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Shimla News: लगातार दूसरे महीने फेल हुआ गोलछा एसटीपी का पानी
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जून में बीओडी 48 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज, निर्धारित सीमा 30; उपचार क्षमता पर उठे सवाल
जून में 48 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज, मई में भी 45 रहा, प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के नॉर्थ डिस्पोजल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (गोलछा एसटीपी) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जून माह की निगरानी रिपोर्ट में संयंत्र से निकलने वाला शोधित पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। लगातार दूसरे महीने नमूना फेल होने से संयंत्र की सीवेज उपचार क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार एसटीपी के आउटलेट पर जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर 48 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया, जबकि इसकी अधिकतम स्वीकार्य सीमा 30 मिलीग्राम प्रति लीटर है। इससे पहले मई माह में भी इसी संयंत्र के शोधित पानी में बीओडी 45 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया था। लगातार दो माह तक मानकों से अधिक बीओडी मिलने से यह संकेत मिलता है कि संयंत्र सीवेज का प्रभावी ढंग से उपचार नहीं कर पा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार बीओडी पानी में मौजूद जैविक प्रदूषण का प्रमुख संकेतक होता है। इसका स्तर अधिक होने का अर्थ है कि पानी में कार्बनिक अपशिष्ट की मात्रा ज्यादा है, जिसे विघटित करने में अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। ऐसा पानी यदि प्राकृतिक जल स्रोतों में छोड़ा जाए तो वहां घुलित ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है, जिससे जलीय जीवों और जल गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
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गोलछा एसटीपी शिमला के उत्तरी क्षेत्र से निकलने वाले सीवेज का उपचार करता है। इसकी स्थापित क्षमता 5.80 एमएलडी है। उपचारित पानी को समीपवर्ती नाले में छोड़ा जाता है, जो आगे चलकर न्यासर खड्ड में मिलता है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी इस संयंत्र के नमूने कई बार निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। उस समय आसपास की पंचायतों ने उपचारित पानी के नालों में छोड़े जाने और उससे क्षेत्र की पेयजल योजनाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। लगातार दूसरी बार रिपोर्ट में खामियां सामने आने के बाद अब संयंत्र की कार्यप्रणाली में सुधार और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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जून में 48 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज, मई में भी 45 रहा, प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के नॉर्थ डिस्पोजल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (गोलछा एसटीपी) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जून माह की निगरानी रिपोर्ट में संयंत्र से निकलने वाला शोधित पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। लगातार दूसरे महीने नमूना फेल होने से संयंत्र की सीवेज उपचार क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार एसटीपी के आउटलेट पर जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर 48 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया, जबकि इसकी अधिकतम स्वीकार्य सीमा 30 मिलीग्राम प्रति लीटर है। इससे पहले मई माह में भी इसी संयंत्र के शोधित पानी में बीओडी 45 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया था। लगातार दो माह तक मानकों से अधिक बीओडी मिलने से यह संकेत मिलता है कि संयंत्र सीवेज का प्रभावी ढंग से उपचार नहीं कर पा रहा है।
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विशेषज्ञों के अनुसार बीओडी पानी में मौजूद जैविक प्रदूषण का प्रमुख संकेतक होता है। इसका स्तर अधिक होने का अर्थ है कि पानी में कार्बनिक अपशिष्ट की मात्रा ज्यादा है, जिसे विघटित करने में अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। ऐसा पानी यदि प्राकृतिक जल स्रोतों में छोड़ा जाए तो वहां घुलित ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है, जिससे जलीय जीवों और जल गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
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गोलछा एसटीपी शिमला के उत्तरी क्षेत्र से निकलने वाले सीवेज का उपचार करता है। इसकी स्थापित क्षमता 5.80 एमएलडी है। उपचारित पानी को समीपवर्ती नाले में छोड़ा जाता है, जो आगे चलकर न्यासर खड्ड में मिलता है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी इस संयंत्र के नमूने कई बार निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। उस समय आसपास की पंचायतों ने उपचारित पानी के नालों में छोड़े जाने और उससे क्षेत्र की पेयजल योजनाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। लगातार दूसरी बार रिपोर्ट में खामियां सामने आने के बाद अब संयंत्र की कार्यप्रणाली में सुधार और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।