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Shimla News: पैसा खत्म, युवाओं को प्रशिक्षित कर तैयार करने की सरकार की योजना ठप
अशोक चौहान, शिमला।
Published by: शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Feb 2026 10:50 AM IST
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सार
जिला शिमला में नौकरी और स्वरोजगार के लिए तैयार करने की सरकार की योजना का बुरा हाल है। हालात यह हैं कि अब युवाओं का प्रशिक्षण तक नहीं करवाया जा रहा है।
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
युवाओं को प्रशिक्षित कर नौकरी और स्वरोजगार के लिए तैयार करने की सरकार की योजना जिला शिमला में ठप हो गई है। एक साल से इस योजना के लिए सरकार ने बजट नहीं दिया है। ऐसे में नौकरी तो दूर, प्रशिक्षण तक के लिए जिला प्रशासन के पास पैसा नहीं बचा है।
हालत यह है कि अब युवाओं का प्रशिक्षण तक नहीं करवाया जा रहा है। जिलाभर के युवा प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए उपायुक्त कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जिला कल्याण विभाग की ओर से युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार किया जाता है। विभाग के अनुसार साल में दो बार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम होता है। इसमें आरक्षित वर्ग के युवाओं के अलावा बीपीएल, एकल महिला और अन्य वर्गों के युवा भी प्रशिक्षण लेते हैं। छह माह तक युवाओं को नाइलेट या सीडेक के माध्यम से कंप्यूटर समेत अन्य तकनीकी कोर्स करवाए जाते हैं। विभाग के अनुसार एक बैच में सौ से ज्यादा युवा भी शामिल हो सकते हैं। इनकी संख्या आवेदन की अंतिम तिथि पर निर्भर करती है। प्रशिक्षण के दौरान भी युवाओं को भत्ता जारी किया जाता है।
नामी एजेंसियों से प्रशिक्षण लेने के बाद युवाओं को सरकारी महकमों में इंटर्नशिप करवाई जाती है। इसका कार्यकाल भी छह माह रहता है। इस दौरान भी सरकार की ओर से प्रतिमाह 1500 रुपये मानदेय जारी होता है। सरकार से अब जिला शिमला को एक साल से इस योजना के लिए कोई बजट नहीं मिला है। इसके चलते प्रशिक्षण करवाने तक का काम ठप हो गया है। युवा तहसील कार्यालय समेत जिला कल्याण अधिकारी के दफ्तर में पहुंच रहे हैं। जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा ने बताया कि युवाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। अभी यह प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है।
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हालत यह है कि अब युवाओं का प्रशिक्षण तक नहीं करवाया जा रहा है। जिलाभर के युवा प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए उपायुक्त कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जिला कल्याण विभाग की ओर से युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार किया जाता है। विभाग के अनुसार साल में दो बार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम होता है। इसमें आरक्षित वर्ग के युवाओं के अलावा बीपीएल, एकल महिला और अन्य वर्गों के युवा भी प्रशिक्षण लेते हैं। छह माह तक युवाओं को नाइलेट या सीडेक के माध्यम से कंप्यूटर समेत अन्य तकनीकी कोर्स करवाए जाते हैं। विभाग के अनुसार एक बैच में सौ से ज्यादा युवा भी शामिल हो सकते हैं। इनकी संख्या आवेदन की अंतिम तिथि पर निर्भर करती है। प्रशिक्षण के दौरान भी युवाओं को भत्ता जारी किया जाता है।
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नामी एजेंसियों से प्रशिक्षण लेने के बाद युवाओं को सरकारी महकमों में इंटर्नशिप करवाई जाती है। इसका कार्यकाल भी छह माह रहता है। इस दौरान भी सरकार की ओर से प्रतिमाह 1500 रुपये मानदेय जारी होता है। सरकार से अब जिला शिमला को एक साल से इस योजना के लिए कोई बजट नहीं मिला है। इसके चलते प्रशिक्षण करवाने तक का काम ठप हो गया है। युवा तहसील कार्यालय समेत जिला कल्याण अधिकारी के दफ्तर में पहुंच रहे हैं। जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा ने बताया कि युवाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। अभी यह प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है।
दिव्यांगों के विवाह की राशि भी अटकी
दिव्यांगों को विवाह पर मिलने वाली सहायता राशि भी फिलहाल अटक गई है। सरकार से इसके लिए भी बजट जारी नहीं हो रहा। जिला शिमला से कुल 14 मामले सरकार को भेजे गए हैं जिनमें करीब पांच लाख रुपये जारी होने हैं। 40 फीसदी विकलांगता पर सरकार 25 हजार जबकि 40 फीसदी से ज्यादा विकलांकता पर 50 हजार रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है। विवाह के बाद यह राशि जारी होती है। जिला में 14 दिव्यांग युवाओं को कई महीने से इस राशि का इंतजार है।
जिले में 80,672 महिलाओं को 1500 रुपये भी नहीं मिले
जिला शिमला में इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत 80 हजार से ज्यादा महिलाओं को भी 1500 रुपये का इंतजार है। जिले में अभी तक सिर्फ 5200 महिलाओं को ही 1500 रुपये की किस्त जारी हुई है। इन्हें भी एक ही किस्त मिली है। जून 2025 के बाद इन्हें भी 1500 रुपये की अगली किस्त का इंतजार है। जिलाभर से 80672 आवेदन सरकार की इस योजना के तहत किए गए हैं। इनमें हजारों आवेदन अभी सत्यापन के लिए पंचायतों के पास भी लंबित पड़े हैं। जो सत्यापित होकर सरकार के पास पहुंचे हैं, उन्हें भी अभी 1500 का इंतजार है।
दिव्यांगों को विवाह पर मिलने वाली सहायता राशि भी फिलहाल अटक गई है। सरकार से इसके लिए भी बजट जारी नहीं हो रहा। जिला शिमला से कुल 14 मामले सरकार को भेजे गए हैं जिनमें करीब पांच लाख रुपये जारी होने हैं। 40 फीसदी विकलांगता पर सरकार 25 हजार जबकि 40 फीसदी से ज्यादा विकलांकता पर 50 हजार रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है। विवाह के बाद यह राशि जारी होती है। जिला में 14 दिव्यांग युवाओं को कई महीने से इस राशि का इंतजार है।
जिले में 80,672 महिलाओं को 1500 रुपये भी नहीं मिले
जिला शिमला में इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत 80 हजार से ज्यादा महिलाओं को भी 1500 रुपये का इंतजार है। जिले में अभी तक सिर्फ 5200 महिलाओं को ही 1500 रुपये की किस्त जारी हुई है। इन्हें भी एक ही किस्त मिली है। जून 2025 के बाद इन्हें भी 1500 रुपये की अगली किस्त का इंतजार है। जिलाभर से 80672 आवेदन सरकार की इस योजना के तहत किए गए हैं। इनमें हजारों आवेदन अभी सत्यापन के लिए पंचायतों के पास भी लंबित पड़े हैं। जो सत्यापित होकर सरकार के पास पहुंचे हैं, उन्हें भी अभी 1500 का इंतजार है।