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हिमाचल के मंदिरों में चढ़ावे पर रहेगी CCTV की नजर, अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद बड़ी पहल
Sun, 12 Jul 2026 10:53 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 12 Jul 2026 10:53 AM IST
सार
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद हिमाचल सरकार ने सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के लिए नई एसओपी जारी की है। अब दानपात्रों में डबल लॉक, वीडियो रिकॉर्डिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, एक दिन में बैंक में नकदी जमा करने और कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन जैसे नियम लागू होंगे।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के मद्देनजर, हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी नियंत्रण वाले और प्रबंधित मंदिरों में दान और चढ़ावे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी की है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य दानपात्रों में जमा होने वाली नकदी, आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा को मजबूत करना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।
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दानपात्रों में डबल लॉक की व्यवस्था
नई एसओपी के तहत, सभी दानपात्र अब छेड़छाड़ रोधी होंगे। प्रत्येक दानपात्र को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दानपात्रों की चाबियां दोहरे लॉक या बहु-चाबी प्रणाली के तहत रखी जाएंगी, ताकि किसी भी एक व्यक्ति के पास पूर्ण नियंत्रण न रहे। इससे दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और किसी भी तरह की हेराफेरी की संभावना कम होगी। यदि किसी दानपात्र की मरम्मत या उसमें कोई बदलाव किया जाता है, तो उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा।
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पारदर्शी प्रक्रिया और सख्त नियम
सरकार ने सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों को इस एसओपी का पालन करने के लिए 30 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव राकेश कंवर द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, दानपात्र खोलने से लेकर चढ़ावे की गिनती, नकदी जमा करने, आभूषणों के रिकॉर्ड और ऑडिट तक की हर प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होगी। दानपात्र पूर्व निर्धारित तिथियों पर खोले जाएंगे और चढ़ावे की गिनती के समय रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी।
नकदी प्रबंधन और डिजिटल दान को प्रोत्साहन
एसओपी के अनुसार, चढ़ावे से प्राप्त नकदी को गिनती के बाद अधिकतम एक कार्य दिवस के भीतर अधिकृत बैंक खाते में जमा करना होगा। यह सुझाव दिया गया है कि अनावश्यक रूप से कई बैंक खाते रखने के बजाय एक प्रमुख खाते के माध्यम से वित्तीय लेनदेन किया जाए। मंदिरों में सोने, चांदी, आभूषण और विदेशी मुद्रा के लिए अलग-अलग रजिस्टर रखे जाएंगे। प्रत्येक प्राप्ति को डिजिटल और भौतिक दोनों रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा, और आभूषणों व अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की सूची को नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा। श्रद्धालुओं को डिजिटल माध्यम से दान देने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
सरकार ने सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों को इस एसओपी का पालन करने के लिए 30 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव राकेश कंवर द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, दानपात्र खोलने से लेकर चढ़ावे की गिनती, नकदी जमा करने, आभूषणों के रिकॉर्ड और ऑडिट तक की हर प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होगी। दानपात्र पूर्व निर्धारित तिथियों पर खोले जाएंगे और चढ़ावे की गिनती के समय रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी।
नकदी प्रबंधन और डिजिटल दान को प्रोत्साहन
एसओपी के अनुसार, चढ़ावे से प्राप्त नकदी को गिनती के बाद अधिकतम एक कार्य दिवस के भीतर अधिकृत बैंक खाते में जमा करना होगा। यह सुझाव दिया गया है कि अनावश्यक रूप से कई बैंक खाते रखने के बजाय एक प्रमुख खाते के माध्यम से वित्तीय लेनदेन किया जाए। मंदिरों में सोने, चांदी, आभूषण और विदेशी मुद्रा के लिए अलग-अलग रजिस्टर रखे जाएंगे। प्रत्येक प्राप्ति को डिजिटल और भौतिक दोनों रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा, और आभूषणों व अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की सूची को नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा। श्रद्धालुओं को डिजिटल माध्यम से दान देने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
कर्मचारियों पर भी कड़े नियम
इस नई व्यवस्था के तहत, चढ़ावे और नकदी से जुड़े कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा। गिनती कक्ष में काम करने वाले कर्मचारी मोबाइल फोन, बैग या अन्य निजी सामान नहीं ले जा सकेंगे। नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं से जुड़े कर्मचारियों का समय-समय पर स्थानांतरण भी किया जाएगा, ताकि लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के पास नियंत्रण न रहे। मासिक आंतरिक सत्यापन और वार्षिक ऑडिट को अनिवार्य कर दिया गया है, और विभाग व जिला प्रशासन समय-समय पर औचक निरीक्षण भी कर सकेंगे।
यह नई एसओपी मंदिरों में वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी।
इस नई व्यवस्था के तहत, चढ़ावे और नकदी से जुड़े कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा। गिनती कक्ष में काम करने वाले कर्मचारी मोबाइल फोन, बैग या अन्य निजी सामान नहीं ले जा सकेंगे। नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं से जुड़े कर्मचारियों का समय-समय पर स्थानांतरण भी किया जाएगा, ताकि लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के पास नियंत्रण न रहे। मासिक आंतरिक सत्यापन और वार्षिक ऑडिट को अनिवार्य कर दिया गया है, और विभाग व जिला प्रशासन समय-समय पर औचक निरीक्षण भी कर सकेंगे।
यह नई एसओपी मंदिरों में वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी।