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Himachal News: वॉयस क्लोनिंग और कॉल फारवर्डिंग से भी खाते खाली कर रहे साइबर ठग, हिमाचल पुलिस ने की ये अपील
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 04 Feb 2026 11:56 AM IST
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सार
साइबर ठग हिमाचल प्रदेश के भोले भाले लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। शिमला में शहर के बुजुर्ग के खाते से ठगों ने 10 लाख रुपये निकाल लिए गए। वहीं, पुलिस ने अपील की है कि धोखाधड़ी होने पर जल्द साइबर हेल्पलाइन नंबर 190 पर कॉल करें। पढ़ें पूरी खबर...
साइबर अपराध
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साइबर ठग लोगों से ठगी करने के नए-नए हथकंडे अपनाते रहते हैं। वॉयस क्लोनिंग और कॉल फारवर्डिंग स्कैम के जरिये अब लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपये की राशि निकाली जा रही है। इस तरह के एक मामले में शिमला शहर के एक बुजुर्ग के खाते से अनजान कॉल आने के बाद दस लाख रुपये निकल गए। शिकायतकर्ता के अनुसार उसे एक अनजान नंबर से फोन आया और उनके खाते से दस लाख रुपये की रकम निकल गई।
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यह मामला राजधानी के छोटा शिमला क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक बुजुर्ग का दावा है कि उनके पास न तो कोई ओटीपी आया न ही उन्होंने किसी लिंक पर क्लिक किया था। एक मोबाइल फोन कॉल आई थी जिसे उठाने के बाद उनके खाते से तुरंत दस लाख रुपये निकलने के मैसेज आए। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक साइबर अपराधी आपको फोन करके किसी जानकार से बात करवाने और अन्य तरह से झांसे में देकर कॉल मर्ज करने के लिए बोलते हैं। व्यक्ति कॉल मर्ज करता है तो उसका फोन बैंक ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन सिस्टम से जुड़ जाता है।
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ठग कॉल मर्ज के लिए नहीं बल्कि बैंक ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन सिस्टम की रिक्वेस्ट भेजते हैं। इसके बाद ठग आपका खाता खाली कर देते हैं। इस तरह से कई बार साइबर अपराधी एक विशेष प्रकार का कोड नंबर दबाने के लिए कहते हैं। ऐसा करने से भी कॉल फाारवर्ड हो जाती है और व्यक्ति की सभी कॉल तथा मैसेज उस नंबर पर चले जाते हैं। इससे साइबर ठग ओटीपी जनरेट करके बैंक खातों से रकम निकाल लेते हैं। शिमला पुलिस की टीम के साथ ही अब साइबर विंग की टीम भी इस मामले की जांच कर रही है। इसमें उन बैंक खातों की जांच की जा रही है, जिसके जरिये राशि एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर की गई है।
अनजान कॉलर की किसी बात पर न करें विश्वास
साइबर विशेषज्ञ एवं आईटी कंपनी के संचालक अजय ने बताया कि कई बार कॉल फारवर्डिंग के जरिये लोगों से साइबर धोखाधड़ी के मामले सामने आते हैं। हालांकि सीधे कॉल के जरिये ठगी करना मुश्किल है लेकिन कई बार लोग लालच, डर और अन्य कारणों से कोड दबाकर और लिंक पर क्लिक कर देते हैं। ऐसी कॉल से लोग सावधान रहें। साइबर ठगी के मामलों में पुलिस पांच लेयर तक के बैंक खातों की जांच करती है लेकिन शिकायत में देरी होने के कारण पैसा निकल चुका होता है। ऐसे में लोगों से पुलिस ने अपील की है कि धोखाधड़ी होने पर जल्द साइबर हेल्पलाइन नंबर 190 पर कॉल करेें। इसमें जितना जल्दी कॉल करेंगे उतना ही पैसे वापस मिलने संभावना रहती है।
साइबर विशेषज्ञ एवं आईटी कंपनी के संचालक अजय ने बताया कि कई बार कॉल फारवर्डिंग के जरिये लोगों से साइबर धोखाधड़ी के मामले सामने आते हैं। हालांकि सीधे कॉल के जरिये ठगी करना मुश्किल है लेकिन कई बार लोग लालच, डर और अन्य कारणों से कोड दबाकर और लिंक पर क्लिक कर देते हैं। ऐसी कॉल से लोग सावधान रहें। साइबर ठगी के मामलों में पुलिस पांच लेयर तक के बैंक खातों की जांच करती है लेकिन शिकायत में देरी होने के कारण पैसा निकल चुका होता है। ऐसे में लोगों से पुलिस ने अपील की है कि धोखाधड़ी होने पर जल्द साइबर हेल्पलाइन नंबर 190 पर कॉल करेें। इसमें जितना जल्दी कॉल करेंगे उतना ही पैसे वापस मिलने संभावना रहती है।
ये बरतें सावधानियां
- अनजान नंबर से सावधान : कोई भी अंजान व्यक्ति आपसे कॉल फारवर्डिंग (21 या *401#) एक्टिव कराने के लिए कहें तो तुरंत मना कर दें।
- यदि आपने गलती से कोई कोड डायल कर दिया है, तो ## 002# डायल करके आप सभी प्रकार की फारवर्डिंग को बंद कर सकते हैं।
- *# 21# डायल करके आप अपने फोन की सुरक्षा को जांच सकते हैं। इससे पता चलेगा कि आपकी कॉल, मैसेज फारवर्ड तो नहीं हैं। नॉट फारवर्डिड या डिसएबल्ड दिखे तो आप सुरक्षित हैं
- किसी भी व्यक्ति को अपना वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) न बताएं, भले ही वह खुद को बैंक अधिकारी या डिलीवरी एजेंट बताए।
- किसी भी प्रकार के धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर जाकर शिकायत करें।
साइबर ठगी के मामलों में ऐसा भी सामने आ रहा है कि अनजान नंबर से कॉल आने के बाद बैंक से पैसे निकल जाते हैं। इसमें कई बार लोगों को कॉल फॉरवर्ड करने के नाम भी ठगी का शिकार बनाया जाता है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। -संजीव कुमार गांधी, डीआईजी
