हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला: बिजली बोर्ड के जेओए आईटी की अनुबंध सेवा वरिष्ठता और पदोन्नति में होगी शामिल
हाईकोर्ट ने राज्य बिजली बोर्ड के जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (जेओए) आईटी कर्मचारियों के हक में महत्वपूर्ण फैसला दिया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य बिजली बोर्ड के जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (जेओए) आईटी कर्मचारियों के हक में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 83 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए निर्देश दिया है कि कर्मचारियों की नियमितीकरण से पूर्व की बिना ब्रेक अनुबंध सेवा को वरिष्ठता, वार्षिक वेतन वृद्धि और पदोन्नति सहित सभी सेवा लाभों के लिए गिना जाए। जेओए आईटी कर्मचारियों की 7 वर्ष की कुल सेवा (अनुबंध और नियमित सेवा) पूरी होने पर उन्हें वरिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नति के लिए योग्य माना जाएगा। अनुबंध अवधि के दौरान यदि वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं मिली थी, तो उसे नियमितीकरण के समय भविष्य के वेतन और पेंशन लाभों की गणना के लिए काल्पनिक आधार पर जोड़ा जाएगा।
अदालत ने निर्देश दिया है कि कर्मचारियों के बकाये का भुगतान 31 दिसंबर तक कर दिया जाए। ऐसा न होने पर भुगतान की तारीख तक 6 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा। कोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को 7 साल की कुल सेवा (अनुबंध और नियमित) पूरी होने की तिथि से सीनियर असिस्टेंट के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र माना जाए और उपलब्ध जेओए कोटा (57 फीसदी) की रिक्तियों के तहत पात्र कर्मचारियों की डीपीसी आयोजित की जाए। फैसले में साफ किया गया कि वरिष्ठ सहायक पद के लिए क्लर्क का 43 फीसदी कोटा और जेओए आईटी का 57 फीसदी कोटा अलग-अलग है। इसलिए जेओए आईटी कर्मचारियों की अनुबंध सेवा की गिनती से लिपिक वर्ग के हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों का चयन विज्ञापन, आरएंडपी नियमों और योग्यता मापदंडों का पालन करते हुए हुआ है, उनके नियमित होने के बाद उनकी शुरुआती अनुबंध सेवा को सभी लाभों के लिए गिना जाना सांविधानिक अधिकार है।
बोर्ड की दलील को अमान्य दिया करार
राज्य सरकार की ओर से बनाए गए हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी (भर्ती और सेवा शर्तें) अधिनियम, 2024 के आधार पर कर्मचारियों के दावों को खारिज करने की बोर्ड की दलील को हाईकोर्ट ने अमान्य करार दिया है। अदालत ने पाया कि इस अधिनियम को पूर्व में ही असांविधानिक घोषित कर रद्द किया जा चुका है और जिसकी पुष्टि सर्वोच्च न्यायालय ने भी कर दी है।
यह है मामला
मामला हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड में कार्यरत जूनियर ऑफिस असिस्टेंट और सीनियर असिस्टेंट का है। याचिकाकर्ताओं को 2017 से 2022 के बीच कर्मचारी चयन आयोग (एचपीएससी) की र्ती प्रक्रिया और आरएंडपी नियमों के तहत अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था। 3 साल की अनुबंध सेवा पूरी करने के बाद वर्ष 2020 से 2024 के दौरान उनका नियमितीकरण हुआ। कर्मचारियों की मुख्य मांग थी कि उनकी अनुबंध सेवा के 3 वर्षों को वरिष्ठता और सीनियर असिस्टेंट के पद पर पदोन्नति (जिसके लिए 7 वर्ष की न्यूनतम अर्हता आवश्यक है) की पात्रता में शामिल किया जाए। राज्य सरकार की ओर से बनाए गए हिमाचल प्रदेश भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 के आधार पर बोर्ड ने कर्मचारियों के दावों को खारिज कर दिया था।