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हिमाचल: नगर निगम चुनाव के नतीजे घोषित, पर मेयर पद के लिए आरक्षण रोस्टर तय नहीं; प्रदेश में बढ़ी राजनीतिक हलचल

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 01 Jun 2026 11:46 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश में चार नगर निगमों के चुनाव परिणाम घोषित हो चुके हैं लेकिन आरक्षण रोस्टर अभी तय नहीं हुआ है। रोस्टर जारी न होने के कारण कई संभावित दावेदार और राजनीतिक दल अभी अपनी अंतिम रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal MC Election Results Declared But Reservation Roster for Mayoral Post Not Yet Finalized
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों के चुनाव परिणाम घोषित हो चुके हैं और 63 वार्डों में नए पार्षद चुन लिए गए हैं। इसके साथ ही अब राजनीतिक दलों, निर्वाचित पार्षदों और संभावित दावेदारों की नजर मेयर पद के आरक्षण रोस्टर पर टिक गई है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अभी तक महापौर पद का आरक्षण रोस्टर जारी नहीं किया गया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं और अटकलों का दौर तेज हो गया है। नगर निगमों में मेयर का पद स्थानीय राजनीति का सबसे प्रतिष्ठित पद है। यही कारण है कि चुनाव परिणाम आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि चारों नगर निगमों में महापौर की कुर्सी किस श्रेणी के लिए आरक्षित होगी।

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रोस्टर जारी न होने के कारण कई संभावित दावेदार और राजनीतिक दल अभी अपनी अंतिम रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के समय भी मेयर पद के आरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। उस दौरान राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों ने सरकार से शीघ्र रोस्टर जारी करने की मांग की थी। अब जबकि चुनाव परिणाम भी घोषित हो चुके हैं, तब भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे निर्वाचित पार्षदों के बीच भी मेयर पद को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। नगर निगमों की राजनीति में मेयर पद का आरक्षण रोस्टर निर्णायक भूमिका निभाता है। रोस्टर के आधार पर ही यह तय होता है कि किस वर्ग के पार्षद मेयर पद की दौड़ में शामिल हो सकेंगे। ऐसे में रोस्टर जारी होने के बाद ही वास्तविक राजनीतिक समीकरण सामने आएंगे और विभिन्न दलों के भीतर नेतृत्व को लेकर मंथन तेज होगा। हालांकि, रोस्टर जारी न होने के कारण कई संभावित दावेदार और राजनीतिक दल अभी अपनी अंतिम रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं।
 
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कार्यकाल पांच वर्ष होने से बढ़ा महत्व
इस बार स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश सरकार ने हाल ही में नगर निगम महापौर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया है। महापौर का कार्यकाल पांच वर्ष किए जाने से इस पद का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। पहले ढाई वर्ष के कार्यकाल के कारण नेतृत्व परिवर्तन की संभावना बनी रहती थी, लेकिन अब एक बार चुना गया महापौर पूरे कार्यकाल तक नगर निगम का नेतृत्व करेगा। शहरी विकास विभाग के अनुसार महापौर के आरक्षण रोस्टर को लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर विधि विभाग को भेजा था। 

सभी नतीजे आने पर खत्म होगी आचार संहिता
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के आम चुनाव के कारण आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू थी। यह आचार संहिता जिला परिषद के सभी नतीजे घोषित होने के बाद सोमवार को समाप्त हो जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे हटाने की अधिसूचना जारी करेगा। आचार संहिता हटने से प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। सरकारी विभागों के पास लंबित प्रस्तावों और परियोजनाओं पर अब तेजी से निर्णय लिए जा सकेंगे। शिक्षा विभाग से संबद्ध केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड स्कूलों में 6200 शिक्षकों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। 
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