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हिमाचल: CM बोले- पंचायतों में 21 और 22 को एंटी चिट्टा ग्राम सभा, नशे में फंसे युवाओं के पुनर्वास पर होगी चर्चा

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 13 Jan 2026 03:25 PM IST
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सार

मंगलवार को कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने निर्देश दिए कि किसानों का पूरा डेटा 20 जनवरी, 2026 तक हिम परिवार पोर्टल से जोड़ा जाए। पढ़ें पूरी खबर... 
 

Himachal CM Sukhu says connect data of farmers doing natural farming with Him Parivar portal
कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कृषि विभाग को प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों का पूरा डेटा 20 जनवरी, 2026 तक हिम परिवार पोर्टल से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। डेटा में प्राकृतिक खेती से सम्बन्धित सम्पूर्ण विवरण का समावेश किया जाएगा। प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों का ब्लॉक आधार डेटा तैयार कर उसकी मैपिंग की जाएगी।

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मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए युवाओं को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। उन्होंने प्रदेश में इस पद्धति से खेती करने पर बल दिया ताकि किसान अधिक से अधिक आय अर्जित कर सके। हम प्राकृतिक खेती आधारित व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों से इस माह हमीरपुर में आयोजित होने वाले सम्मेलन में संवाद करेंगे।  

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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं, मक्की और कच्ची हल्दी से सम्बन्धित विभिन्न विषयों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं के आटे को ‘हिम चक्की आटा’, मक्की के आटे को ‘हिम भोग मक्की’ आटा और कच्ची हल्दी को ‘हिम हल्दी’ के ब्रांड के साथ बाजार में उतारा गया है। उन्होंने आटे की पैकिंग के पैकेट में एक्सपायरी डेट से सम्बन्धित जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों में पौष्टिकता के संबंध में भी उचित जानकारी होनी चाहिए। इसका आकलन करने के लिए एक विशेष इकाई के गठन करने के भी निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक विधि से उगाई गई 606.8 मीट्रिक टन मक्की की खरीद की गई है और 2.31 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में डाले गए हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादित 2123 क्विंटल गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद की गई और किसानों के खातों में एक करोड़ 31 लाख 57 हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित किये गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से उगाई कच्ची हल्दी पर 90 रुपये समर्थन मूल्य प्रदान करने के उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। इस वर्ष 1629 किसानों से लगभग 2422 क्विंटल हल्दी के प्रापण का अनुमान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा अपने 25 फार्मों में प्राकृतिक खेती पद्धति से विभिन्न फसलों का उत्पादन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती के उत्पादांे का बेहतर विपणन सुनिश्चित किया जाए। कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने बैठक में बहुमूल्य सुझाव दिए। बैठक में  मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव सी. पालरासु और अशीष सिंहमार, निदेशक डीडीटीजी डा. निपुण जिंदल, निदेशक कृषि डॉ. रविन्द्र सिंह जसरोटिया, निदेशक बागवानी विनय सिंह और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रगतिशील बागवानों के साथ मुख्यमंत्री ने की बैठक
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के बागवानों के प्रतिनिधियों और प्रगतिशील बागवानों के साथ आयोजित बैठक में कहा कि सेब उत्पादन प्रदेश की आर्थिकी का प्रमुख संसाधन है और इसका संरक्षण व संवर्द्धन प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड से आयात किए जाने वाले सेब पर आयात शुल्क घटाने से बागवानों के हितों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह इस विषय के सकारात्मक समाधान के लिए केन्द्र सरकार के समक्ष मामला उठाएंगे। वह केन्द्रीय वित्त मंत्री तथा केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री से भेंट कर प्रदेश के बागवानों के हितों के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए आग्रह करेंगे।

बैठक में बागवानों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, सचिव सी. पालरासु, निदेशक बागवानी विनय सिंह, हिमाचल सेब उत्पादक संघ की राज्य कमेटी के अध्यक्ष संजय चौहान, हिमाचल किसान सभा के राज्य सचिव राकेश सिंघा, स्टोन फूट ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक सिंघा, प्रोग्रेसिव ग्रोवर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष आशुतोष चौहान और प्रगतिशील बागवान बैठक में उपस्थित थे।

प्रीमियर लीग की तर्ज पर एंटी चिट्टा अवेयरनेस स्पोर्ट्स टूर्नामेंट
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों में 21 व 22 जनवरी को एंटी चिट्टा ग्राम सभाएं करवाई जाएंगी। ग्राम सभाओं में चिट्टा से संबंधित सूचनाओं की समीक्षा, चिट्टा की लत में फंसे स्थानीय युवाओं के पुनर्वास सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा और कार्रवाई की जाएगी। एंटी चिट्टा ग्राम सभाओं में अन्य विभागों के अधिकारी पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किए जाएंगे। ग्राम सभा में चिट्टा से संबंधित पंचायत की पूरी मैपिंग भी होगी। सोमवार शाम अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यह बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिट्टा के दुष्प्रभावों से लोगों को जागरूक करने के लिए प्रदेश व्यापी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रदेशभर में प्रीमियर लीग की तर्ज पर एंटी चिट्टा अवयेरनेस स्पोर्ट्स टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे। इन टूर्नामेंट में कबड्डी, क्रिकेट और वॉलीबाल की स्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी। ये टूर्नामेंट ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर होंगे। विजेता टीमों को मुख्यमंत्री इनामी राशि प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिट्टा तस्करी और सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई जा रही है। चिट्टा तस्करों की संपत्तियों की पहचान कर इन्हें ध्वस्त कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को चिट्टे के दुष्प्रभावों के संबंध में छात्रों को जागरूक करने के लिए स्कूल की पाठ्य पुस्तकों में एक अध्याय शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने पंचायत स्तर पर गठित नशा निवारण समितियों में पंचायत प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों को विशेष आमंत्रित सदस्यों में भी शामिल करने और चिट्टे के खिलाफ अभियान में एफपीओ और महिला मंडलों को शामिल करने के भी निर्देश दिए। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव केके पंत, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव सी पालरासु, महाधिवक्ता अनूप रतन, निदेशक ग्रामीण विकास राघव शर्मा और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
 
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