हिमाचल: वायुसेना में देवांशी शर्मा बनीं फ्लाइंग ऑफिसर, गौरव ठाकुर और अनिमेश लेफ्टिनेंट
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उपमंडल नादौन के समहूं गांव की देवांशी शर्मा का वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में चयन हुआ है। देवांशी ने 12वीं की परीक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल बरमाणा से की। पंजाब विश्वविद्यालय से डिफेंस और स्ट्रैटेजिक स्टडीज में मास्टर की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट दिया। उसके बाद एसएसबी साक्षात्कार पास किया। देवांशी को रक्षा क्षेत्र में शामिल होने की प्रेरणा उनके नाना कर्नल (सेवानिवृत) रोशन लाल शर्मा से मिली। देवांशी के पिता इंजीनियर राजेश शर्मा ने बताया कि बेटी बचपन से ही वर्दी पहनकर देश सेवा करने का सपना देख रही थी। मां नीना शर्मा ने कहा कि उन्हें गर्व और खुशी का अनुभव हो रहा है। देवांशी की उपलब्धि पर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने देवांशी और उनके परिवार को बधाई दी है।
धर्मशाला के गौरव ठाकुर सेना में लेफ्टिनेंट बने
नगर परिषद के गणेश बाजार निवासी अनिमेश कुमार ने सेना में कमीशन प्राप्त किया है। अमिता और बलदेव के बेटे अनिमेश की प्रारंभिक शिक्षा माउंट कार्मल स्कूल बैजनाथ में हुई। इसके बाद उन्होंने सैनिक स्कूल सुजानपुर से जमा दो की शिक्षा ग्रहण की। बाद में अनिमेश ने सेना में चार वर्ष तक आईटी और कम्युनिकेशन विषय में प्रशिक्षण प्राप्त किया। अब वह कमीशन के तहत लेफ्टिनेंट के पद पर अपनी सेवाएं देंगे। अनिमेश के दादा यूआर चीमा भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं। वे प्रदेश प्रशासनिक सेवा में एसडीएम के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके चाचा डॉ. राज कुमार बैजनाथ अस्पताल में चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
अनिमेश ने सेना में प्राप्त किया कमीशन
नगर परिषद के गणेश बाजार के अनिमेश कुमार ने सेना में कमीशन प्राप्त की है। अमिता और बलदेव के बेटे अनिमेश की प्रारंभिक शिक्षा माउंट कार्मल स्कूल बैजनाथ में हुई है। बाद में सैनिक स्कूल सुजानपुर में जमा दो की शिक्षा ग्रहण की है। इसके बाद सेना में चार वर्ष तक आईटी और कम्युनिकेशन में शिक्षा प्राप्त करके अब कमीशन के तहत लेफ्टिनेंट के पद पर सेवाएं देंगे। अनिमेश के दादा यूआर चीमा भी सेना और प्रदेश प्रशासनिक सेवा में एसडीएम के पद से सेवानिवृत हैं और चाचा डॉ. राज कुमार बैजनाथ अस्पताल में चिकित्सक के रूप में सेवारत हैं।
ज्वालामुखी के साहिल बने सेना में लेफ्टिनेंट
क्षेत्र के एक युवा ने अपनी मेहनत और लगन से न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। रैंखा के मत्याल गांव के रहने वाले साहिल कुमार भारतीय सेना अकादमी (आईएमए) देहरादून से प्रशिक्षण पूरा कर लेफ्टिनेंट बन गए हैं। साहिल की इस उपलब्धि के बाद पूरे गांव में खुशी का माहौल है। परिवार की तीसरी पीढ़ी सेना में पहुंची है। साहिल के पिता रिटायर्ड कैप्टन सुरेश कुमार ने बताया कि साहिल बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखता था। साहिल ने अपनी शुरुआती शिक्षा आरएनटी रैंखा से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डीएवी देहरा से जमा दो तक की पढ़ाई की। आगे की पढ़ाई के लिए वह चंडीगढ़ गए, जहां उन्होंने झंझीड़ी से बीटेक किया। बीटेक के दौरान ही उनका रुझान सेना की ओर रहा। इसके बाद साहिल सेना में भर्ती हुए और करीब तीन साल तक सेवाएं दीं। बाद में उन्होंने एसीसी कमीशन परीक्षा पास की और आईएमए देहरादून से प्रशिक्षण लेकर अब लेफ्टिनेंट के पद पर पहुंच गए हैं। साहिल की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि यह परिवार की तीसरी पीढ़ी है जो भारतीय सेना में देश की सेवा करेगी। साहिल के दादा बर्फी राम भी सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और वह साहिल के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रहे। साहिल के पिता सुरेश कुमार सेना में कैप्टन पद से रिटायर हुए हैं। उनके चाचा सूबेदार सुभाष चंद भी भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं। साहिल की मां नीलम देवी और दादी सिमरो देवी ने कहा कि बेटे को सेना की वर्दी में देखकर उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है।
हिमाचल के युवाओं के लिए प्रेरणा बने साहिल
साहिल की सफलता सिर्फ उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर सेना में बड़े पद तक पहुंचने वाले युवा आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनते हैं। ज्वालामुखी क्षेत्र के लोग उम्मीद जता रहे हैं कि साहिल जैसे युवा अन्य युवाओं को भी देश सेवा और बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करेंगे। साहिल की उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के दम पर कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।