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Himachal Weather Research: 2023 में हिमाचल में क्यों मची थी तबाही? अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा
Mon, 13 Jul 2026 01:40 PM IST
Ankesh Dogra
सुरेश शांडिल्य, शिमला।
सुरेश शांडिल्य, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 13 Jul 2026 01:40 PM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि जुलाई 2023 में हिमाचल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन केवल मानसून की वजह से नहीं हुए थे। पश्चिमी विक्षोभ, अरब सागर से आई अत्यधिक नमी, निम्न दबाव क्षेत्र और मानसूनी परिसंचरण के संयुक्त प्रभाव से रिकॉर्ड बारिश हुई, जिसने प्रदेश में भारी तबाही मचाई।
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वर्ष 2023 की आपदा पर बड़ा खुलासा।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
जुलाई 2023 में हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की घटनाओं, बाढ़ और भूस्खलन के लिए केवल मानसून जिम्मेदार नहीं था। एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि असल में मानसून के लिए 9 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी से नमी का प्रवाह लगभग समाप्त हो गया था, पर अरब सागर से अत्यधिक नमी आती रही।
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इस आपदा के पीछे पश्चिमी विक्षोभ, अरब सागर से आई अत्यधिक नमी, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बने निम्न दाब क्षेत्र और मानसूनी परिसंचरण का दुर्लभ एवं असामान्य मेल था। इन मौसम प्रणालियों की संयुक्त सक्रियता ने उत्तर-पश्चिम भारत विशेषकर हिमाचल प्रदेश में रिकॉर्डतोड़ वर्षा कराई। यह खुलासा अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध पत्रिका ‘मीटरोलॉजी एंड अटमॉस्फेरिक फिजिक्स’ में हाल ही में छपे शोधपत्र में हुआ है। यह अध्ययन भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिक कृष्ण मिश्रा और शशिकांत, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डॉ. विवेक कुमार और ब्रिटेन के रीडिंग विवि एवं राष्ट्रीय वायुमंडलीय विज्ञान केंद्र के डॉ. कियरन एमआर हंट ने संयुक्त रूप से किया है।
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अध्ययन के अनुसार 7 से 11 जुलाई 2023 के बीच उत्तर-पश्चिम भारत में हुई वर्षा हाल के इतिहास की सबसे गंभीर वर्षा घटनाओं में शामिल थी। इस दौरान कई स्थानों पर प्रतिदिन 20 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई और अनेक मौसम केंद्रों ने दैनिक और मौसमी वर्षा के नए रिकॉर्ड बनाए। इस प्राकृतिक आपदा का सबसे अधिक असर हिमाचल प्रदेश पर पड़ा, जहां बाढ़, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा तथा जन-धन की व्यापक हानि हुई। शोध में बताया गया है कि 9 जुलाई को दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर निम्न दाब क्षेत्र विकसित हुआ, जो उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ा। इसी समय मध्य वायुमंडल में शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय था।
सामान्य परिस्थितियों में मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी नमी का प्रमुख स्रोत होती है, लेकिन इस घटना में 9 जुलाई के बाद वहां से नमी का प्रवाह लगभग समाप्त हो गया। इसके बावजूद अरब सागर से लगातार अत्यधिक नमी उत्तर-पश्चिम भारत पहुंचती रही। यही नमी पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी परिसंचरण के साथ मिलकर एक असामान्य वायुमंडलीय स्थिति का कारण बनी, जिससे रिकॉर्डतोड़ वर्षा हुई। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि पश्चिमी विक्षोभ 7 से 10 जुलाई तक लगभग स्थिर बना रहा। इसके कारण कई दिन तक लगातार भारी वर्षा होती रही और हिमाचल प्रदेश में बाढ़ तथा भूस्खलन की घटनाएं बढ़ती चली गईं। 9 जुलाई को उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों में समुद्र तल के औसत वायुदाब में 2 से 4 हेक्टोपास्कल की असामान्य गिरावट भी दर्ज की गई, जिससे मौसम प्रणाली और अधिक सक्रिय हो गई।
बल्कि कई मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने और उनके परस्पर प्रभाव का परिणाम होती हैं। हिमाचल के लिए यह वैज्ञानिक साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके आधार पर प्रभाव आधारित मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाया जा सकता है। - पुष्पेंद्र राणा, निदेशक, हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग।
आपदा ने हिमाचल को दिए गहरे जख्म
जुलाई-अगस्त 2023 की प्राकृतिक आपदा प्रदेश के इतिहास की सबसे विनाशकारी घटनाओं में गिनी जाती है। लगातार हुई मूसलाधार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से 450 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि हजारों परिवार प्रभावित हुए। राज्य सरकार ने इस आपदा से करीब 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आकलन किया था। हजारों मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए या उन्हें नुकसान पहुंचा। राष्ट्रीय राजमार्ग, सैकड़ों संपर्क सड़कें, पुल, पेयजल योजनाएं, विद्युत परियोजनाएं और बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर और चंबा सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल रहे। सेब, सब्जियों और अन्य बागवानी फसलों को भी भारी क्षति पहुंची, जिससे हजारों किसानों और बागवानों की आजीविका प्रभावित हुई।
जुलाई-अगस्त 2023 की प्राकृतिक आपदा प्रदेश के इतिहास की सबसे विनाशकारी घटनाओं में गिनी जाती है। लगातार हुई मूसलाधार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से 450 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि हजारों परिवार प्रभावित हुए। राज्य सरकार ने इस आपदा से करीब 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आकलन किया था। हजारों मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए या उन्हें नुकसान पहुंचा। राष्ट्रीय राजमार्ग, सैकड़ों संपर्क सड़कें, पुल, पेयजल योजनाएं, विद्युत परियोजनाएं और बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर और चंबा सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल रहे। सेब, सब्जियों और अन्य बागवानी फसलों को भी भारी क्षति पहुंची, जिससे हजारों किसानों और बागवानों की आजीविका प्रभावित हुई।