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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Green building norms implemented for hotels, malls, and hospitals; fines for violations; revised rules issued.

हिमाचल: होटल-मॉल-अस्पतालों के लिए ग्रीन बिल्डिंग नियम लागू, उल्लंघन पर जुर्माना, संशोधित नियम जारी

Sat, 11 Jul 2026 06:02 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 11 Jul 2026 06:02 PM IST
सार

प्रदेश सरकार ने ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन बिल्डिंग कोड का पालन अनिवार्य कर दिया है। नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग की ओर से जारी संशोधन नियम, 2026 के तहत अब बड़े भवनों के लिए हिमाचल प्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन कोड का अनुपालन करना होगा। 

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Green building norms implemented for hotels, malls, and hospitals; fines for violations; revised rules issued.
हिमाचल सरकार ने लागू किए ग्रीन बिल्डिंग नियम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश सरकार ने ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन बिल्डिंग कोड का पालन अनिवार्य कर दिया है। नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग की ओर से जारी संशोधन नियम, 2026 के तहत अब बड़े भवनों के लिए हिमाचल प्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन कोड का अनुपालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले डेवलपर्स के खिलाफ जुर्माने सहित सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। भवन के नक्शे में ग्रीन बिल्डिंग कोड का प्रावधान अनिवार्य किया गया है, ऐसा न होने पर नक्शा पास नहीं होगा। नई अधिसूचना के अनुसार होटल, रिसॉर्ट, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, व्यावसायिक कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, मल्टीप्लेक्स, सार्वजनिक भवन और बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को ऊर्जा दक्ष भवन मानकों का पालन करना होगा। 

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निर्माण कार्य शुरू करने से पहले और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी होने से पूर्व भवन के डिजाइन का सत्यापन बीईई अथवा राज्य सरकार से अधिकृत एनर्जी ऑडिटर से कराना अनिवार्य होगा। ऑडिटर के प्रमाणपत्र के बिना निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। सरकार ने ग्रीन बिल्डिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन और दंड दोनों की व्यवस्था की है। अधिकृत एजेंसियों से निर्धारित ग्रीन रेटिंग प्राप्त करने वाले प्रोजेक्ट्स को 0.25 अतिरिक्त एफएआर का लाभ दिया जाएगा।
वहीं, अतिरिक्त एफएआर का लाभ लेने के बावजूद यदि डेवलपर निर्धारित ग्रीन रेटिंग हासिल नहीं कर पाता है तो उसे सामान्य प्लानिंग फीस का 10 गुना तक जुर्माना देना होगा। संशोधित नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रीमियम एफएआर की व्यवस्था केवल वैध परियोजनाओं के लिए होगी। इसका उपयोग किसी भी अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए नहीं किया जा सकेगा। अतिरिक्त एफएआर का लाभ केवल नए प्रोजेक्ट्स अथवा उन परियोजनाओं के हिस्सों पर मिलेगा, जहां निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।

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भवन निर्माण में इन प्रमुख बातों का पालन करना अनिवार्य

  • बिजली की कम खपत के लिए ऊर्जा दक्ष डिजाइन और उपकरणों का उपयोग
  • प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन को बढ़ावा, मकसद बिजली की जरूरत कम हो
  • ऊर्जा दक्ष एयर कंडीशनिंग लाइटिंग और विद्युत प्रणालियां अनिवार्य
  • दीवारों, छत और खिड़कियों में बेहतर इंसुलेशन, जिससे गर्मी और ठंड का असर कम हो।
  • जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन और पानी बचाने वाले फिटिंग्स का उपयोग।
  • सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहन
  •  निर्माण के दौरान और बाद में कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा खपत कम करने की व्यवस्था
     
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नए प्रावधानों से ऊर्जा दक्ष भवनों का निर्माण बढ़ेगा, बिजली की खपत कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। ग्रीन बिल्डिंग मानकों को अनिवार्य बनाने से हिमाचल में पर्यावरण अनुकूल और सतत शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी, वहीं भवन निर्माण क्षेत्र में भी गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। -राजेश धर्माणी, नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री

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