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Shimla News: एमआईएस के तहत लंबित बकाया राशि का भुगतान करे सरकार
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सेब उत्पादक संघ ने उठाई मांग
एमआईएस के तहत खरीद में गड़बड़ी हुई तो जांच करे विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सेब उत्पादक संघ ने प्रदेश सरकार से मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत सेब और अन्य फलों के बकाया भुगतान को तुरंत जारी करने की मांग की है। संघ के नेता संजय चौहान ने कहा कि किसानों को आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद कई दिनों से भुगतान नहीं मिल रहा है। अधिकारियों ने पिछले वर्ष की गड़बड़ियों की जांच को भुगतान में देरी का कारण बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने मार्च में भुगतान प्रक्रिया शुरू की थी। पहले 30 फिर 100 बोरी तक के किसानों को भुगतान का निर्णय लिया गया। हालांकि, कई किसानों को एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पैसा उनके खातों में जमा नहीं हुआ है। इस पर अधिकारी कह रहे हैं कि पिछले वर्ष बोरियों को लेकर गड़बड़ी के मामले सामने आए थे। इनकी जांच अभी चल रही है। इसी कारण किसानों का भुगतान रोका गया है। चौहान ने कहा कि संघ का मानना है कि इस रोक से आम किसान परेशान हो रहा है, जिसका कोई दोष नहीं है। सेब उत्पादक संघ की मांग है कि एमआईएस में सेब खरीद की गड़बड़ियां गंभीर चिंता का विषय हैं। यह एचपीएमसी और हिमफेड जैसी खरीद एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती हैं। संघ इन गड़बड़ियों की उचित जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और भविष्य में पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग करता है लेकिन इसकी आड़ में आम किसान-बागवान को परेशान न किया जाए। मंडी मध्यस्थता योजना केंद्र सरकार ने 1987-88 में शुरू की थी, ताकि मंडियों में गिरावट पर किसानों को उचित दाम मिल सकें। केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 के बजट में कटौती की, जिससे राज्यों को मिलने वाला हिस्सा बंद हो गया। अब राज्य सरकार भी इस योजना से हाथ खींच रही है। संघ केंद्र सरकार से एमआईएस जारी रखने और कम से कम 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की मांग करता है। संघ ने चेतावनी दी है कि योजना बंद करना किसान विरोधी निर्णय होगा और इससे किसानों का संकट बढ़ेगा। प्रदेश सरकार यदि जल्द बागवानों का भुगतान नहीं करती तो संघ आने वाले दिनों में प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन करेगा।
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एमआईएस के तहत खरीद में गड़बड़ी हुई तो जांच करे विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सेब उत्पादक संघ ने प्रदेश सरकार से मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत सेब और अन्य फलों के बकाया भुगतान को तुरंत जारी करने की मांग की है। संघ के नेता संजय चौहान ने कहा कि किसानों को आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद कई दिनों से भुगतान नहीं मिल रहा है। अधिकारियों ने पिछले वर्ष की गड़बड़ियों की जांच को भुगतान में देरी का कारण बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने मार्च में भुगतान प्रक्रिया शुरू की थी। पहले 30 फिर 100 बोरी तक के किसानों को भुगतान का निर्णय लिया गया। हालांकि, कई किसानों को एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पैसा उनके खातों में जमा नहीं हुआ है। इस पर अधिकारी कह रहे हैं कि पिछले वर्ष बोरियों को लेकर गड़बड़ी के मामले सामने आए थे। इनकी जांच अभी चल रही है। इसी कारण किसानों का भुगतान रोका गया है। चौहान ने कहा कि संघ का मानना है कि इस रोक से आम किसान परेशान हो रहा है, जिसका कोई दोष नहीं है। सेब उत्पादक संघ की मांग है कि एमआईएस में सेब खरीद की गड़बड़ियां गंभीर चिंता का विषय हैं। यह एचपीएमसी और हिमफेड जैसी खरीद एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती हैं। संघ इन गड़बड़ियों की उचित जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और भविष्य में पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग करता है लेकिन इसकी आड़ में आम किसान-बागवान को परेशान न किया जाए। मंडी मध्यस्थता योजना केंद्र सरकार ने 1987-88 में शुरू की थी, ताकि मंडियों में गिरावट पर किसानों को उचित दाम मिल सकें। केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 के बजट में कटौती की, जिससे राज्यों को मिलने वाला हिस्सा बंद हो गया। अब राज्य सरकार भी इस योजना से हाथ खींच रही है। संघ केंद्र सरकार से एमआईएस जारी रखने और कम से कम 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की मांग करता है। संघ ने चेतावनी दी है कि योजना बंद करना किसान विरोधी निर्णय होगा और इससे किसानों का संकट बढ़ेगा। प्रदेश सरकार यदि जल्द बागवानों का भुगतान नहीं करती तो संघ आने वाले दिनों में प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन करेगा।