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Himachal News: सीएम और शिक्षा मंत्री से मिले शिक्षक संगठन, सौंपा पांच सूत्रीय मांग-पत्र; मिला ये आश्वासन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 04 Feb 2026 11:38 AM IST
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सार
बुधवार को ज्वाइंट टीचर्स फेडरेशन ऑफ हिमाचल प्रदेश के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पांच सूत्रीय मांग-पत्र प्रस्तुत किया। पढ़ें पूरी खबर...
ज्वाइंट टीचर्स फेडरेशन ऑफ हिमाचल प्रदेश का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई मुद्दे पर शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के समक्ष पांच सूत्रीय मांग-पत्र प्रस्तुत किया। बुधवार को ज्वाइंट टीचर्स फेडरेशन ऑफ हिमाचल प्रदेश के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने सीबीएसई से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से भेंट की।
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ज्वाइंट टीचर्स फेडरेशन ऑफ हिमाचल प्रदेश का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
यह संयुक्त प्रतिनिधिमंडल हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष अजय नेगी की अध्यक्षता में मिला। इस संयुक्त मोर्चे में प्रधानाचार्य संघ के अध्यक्ष हरि शर्मा, मुख्य अध्यापक संघ के अध्यक्ष रतन वर्मा, हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष अजय नेगी, महासचिव इंदर ठाकुर, चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर, एचजीटीयू के राज्य अध्यक्ष नरोत्तम वर्मा एवं महावीर कैंथला, सर्व टीजीटी महासंघ के राज्य अध्यक्ष सुनील कुमार, उपाध्यक्ष राजेश शर्मा, पीटीएफ के राज्य अध्यक्ष रमेश शर्मा, महासचिव रजनीश कौशिक, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राम सिंह, वित्त सचिव अनिल भाटिया, सीएंडवी शिक्षक संघ के अध्यक्ष शेर सिंह और साइंस टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रकेश धीमान शामिल रहे।
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मुख्य प्रेस सचिव जयराम शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि संयुक्त मोर्चे ने शिक्षा मंत्री के समक्ष निम्नलिखित पांच प्रमुख मांगें रखीं।
2. माननीय शिक्षा सचिव द्वारा दिनांक 19 जनवरी को जारी अधिसूचना के कॉलम संख्या 5.6.2 का कड़ा विरोध दर्ज किया गया। इस प्रावधान में यह कहा गया है कि यदि कोई शिक्षक अपना मूल कैडर छोड़कर सीबीएसई विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करता है तो उसके पूर्व के सभी अधिकार समाप्त माने जाएंगे।
संयुक्त मोर्चे ने मांग की कि 19 जनवरी की अधिसूचना को संशोधित कर एक स्पष्ट एवं भ्रम-रहित अधिसूचना जारी की जाए, जिसमें भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा नियमों को स्पष्ट किया जाए, ताकि सीबीएसई में कार्यरत अथवा स्थानांतरित होने वाले शिक्षकों को किसी प्रकार की उलझन न रहे। साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत निर्धारित 30:1 छात्र-शिक्षक अनुपात को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में भी समान रूप से लागू किया जाए।
3. प्राथमिक विद्यालयों में सीएचटी (CHT) के पद किसी भी स्थिति में समाप्त न किए जाएं। सीबीएसई बनाए जा रहे स्कूलों के प्राथमिक अनुभाग में पहले से ही सीएचटी के पद चल रहे हैं। इन पदों को यथावत बनाए रखा जाए तथा प्राथमिक अनुभाग का प्रशासनिक नियंत्रण व संचालन सीएचटी को सौपा जाए।
4. सीबीएसई से संबद्ध जवाहर नवोदय विद्यालय एवं केंद्रीय विद्यालय संगठन की तर्ज पर राज्य के विद्यालयों में उप-प्रधानाचार्य के पद सृजित किए जाएं तथा उन्हें संयुक्त वरिष्ठता के आधार पर भरा जाए।
5. हिमाचल प्रदेश में अनेक सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक (बालक एवं बालिका) विद्यालयों को मर्ज करने के बजाय उन्हें को-एजुकेशन के रूप में संचालित किया जाए तथा दोनों में से एक विद्यालय को सीबीएसई एवं दूसरे को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड से संबद्ध किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी पसंद के बोर्ड का चयन करने का विकल्प मिल सके।
- अध्यापकों का अलग से सीबीएसई कैडर किसी भी स्थिति में न बनाया जाए, क्योंकि इससे वर्षों से चली आ रही सेवा संरचना, वरिष्ठता व्यवस्था एवं शैक्षणिक समन्वय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
2. माननीय शिक्षा सचिव द्वारा दिनांक 19 जनवरी को जारी अधिसूचना के कॉलम संख्या 5.6.2 का कड़ा विरोध दर्ज किया गया। इस प्रावधान में यह कहा गया है कि यदि कोई शिक्षक अपना मूल कैडर छोड़कर सीबीएसई विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करता है तो उसके पूर्व के सभी अधिकार समाप्त माने जाएंगे।
संयुक्त मोर्चे ने मांग की कि 19 जनवरी की अधिसूचना को संशोधित कर एक स्पष्ट एवं भ्रम-रहित अधिसूचना जारी की जाए, जिसमें भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा नियमों को स्पष्ट किया जाए, ताकि सीबीएसई में कार्यरत अथवा स्थानांतरित होने वाले शिक्षकों को किसी प्रकार की उलझन न रहे। साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत निर्धारित 30:1 छात्र-शिक्षक अनुपात को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में भी समान रूप से लागू किया जाए।
3. प्राथमिक विद्यालयों में सीएचटी (CHT) के पद किसी भी स्थिति में समाप्त न किए जाएं। सीबीएसई बनाए जा रहे स्कूलों के प्राथमिक अनुभाग में पहले से ही सीएचटी के पद चल रहे हैं। इन पदों को यथावत बनाए रखा जाए तथा प्राथमिक अनुभाग का प्रशासनिक नियंत्रण व संचालन सीएचटी को सौपा जाए।
4. सीबीएसई से संबद्ध जवाहर नवोदय विद्यालय एवं केंद्रीय विद्यालय संगठन की तर्ज पर राज्य के विद्यालयों में उप-प्रधानाचार्य के पद सृजित किए जाएं तथा उन्हें संयुक्त वरिष्ठता के आधार पर भरा जाए।
5. हिमाचल प्रदेश में अनेक सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक (बालक एवं बालिका) विद्यालयों को मर्ज करने के बजाय उन्हें को-एजुकेशन के रूप में संचालित किया जाए तथा दोनों में से एक विद्यालय को सीबीएसई एवं दूसरे को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड से संबद्ध किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी पसंद के बोर्ड का चयन करने का विकल्प मिल सके।
मुख्य प्रेस सचिव जयराम शर्मा ने आगे बताया कि माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई से जुड़े शिक्षकों के सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई व्यवस्था को शिक्षक एवं छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए ही लागू किया जाएगा तथा किसी भी स्थिति में शिक्षकों की पदोन्नति एवं वरिष्ठता को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
शिक्षक हितों को ध्यान में रखते हुए 19 जनवरी की अधिसूचना में आवश्यक संशोधन करने का भी आश्वासन दिया गया। इसके साथ ही जिन जिला मुख्यालयों एवं उप-मंडलों में बालक एवं बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, वहां उन्हें को-एजुकेशन संस्थान बनाकर एक विद्यालय को सीबीएसई तथा दूसरे को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड से जोड़ने का भी आश्वासन दिया गया, ताकि विद्यार्थी अपनी पसंद के अनुसार शिक्षा ग्रहण कर सकें।
शिक्षक हितों को ध्यान में रखते हुए 19 जनवरी की अधिसूचना में आवश्यक संशोधन करने का भी आश्वासन दिया गया। इसके साथ ही जिन जिला मुख्यालयों एवं उप-मंडलों में बालक एवं बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, वहां उन्हें को-एजुकेशन संस्थान बनाकर एक विद्यालय को सीबीएसई तथा दूसरे को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड से जोड़ने का भी आश्वासन दिया गया, ताकि विद्यार्थी अपनी पसंद के अनुसार शिक्षा ग्रहण कर सकें।
