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Guru Ast 2026: देवगुरु बृहस्पति होंगे अस्त, नौ अगस्त तक टाल दें शुभ काम; ज्योतिषियों ने बताई वजह
Mon, 13 Jul 2026 01:17 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 13 Jul 2026 01:17 PM IST
सार
15 जुलाई से 9 अगस्त 2026 तक देवगुरु बृहस्पति (गुरु) अस्त रहेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस दौरान विवाह, मुंडन, जनेऊ और अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। चतुर्मास की शुरुआत भी इसी अवधि में होने से शुभ कार्यों पर विराम रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस समय गुरु बीज मंत्र का जाप, भगवान विष्णु की उपासना, दान और ध्यान करना शुभ माना गया है। पढ़ें पूरी खबर...
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गुरु अस्त 2026
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति 15 जुलाई से 9 अगस्त 2026 तक अस्त रहेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ जैसे कई मांगलिक और शुभ कार्यों पर लगभग 25 दिनों तक विराम रहेगा। यह संयोग चतुर्मास के आरंभ के साथ हो रहा है, जिसके कारण धार्मिक दृष्टि से भी इन शुभ कार्यों को टालने की परंपरा है।
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गुरु का अस्त होना और उसका प्रभाव
वर्तमान में बृहस्पति कर्क राशि के पुष्य नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। 16 जुलाई के आसपास सूर्य के भी कर्क राशि में प्रवेश करने से ये दोनों ग्रह अत्यंत निकट आ जाएंगे। जब बृहस्पति सूर्य से लगभग 11 डिग्री के भीतर आ जाता है, तो उसे 'अस्त' या 'दग्ध' माना जाता है। सूर्य की प्रखर आभा के कारण बृहस्पति दृष्टिगोचर नहीं होता और ज्योतिष में उसकी शुभता का प्रभाव कमजोर माना जाता है।
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राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल के अनुसार, वैदिक ज्योतिष में गुरु को ज्ञान, धर्म, शिक्षा, संतान, समृद्धि और शुभता का कारक ग्रह माना गया है। गुरु के अस्त रहने की अवधि में उसके शुभ प्रभाव में कमी आती है, जिससे कुछ लोगों को कार्यों में विलंब, निर्णय लेने में कठिनाई या अन्य प्रकार की रुकावटों का अनुभव हो सकता है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति पर इसका प्रभाव उसकी जन्मकुंडली, ग्रह दशा और अन्य ज्योतिषीय योगों पर निर्भर करता है।
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किन राशियों पर पड़ेगा विशेष प्रभाव?
इस अवधि में विशेष रूप से कर्क, धनु, मकर और मीन राशि के जातकों को धैर्य और संयम के साथ कार्य करना चाहिए।
इस अवधि में क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु के अस्त रहने की अवधि में गुरु बीज मंत्र का जाप, भगवान विष्णु की उपासना, पीले वस्त्र व पीली वस्तुओं का दान और ध्यान-योग करना शुभ माना गया है। पुजारी उमेश नौटियाल बताते हैं कि गुरु अस्त की अवधि आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष रूप से अनुकूल मानी जाती है, जबकि मांगलिक कार्यों को इस अवधि के बाद करना अधिक शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु के अस्त रहने की अवधि में गुरु बीज मंत्र का जाप, भगवान विष्णु की उपासना, पीले वस्त्र व पीली वस्तुओं का दान और ध्यान-योग करना शुभ माना गया है। पुजारी उमेश नौटियाल बताते हैं कि गुरु अस्त की अवधि आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष रूप से अनुकूल मानी जाती है, जबकि मांगलिक कार्यों को इस अवधि के बाद करना अधिक शुभ माना जाता है।