 जनवरी यानी मंगलवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार इस वर्ष लोहड़ी जलाने और पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:43 से रात 8:23 बजे तक रहेगा। इस दिन अग्नि प्रज्वलित कर लोहड़ी मनाना बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने की पूर्व संध्या भी है। इसके बाद दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।
गंज बाजार के राधा कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि 13 जनवरी को दिन में 3:18 बजे तक भद्रा रहने वाली है। इसके बाद दिन पूजा और लोहड़ी जलाने के लिए शुभ है। इसके अगले दिन मकर संक्रांति को घी के साथ खिचड़ी खिलाई जाती है। लोहड़ी की रात बच्चे घर-घर जाकर लोकगीत सुनाते हैं। इस अवसर पर शहर के गुरुद्वारों में खिचड़ी का प्रसाद बांटा जाता है।
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पौराणिक मान्यता है कि इस दिन सुंदरी और मुंदरी नाम की लड़कियों को सौदागरों से बचाकर दुल्ला भट्टी ने हिंदू लड़कों से उनकी शादी करवा दी थी। इसके अलावा यह मान्यता भी है कि संत कबीर की पत्नी लोई की याद में इस पर्व को मनाया जाता है। वहीं एक और मान्यता के अनुसार द्वापर युग में जब सभी लोग मकर संक्रांति का पर्व मनाने में व्यस्त थे उस समय बाल श्रीकृष्ण को मारने के लिए कंस ने लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल भेजा था। इस राक्षसी को बालक कृष्ण ने मार डाला था। लोहिता नामक राक्षसी के नाम पर ही लोहड़ी उत्सव का नाम रखा गया। उसी घटना को याद करते हुए लोहड़ी पर्व मनाया जाता है।