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हिमाचल नगर निगम चुनाव: भाजपा को नौ सीटों का फायदा; कांग्रेस को छह का नुकसान, 40 सीटों पर महिलाओं का कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 01 Jun 2026 10:00 AM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश में चार नगर निगमों के चुनाव परिणाम से सत्तारूढ़ कांग्रेस को झटका लगा है। चार नगर निगमों के चुनाव परिणामों की समग्र तस्वीर देखें तो भाजपा ने पिछले चुनाव की तुलना में नौ सीटें ज्यादा हासिल की हैं। पढ़ें पूरी खबर...
धर्मशाला के वार्ड-9 से निर्दलीय नरेश कुमार की जीत पर स्मोक बम चलाते समर्थक।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
चार नगर निगमों के चुनाव परिणामों की समग्र तस्वीर देखें तो भाजपा ने पिछले चुनाव की तुलना में नौ सीटें ज्यादा हासिल की हैं, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस को छह सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। चारों नगर निगमों की कुल 63 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने 37 पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस के खाते में 23 सीटें आई हैं। तीन निर्दलीय जीते हैं। पिछले चुनाव यानी 2021 में कुल 64 सीटों में से 28 पर भाजपा, 29 पर कांग्रेस और 07 पर निर्दलीयों ने जीत दर्ज की थी।
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उधर, चुनाव में महिला शक्ति ने अपना दबदबा बनाया है। चारों नगर निगमों के कुल 63 वार्डों में से 40 में महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, जबकि 23 वार्डों में पुरुष उम्मीदवार विजयी रहे हैं। कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 63.5 प्रतिशत रही, जो स्थानीय निकायों में महिला नेतृत्व के मजबूत होते प्रभाव का संकेत है। चारों नगर निगमों में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। विशेष रूप से सोलन, मंडी और पालमपुर में महिला प्रतिनिधियों ने स्पष्ट बढ़त हासिल की, जबकि धर्मशाला में भी महिला उम्मीदवारों की संख्या पुरुषों से अधिक रही।
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मंडी नगर निगम के 14 वार्डों के परिणामों में 10 सीटों पर महिलाओं ने जीत दर्ज की। खलियार से अलकनंदा हांडा, पुरानी मंडी से सरिता, पड्डल से निर्मल, नेला से नर्मदा देवी, मंगवाई से कृष्णा ठाकुर, पैलेस कॉलोनी-1 से गुरदीप कौर, पैलेस कॉलोनी-2 से सुमन, सुहड़ा से नेहा, धनेहड़ा से रजनी शर्मा और दोहन्धी से रीता देवी विजयी रहीं। वहीं सन्यारड, तल्याहड़, समखेतर और भगवाहन वार्डों में पुरुष उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। कुल मिलाकर मंडी में महिलाओं ने लगभग 71 प्रतिशत सीटों पर कब्जा जमाया। धर्मशाला नगर निगम के 17 में से 9 वार्डों में महिला उम्मीदवार और 8 वार्डों में पुरुष उम्मीदवार विजयी रहे। फरसेटगंज से रेखा देवी, मैक्लोडगंज से आशा देवी, कश्मीर हाउस से नीनू शर्मा, खजांची मोहल्ला से शैलजा, कोतवाली बाजार से करिश्मा, सेक्रेट्रिएट से आशू, खेल परिसर से प्रेरणा, बड़ोल से मीना कुमारी और सिद्धपुर से अनुपम ने जीत दर्ज की। पुरुष उम्मीदवारों ने भागसूनाग, सकोह, श्याम नगर, रामनगर, दाड़ी, कंड, खनियारा और सिद्धबाड़ी वार्डों में सफलता हासिल की। यहां महिला प्रतिनिधित्व 52.9 प्रतिशत रहा।
पालमपुर नगर निगम के 15 वार्डों में से 10 सीटों पर महिलाओं ने जीत हासिल की। पालमपुर उपरला से राधा सूद, पालमपुर खास से रणजीत कौर, आईमा से शैली, घुग्गर खिलडू से कविता मिन्हास, बिन्द्रावन से सविता, चौकी से मीनू, मारण्डा से नीलम मलिक, राजपुर से किरणा देवी, टांडा से अंचना और बनूरी से मोनिका शर्मा विजयी रहीं। पालमपुर में महिलाओं की हिस्सेदारी 66.7 प्रतिशत रही। सोलन नगर निगम में महिलाओं ने सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन किया। 17 वार्डों में से 11 वार्डों पर महिला उम्मीदवार विजयी रहीं।
देहुंघाट सपरून से नीलम, रेलवे स्टेशन से सुषमा शर्मा, लोअर बाजार से प्रियंका, जवाहर पार्क से रेखा साहनी, ठोडो ग्राउंड से पूजा, मधुबन कॉलोनी से मीनाक्षी, डिग्री कॉलेज से सरिता, सन्नी साइड से प्रियंका अग्रवाल, हाउसिंग बोर्ड से सुलक्षणा, रबौण आंजी से सीमा और बसाल पट्टी कथेड़ से अरुणा ने जीत दर्ज की। छह वार्डों में पुरुष उम्मीदवार विजयी रहे।
| नगर निगम | (2021) | (2026) | अंतर | (2021) | (2026) | अंतर |
|---|---|---|---|---|---|---|
| धर्मशाला | 05 | 05 | 00 | 08 | 11 | +3 |
| पालमपुर | 11 | 11 | 00 | 02 | 04 | +2 |
| मंडी | 04 | 01 | -3 | 11 | 12 | +1 |
| सोलन | 09 | 06 | -3 | 07 | 10 | +3 |
| कुल योग | 29 | 23 | -6 | 28 | 37 | +9 |
सियासी नफा-नुकसान (2026 vs 2021)
| दल | 2021 | 2026 | अंतर |
|---|---|---|---|
| कांग्रेस | 29 | 23 | -6 |
| भाजपा | 28 | 37 | +9 |
| निर्दलीय | 07 | 03 | -4 |
| कुल योग | 64 | 63 | -1 |
निर्दलियों की भूमिका घटी
खास यह है कि 2021 के चुनाव में इन चारों नगर निगमों में सात निर्दलीय जीतकर आए थे। इस बार इनकी संख्या तीन रह गई है। महापौर और उप महापौर के चयन में कोई भी दल निर्दलियों पर आश्रित नहीं है।
खास यह है कि 2021 के चुनाव में इन चारों नगर निगमों में सात निर्दलीय जीतकर आए थे। इस बार इनकी संख्या तीन रह गई है। महापौर और उप महापौर के चयन में कोई भी दल निर्दलियों पर आश्रित नहीं है।
29 वर्षीय अंचना युवा, 71 वर्षीय सुलक्षणा सबसे वरिष्ठ पार्षद
हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों के चुनाव परिणामों में शहरी मतदाताओं ने सबसे अधिक भरोसा अनुभव और मध्यम आयु वर्ग के नेतृत्व पर जताया है। कुल 63 निर्वाचित पार्षदों में से 44 प्रतिनिधि 40 वर्ष आयु वर्ग से ऊपर के हैं, जो कुल विजेताओं का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। वहीं 40 वर्ष से कम आयु के 15 प्रतिनिधि और 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के केवल 4 प्रतिनिधि चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। पालमपुर नगर निगम के टांडा वार्ड से निर्वाचित 29 वर्षीय अंचना सबसे युवा पार्षद बनकर उभरी हैं, सोलन नगर निगम के हाउसिंग बोर्ड वार्ड से निर्वाचित 71 वर्षीय सुलक्षणा सबसे वरिष्ठ पार्षद चुनी गई हैं। हालांकि समग्र तस्वीर बताती है कि मतदाताओं ने सबसे अधिक भरोसा 40 से 59 वर्ष आयु वर्ग के उन प्रतिनिधियों पर जताया, जिन्हें युवा जोश और प्रशासनिक परिपक्वता के बीच संतुलन का प्रतीक माना जा रहा है। मंडी नगर निगम सबसे अलग दिखाई देता है। यहां 40 वर्ष से कम आयु का कोई विजेता प्रत्याशी नहीं है। 11 विजेता 41 से 59 वर्ष आयु वर्ग से हैं, जबकि 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के तीन प्रतिनिधि अलकनंदा हांडा (60), सरिता (65) और विरेन्द्र सिंह आर्य (62) ने जीत दर्ज की। ब्यूरो
हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों के चुनाव परिणामों में शहरी मतदाताओं ने सबसे अधिक भरोसा अनुभव और मध्यम आयु वर्ग के नेतृत्व पर जताया है। कुल 63 निर्वाचित पार्षदों में से 44 प्रतिनिधि 40 वर्ष आयु वर्ग से ऊपर के हैं, जो कुल विजेताओं का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। वहीं 40 वर्ष से कम आयु के 15 प्रतिनिधि और 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के केवल 4 प्रतिनिधि चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। पालमपुर नगर निगम के टांडा वार्ड से निर्वाचित 29 वर्षीय अंचना सबसे युवा पार्षद बनकर उभरी हैं, सोलन नगर निगम के हाउसिंग बोर्ड वार्ड से निर्वाचित 71 वर्षीय सुलक्षणा सबसे वरिष्ठ पार्षद चुनी गई हैं। हालांकि समग्र तस्वीर बताती है कि मतदाताओं ने सबसे अधिक भरोसा 40 से 59 वर्ष आयु वर्ग के उन प्रतिनिधियों पर जताया, जिन्हें युवा जोश और प्रशासनिक परिपक्वता के बीच संतुलन का प्रतीक माना जा रहा है। मंडी नगर निगम सबसे अलग दिखाई देता है। यहां 40 वर्ष से कम आयु का कोई विजेता प्रत्याशी नहीं है। 11 विजेता 41 से 59 वर्ष आयु वर्ग से हैं, जबकि 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के तीन प्रतिनिधि अलकनंदा हांडा (60), सरिता (65) और विरेन्द्र सिंह आर्य (62) ने जीत दर्ज की। ब्यूरो
जयराम के गढ़ में भाजपा की बादशाहत रही कायम
नगर निगम मंडी के चुनाव के नतीजे केवल स्थानीय निकाय के परिणाम नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी कई संदेश देने वाले साबित हुए हैं। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के गृह क्षेत्र में भाजपा ने 14 में से 12 वार्ड जीतकर न केवल नगर निगम पर दोबारा कब्जा बरकरार रखा, बल्कि यह भी दिखा दिया कि मंडी शहर में उनका संगठन और जनाधार अभी भी मजबूत है। दूसरी ओर प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस एक सीट पर सिमट गई। यह पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। मंडी संसदीय क्षेत्र और विशेष रूप से मंडी शहर लंबे समय से जयराम ठाकुर की राजनीतिक ताकत का केंद्र माना जाता है। यह चुनाव केवल नगर निगम की सत्ता तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़कर भी देखा जा रहा था। राजनीतिक रूप से सबसे बड़ा संदेश यह है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी कांग्रेस मंडी शहर के मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद नहीं कर सकी। सरकार में होने के बावजूद कांग्रेस को संगठनात्मक कमजोरी और जनसमर्थन की कमी का सामना करना पड़ा। चार के मुकाबले इस बार कांग्रेस एक सीट पर सिमट कर रह गई है।
भाजपा की जीत की वजह
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर फैक्टर
मजबूत संगठन व सही टिकट आवंटन
चुनाव के शुरू में ही मजबूत प्रचार
भाजपा के कैडर से प्रचार में उतरना
कांग्रेस की हार के कारण
टिकट आवंटन में बैठा असंतुलन
बागियों ने खुलकर विरोध किया
प्रचार में शुरू से ही ताकत नहीं झोंकी
कांग्रेस का सुस्त और कमजोर संगठन
नगर निगम मंडी के चुनाव के नतीजे केवल स्थानीय निकाय के परिणाम नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी कई संदेश देने वाले साबित हुए हैं। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के गृह क्षेत्र में भाजपा ने 14 में से 12 वार्ड जीतकर न केवल नगर निगम पर दोबारा कब्जा बरकरार रखा, बल्कि यह भी दिखा दिया कि मंडी शहर में उनका संगठन और जनाधार अभी भी मजबूत है। दूसरी ओर प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस एक सीट पर सिमट गई। यह पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। मंडी संसदीय क्षेत्र और विशेष रूप से मंडी शहर लंबे समय से जयराम ठाकुर की राजनीतिक ताकत का केंद्र माना जाता है। यह चुनाव केवल नगर निगम की सत्ता तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़कर भी देखा जा रहा था। राजनीतिक रूप से सबसे बड़ा संदेश यह है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी कांग्रेस मंडी शहर के मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद नहीं कर सकी। सरकार में होने के बावजूद कांग्रेस को संगठनात्मक कमजोरी और जनसमर्थन की कमी का सामना करना पड़ा। चार के मुकाबले इस बार कांग्रेस एक सीट पर सिमट कर रह गई है।
भाजपा की जीत की वजह
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर फैक्टर
मजबूत संगठन व सही टिकट आवंटन
चुनाव के शुरू में ही मजबूत प्रचार
भाजपा के कैडर से प्रचार में उतरना
कांग्रेस की हार के कारण
टिकट आवंटन में बैठा असंतुलन
बागियों ने खुलकर विरोध किया
प्रचार में शुरू से ही ताकत नहीं झोंकी
कांग्रेस का सुस्त और कमजोर संगठन
भाजपा की जीत से बढ़ा सुधीर शर्मा का सियासी कद, नए चेहरों पर दांव सफल
सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने नगर निगम धर्मशाला के चुनावी नतीजों ने शहर की सियासत पर भाजपा की मजबूत पकड़ और कांग्रेस के घटते आधार की तस्वीर पेश की है। 17 वार्डों वाले नगर निगम में 11 सीटें जीत भाजपा ने पहली बार अपने बूते बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस फिर से पांच सीटों पर सिमट गई। दिलचस्प बात यह रही कि निर्दलीय और बागी प्रत्याशी भी नतीजों पर असर नहीं छोड़ पाए। भाजपा ने अधिकतर वार्डों में नए प्रत्याशियों पर दांव खेला था।
विधायक सुधीर शर्मा की यह रणनीति कामयाबी रही। 2021में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो बनी थी, लेकिन बहुमत से एक कदम दूर रह गई थी। तब 8 सीटें भाजपा, 5 कांग्रेस और 4 निर्दलीयों के खाते में गई थीं। मेयर पद के लिए भाजपा को निर्दलीयों का सहारा लेना पड़ा था। इस बार मतदाताओं ने स्पष्ट जनादेश दिया है। पूर्व मेयर ओंकार नैहरिया व डिप्टी मेयर रह चुकीं तजेंद्र कौर समेत कुछ नेताओं की बगावत का भाजपा को बड़ा नुकसान नहीं हुआ। सबसे अधिक चर्चा सुधीर शर्मा की राजनीतिक प्रतिष्ठा को लेकर रही। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद से वह राजनीतिक हमलों के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में नगर निगम चुनाव को उनकी सियासी पकड़ की परीक्षा माना जा रहा था। इस जीत ने यह संकेत दिया है कि धर्मशाला में उनकी सियासी जमीन अभी भी उपजाऊ है। कुशल चुनावी प्रबंधन को भी उन्होंने एक बार फिर साबित किया है। यह बड़ी जीत पार्टी में सुधीर की स्थिति को मजबूती देने का काम करेगी।
कांग्रेस की हार के कारण
नगर निगम वार्डों में प्रत्याशियों के चयन में देरी
मजबूत संगठन की कमी, बागी हुए कई लोग
कांग्रेस के पुराने चेहरों को नजर अंदाज करना
भाजपा की जीत के कारण
चुनाव में समय पर प्रत्याशियों की घोषणा करना
नगर निगम चुनाव करवाने को मजबूत संगठन
कांग्रेस की अधूरी गारंटियों को बनाया आधार
सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने नगर निगम धर्मशाला के चुनावी नतीजों ने शहर की सियासत पर भाजपा की मजबूत पकड़ और कांग्रेस के घटते आधार की तस्वीर पेश की है। 17 वार्डों वाले नगर निगम में 11 सीटें जीत भाजपा ने पहली बार अपने बूते बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस फिर से पांच सीटों पर सिमट गई। दिलचस्प बात यह रही कि निर्दलीय और बागी प्रत्याशी भी नतीजों पर असर नहीं छोड़ पाए। भाजपा ने अधिकतर वार्डों में नए प्रत्याशियों पर दांव खेला था।
विधायक सुधीर शर्मा की यह रणनीति कामयाबी रही। 2021में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो बनी थी, लेकिन बहुमत से एक कदम दूर रह गई थी। तब 8 सीटें भाजपा, 5 कांग्रेस और 4 निर्दलीयों के खाते में गई थीं। मेयर पद के लिए भाजपा को निर्दलीयों का सहारा लेना पड़ा था। इस बार मतदाताओं ने स्पष्ट जनादेश दिया है। पूर्व मेयर ओंकार नैहरिया व डिप्टी मेयर रह चुकीं तजेंद्र कौर समेत कुछ नेताओं की बगावत का भाजपा को बड़ा नुकसान नहीं हुआ। सबसे अधिक चर्चा सुधीर शर्मा की राजनीतिक प्रतिष्ठा को लेकर रही। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद से वह राजनीतिक हमलों के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में नगर निगम चुनाव को उनकी सियासी पकड़ की परीक्षा माना जा रहा था। इस जीत ने यह संकेत दिया है कि धर्मशाला में उनकी सियासी जमीन अभी भी उपजाऊ है। कुशल चुनावी प्रबंधन को भी उन्होंने एक बार फिर साबित किया है। यह बड़ी जीत पार्टी में सुधीर की स्थिति को मजबूती देने का काम करेगी।
कांग्रेस की हार के कारण
नगर निगम वार्डों में प्रत्याशियों के चयन में देरी
मजबूत संगठन की कमी, बागी हुए कई लोग
कांग्रेस के पुराने चेहरों को नजर अंदाज करना
भाजपा की जीत के कारण
चुनाव में समय पर प्रत्याशियों की घोषणा करना
नगर निगम चुनाव करवाने को मजबूत संगठन
कांग्रेस की अधूरी गारंटियों को बनाया आधार
सत्ताधारी कांग्रेस के 5 दिग्गज मंत्री भी नहीं बचा पाए पार्टी की साख
वर्ष 2021 में नगर परिषद से नगर निगम बने सोलन में इस बार भाजपा ने 17 में से 10 सीटें जीतकर अपना महापौर व उपमहापौर बनाने का दावा पक्का कर लिया है। मुख्यमंत्री सुक्खू व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल समेत अन्य चार मंत्री भी नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को जीत नहीं दिला पाए। भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एकतरफा जीत दर्ज की है। हालांकि, इस जीत के सूत्रधार पूर्व सीएम जयराम ठाकुर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल व सांसद अनुराग ठाकुर रहे। बिंदल चुनाव के दौरान यहां पूरी तरह से डटे रहे। उन्होंने कई बैठकें कीं और हर वार्ड में खुद फीडबैक लेते रहे। दूसरी ओर मुख्यमंत्री सुक्खू ने यहां पर प्रचार के अंतिम दिन बड़ी रैली की थी। रैली में भीड़ तो खूब जुटी। हालांकि, जिस जगह रैली थी, कांग्रेस उस वार्ड में भी हार गई। वहीं कांग्रेस ने पांच मंत्री सोलन नगर निगम में लगाए थे। इसमें उद्योगमंत्री हर्षवर्धन चौहान को नगर निगम चुनाव का प्रभारी बनाया हुआ था, जबकि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह को सोलन नगर निगम चुनाव का जिम्मा सौंपा था। इन्होंने कई दिनों तक यहां पर प्रचार किया। साथ ही कई विधायक और बोर्ड व निगमों के अध्यक्ष भी यहां पर डटे रहे, मगर वह भी कांग्रेस के आंकड़े को जीत तक नहीं पहुंचा पाए। यह हार कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय बन गई है। संवाद
कांग्रेस की हार के कारण
कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी सामने आई
टिकटों का भी किया गया गलत आवंटन
पिछले चुनाव में किए वादों को पूरा न करना
भाजपा की जीत के कारण
पिछले अधूरे वादों को भुनाने में कामयाबी
गुटबाजी के बावजूद एकजुटता दिखाना
भाजपा ने किया टिकटों का सही आवंटन
वर्ष 2021 में नगर परिषद से नगर निगम बने सोलन में इस बार भाजपा ने 17 में से 10 सीटें जीतकर अपना महापौर व उपमहापौर बनाने का दावा पक्का कर लिया है। मुख्यमंत्री सुक्खू व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल समेत अन्य चार मंत्री भी नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को जीत नहीं दिला पाए। भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एकतरफा जीत दर्ज की है। हालांकि, इस जीत के सूत्रधार पूर्व सीएम जयराम ठाकुर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल व सांसद अनुराग ठाकुर रहे। बिंदल चुनाव के दौरान यहां पूरी तरह से डटे रहे। उन्होंने कई बैठकें कीं और हर वार्ड में खुद फीडबैक लेते रहे। दूसरी ओर मुख्यमंत्री सुक्खू ने यहां पर प्रचार के अंतिम दिन बड़ी रैली की थी। रैली में भीड़ तो खूब जुटी। हालांकि, जिस जगह रैली थी, कांग्रेस उस वार्ड में भी हार गई। वहीं कांग्रेस ने पांच मंत्री सोलन नगर निगम में लगाए थे। इसमें उद्योगमंत्री हर्षवर्धन चौहान को नगर निगम चुनाव का प्रभारी बनाया हुआ था, जबकि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह को सोलन नगर निगम चुनाव का जिम्मा सौंपा था। इन्होंने कई दिनों तक यहां पर प्रचार किया। साथ ही कई विधायक और बोर्ड व निगमों के अध्यक्ष भी यहां पर डटे रहे, मगर वह भी कांग्रेस के आंकड़े को जीत तक नहीं पहुंचा पाए। यह हार कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय बन गई है। संवाद
कांग्रेस की हार के कारण
कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी सामने आई
टिकटों का भी किया गया गलत आवंटन
पिछले चुनाव में किए वादों को पूरा न करना
भाजपा की जीत के कारण
पिछले अधूरे वादों को भुनाने में कामयाबी
गुटबाजी के बावजूद एकजुटता दिखाना
भाजपा ने किया टिकटों का सही आवंटन
बुटेल का वर्चस्व बरकरार, कांग्रेस अजेय, भाजपा एक बार फिर चूकी
नगर निगम पालमपुर के चुनाव में कांग्रेस को जीत की हैट्रिक लगाने से रोकने में भाजपा नाकाम साबित हुई। 15 वार्डों वाले नगर निगम में कांग्रेस ने एक बार फिर पूर्ण बहुमत हासिल कर भगवा दल को बड़ा झटका दिया। भाजपा की सीटें पिछले चुनाव के मुकाबले दो से बढ़कर चार जरूर हुईं, लेकिन चाय नगरी में कमल खिलाने की हसरत इस बार भी अधूरी रही। करारी हार से पार्टी के पालमपुर में मिशन 2027 की संभावनाओं को चोट पहुंची है। कांग्रेस ने विधायक आशीष बुटेल के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल कर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अहम सियासी बढ़त कायम की है। नतीजों से साफ है कि बुटेल की अगुवाई में पालमपुर कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है, तमाम प्रत्याशियों के चयन में भी विधायक बुटेल की ही चली थी। इस चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने अपने जीते-जी एक बार पार्टी को जीतते देखने की अपील की थी। पार्टी ने प्रचार में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, सांसद राजीव भारद्वाज, प्रदेश उपाध्यक्ष विपिन परमार, त्रिलोक कपूर समेत कई दिग्गज नेताओं को उतारा था। भाजपा नेताओं की एकजुटता को देखकर लग रहा था कि कांग्रेस को कड़ी टक्कर देकर उलटफेर कर सकती है, लेकिन तमाम दावे और आक्रामक प्रचार भी भाजपा की नैया पार नहीं लगा सके। इस जीत से पार्टी के भीतर विधायक आशीष बुटेल का कद और बढ़ेगा।
कांग्रेस की जीत के कारण
विधायक आशीष बुटेल के नेतृत्व में एकजुटता
चुनाव में सही समय पर सही टिकट आंवटन
एकजुटता से चुनाव प्रचार किया गया
भाजपा की हार के कारण
तीन निगमों जैसी भाजपा में एकजुटता न होना
पालमपुर में ही रही मजबूत नेतृत्व की कमी
यहां टिकट आवंटन पर सवाल उठाए गए
नगर निगम पालमपुर के चुनाव में कांग्रेस को जीत की हैट्रिक लगाने से रोकने में भाजपा नाकाम साबित हुई। 15 वार्डों वाले नगर निगम में कांग्रेस ने एक बार फिर पूर्ण बहुमत हासिल कर भगवा दल को बड़ा झटका दिया। भाजपा की सीटें पिछले चुनाव के मुकाबले दो से बढ़कर चार जरूर हुईं, लेकिन चाय नगरी में कमल खिलाने की हसरत इस बार भी अधूरी रही। करारी हार से पार्टी के पालमपुर में मिशन 2027 की संभावनाओं को चोट पहुंची है। कांग्रेस ने विधायक आशीष बुटेल के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल कर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अहम सियासी बढ़त कायम की है। नतीजों से साफ है कि बुटेल की अगुवाई में पालमपुर कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है, तमाम प्रत्याशियों के चयन में भी विधायक बुटेल की ही चली थी। इस चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने अपने जीते-जी एक बार पार्टी को जीतते देखने की अपील की थी। पार्टी ने प्रचार में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, सांसद राजीव भारद्वाज, प्रदेश उपाध्यक्ष विपिन परमार, त्रिलोक कपूर समेत कई दिग्गज नेताओं को उतारा था। भाजपा नेताओं की एकजुटता को देखकर लग रहा था कि कांग्रेस को कड़ी टक्कर देकर उलटफेर कर सकती है, लेकिन तमाम दावे और आक्रामक प्रचार भी भाजपा की नैया पार नहीं लगा सके। इस जीत से पार्टी के भीतर विधायक आशीष बुटेल का कद और बढ़ेगा।
कांग्रेस की जीत के कारण
विधायक आशीष बुटेल के नेतृत्व में एकजुटता
चुनाव में सही समय पर सही टिकट आंवटन
एकजुटता से चुनाव प्रचार किया गया
भाजपा की हार के कारण
तीन निगमों जैसी भाजपा में एकजुटता न होना
पालमपुर में ही रही मजबूत नेतृत्व की कमी
यहां टिकट आवंटन पर सवाल उठाए गए
नगर निगमों के नतीजे दे रहे बदली सियासी बयार का संदेश
हिमाचल प्रदेश में चार नगर निगमों के छोटे चुनाव के नतीजे बड़ा सियासी संदेश दे रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी चिह्न पर हुए ये चुनाव प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बदली सियासी बयार का रुख बयां कर रहे हैं। चार में से तीन नगर निगमों में स्पष्ट बहुमत हासिल कर भाजपा ने मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है। पालमपुर में ही अपने दुर्ग को बचा पाई सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले आए ये नतीजे आत्ममंथन का अवसर दे रहे हैं। प्रदेश के चार बड़े शहरों का यह चुनाव कई बड़े नेताओं के सियासी इम्तिहान के रूप में भी देखा जा रहा है। सत्तारूढ़ कांग्रेस की ओर से मंत्री-विधायक और भाजपा के तमाम बड़े नेता चुनाव प्रचार में उतरे थे।
मंडी में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व सीएम जयराम ठाकुर, धर्मशाला में विधायक व पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा, पालमपुर में विधायक आशीष बुटेल और सोलन में मंत्री धनीराम शांडिल की प्रतिष्ठा दांव पर थी। चार में से तीन नगर निगमों को फतह कर विपक्षी भाजपा सत्तारूढ़ कांग्रेस पर भारी पड़ी। भाजपा ने मंडी, धर्मशाला और सोलन नगर निगम में जीत हासिल की है तो कांग्रेस एकमात्र नगर निगम पालमपुर में ही बढ़त बना पाई है। पालमपुर सहित पिछले चुनाव में धर्मशाला और सोलन नगर निगम में भी कांग्रेस काबिज हुई थी। नगर निगम सोलन में कांग्रेस की यह हार स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल के लिए भी झटका है। शांडिल सुक्खू सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं।
नगर निगम धर्मशाला में भाजपा की रिकॉर्ड बढ़त के बाद यहां के विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा की भी पैठ बढ़ी है। कांग्रेस से भाजपा में गए सुधीर शर्मा निगम चुनाव से अपना दमखम साबित करने में एक बार फिर सफल हुए हैं। इसी तरह मंडी में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिल शर्मा अपना परचम लहराने में एक बार फिर कामयाब हुए हैं। नगर निगम पालमपुर में कांग्रेस की जीत से यहां विधायक आशीष बुटेल की भी मजबूत जमीनी पकड़ दिखी है। बुटेल परिवार का यहां पहले से ही खासा प्रभाव रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार भी नगर निगम पालमपुर के चुनाव में भाजपा की जीत चाह रहे थे, मगर इस चुनाव में उनकी अपील पार्टी के काम नहीं आ पाई है। पालमपुर से ही ताल्लुक रखने वाली पूर्व राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी और भाजपा नेता विपिन परमार और त्रिलोक कपूर भी यहां कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए हैं।
उधर, सीएम के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि पालमपुर और सोलन नगर निगम से हमें ज्यादा उम्मीद थी। इसमें मंथन करेंगे कि कहां गलती हुई है। हमें ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों से बहुत बड़ा जनसमर्थन मिला है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राकेश जम्वाल कहते हैं कि जनता ने कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 75 प्रतिशत से अधिक वार्डों में भाजपा के पक्ष में पड़े मत संकेत दे रहे हैं कि जनमानस कांग्रेस सरकार के खिलाफ है। सेमीफाइनल भाजपा जीत चुकी है।
हिमाचल प्रदेश में चार नगर निगमों के छोटे चुनाव के नतीजे बड़ा सियासी संदेश दे रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी चिह्न पर हुए ये चुनाव प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बदली सियासी बयार का रुख बयां कर रहे हैं। चार में से तीन नगर निगमों में स्पष्ट बहुमत हासिल कर भाजपा ने मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है। पालमपुर में ही अपने दुर्ग को बचा पाई सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले आए ये नतीजे आत्ममंथन का अवसर दे रहे हैं। प्रदेश के चार बड़े शहरों का यह चुनाव कई बड़े नेताओं के सियासी इम्तिहान के रूप में भी देखा जा रहा है। सत्तारूढ़ कांग्रेस की ओर से मंत्री-विधायक और भाजपा के तमाम बड़े नेता चुनाव प्रचार में उतरे थे।
मंडी में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व सीएम जयराम ठाकुर, धर्मशाला में विधायक व पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा, पालमपुर में विधायक आशीष बुटेल और सोलन में मंत्री धनीराम शांडिल की प्रतिष्ठा दांव पर थी। चार में से तीन नगर निगमों को फतह कर विपक्षी भाजपा सत्तारूढ़ कांग्रेस पर भारी पड़ी। भाजपा ने मंडी, धर्मशाला और सोलन नगर निगम में जीत हासिल की है तो कांग्रेस एकमात्र नगर निगम पालमपुर में ही बढ़त बना पाई है। पालमपुर सहित पिछले चुनाव में धर्मशाला और सोलन नगर निगम में भी कांग्रेस काबिज हुई थी। नगर निगम सोलन में कांग्रेस की यह हार स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल के लिए भी झटका है। शांडिल सुक्खू सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं।
नगर निगम धर्मशाला में भाजपा की रिकॉर्ड बढ़त के बाद यहां के विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा की भी पैठ बढ़ी है। कांग्रेस से भाजपा में गए सुधीर शर्मा निगम चुनाव से अपना दमखम साबित करने में एक बार फिर सफल हुए हैं। इसी तरह मंडी में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिल शर्मा अपना परचम लहराने में एक बार फिर कामयाब हुए हैं। नगर निगम पालमपुर में कांग्रेस की जीत से यहां विधायक आशीष बुटेल की भी मजबूत जमीनी पकड़ दिखी है। बुटेल परिवार का यहां पहले से ही खासा प्रभाव रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार भी नगर निगम पालमपुर के चुनाव में भाजपा की जीत चाह रहे थे, मगर इस चुनाव में उनकी अपील पार्टी के काम नहीं आ पाई है। पालमपुर से ही ताल्लुक रखने वाली पूर्व राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी और भाजपा नेता विपिन परमार और त्रिलोक कपूर भी यहां कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए हैं।
उधर, सीएम के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि पालमपुर और सोलन नगर निगम से हमें ज्यादा उम्मीद थी। इसमें मंथन करेंगे कि कहां गलती हुई है। हमें ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों से बहुत बड़ा जनसमर्थन मिला है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राकेश जम्वाल कहते हैं कि जनता ने कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 75 प्रतिशत से अधिक वार्डों में भाजपा के पक्ष में पड़े मत संकेत दे रहे हैं कि जनमानस कांग्रेस सरकार के खिलाफ है। सेमीफाइनल भाजपा जीत चुकी है।