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Himachal: इस डे-बोर्डिंग स्कूल और हेलीपोर्ट के टेंडर खोलने पर हाईकोर्ट की रोक, इन अधिसूचनाओं को भी रोका

Sat, 11 Jul 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 11 Jul 2026 05:00 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के टेंडर खोलने और उन्हें अंतिम रूप देने पर अंतरिम रोक लगा दी है।

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High Court stays opening of tenders for day boarding school in Nadaun and heliport in Haroli; halts these noti
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के टेंडर खोलने और उन्हें अंतिम रूप देने पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने यह रोक जिला हमीरपुर के नादौन विधानसभा क्षेत्र के तहत कांगू में बनने वाले राजीव गांधी गवर्नमेंट मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूल और जिला ऊना की हरोली तहसील के रोड़ा में प्रस्तावित हेलीपोर्ट निर्माण से संबंधित टेंडरों को खोलने पर लगाई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने साफ किया कि अगले आदेश तक टेंडर के अवार्ड को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।

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अदालत ने स्पष्ट किया है कि इससे पहले भी 3 जुलाई को एक अंतरिम आदेश जारी किया था। 23 जून को जारी एक अन्य विवादित टेंडर की टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड खोलने पर भी अगले आदेश तक रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी। अदालत ने यह आदेश पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
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लाडा के फंड से अनाथों को वित्तीय मदद देने की अधिसूचनाओं पर रोक
 प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को झटका देते हुए जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाले लोकल एरिया डेवलपमेंट प्राधिकरण (लाडा) फंड के इस्तेमाल को लेकर जारी दो अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी है। सरकार ने इन अधिसूचनाओं के जरिये फंड का एक बड़ा हिस्सा अनाथ बच्चों की वित्तीय सहायता के लिए देने का प्रावधान किया था। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने पाया कि अधिसूचनाओं में कहीं स्पष्ट नहीं है कि यह राशि परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्र के अनाथ बच्चों पर ही खर्च होगी। नियमों के इस उल्लंघन को देखते हुए सरकार की ओर से जारी 23 सितंबर 2025 और 18 मार्च 2026 की अधिसूचनाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने यह अंतरिम आदेश विधायक जनक राज की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

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याचिकाकर्ता ने स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति 2021 के अध्याय-5 का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि एलएडीएफ का मुख्य उद्देश्य जल विद्युत परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले स्थानीय समुदायों का विकास करना है। इसके तहत 5 मेगावाट से अधिक की क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स के लिए कुल लागत का 1.5% और 5 मेगावाट तक के प्रोजेक्ट्स के लिए यह सीमा 1% विकास कार्यों के लिए तय की है। केंद्र की हाइड्रो पावर पॉलिसी 2008 के अनुसार बिजली उत्पादन से होने वाले राजस्व का 1% हिस्सा भी पूरे प्रोजेक्ट काल के लिए वार्षिकी के रूप में स्थानीय विकास के लिए तय है। सरकार ने 23 सितंबर 2025 को जारी अधिसूचना के तहत नियमों में बदलाव कर लाडा फंड का 10 फीसदी हिस्सा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के माध्यम से अनाथ बच्चों की सहायता के लिए आरक्षित कर दिया। इसके अलावा 18 मार्च 2026 की एक नई अधिसूचना जारी कर इस कोटे को 10 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 40 फीसदी कर दिया गया।

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