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हिमाचल: पेंशनरों ने बजट में अनदेखी पर खोला मोर्चा, शिमला में 30 को विशाल प्रदर्शन; 18 संगठन होंगे शामिल

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 23 Mar 2026 11:59 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 30 मार्च को हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति का विशाल धरना प्रदर्शन होगा। पेंशनरों का कहना है कि इसमें पेंशनरों की लंबित देनदारियों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। 

Himachal Pensioners Launch Protest Over Budget Neglect Massive Demonstration in Shimla on the 30th
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पेंशनरों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से पेश बजट को दिशाहीन, विकासहीन और पेंशनर्स विरोधी करार दिया है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि बजट में 4000 करोड़ रुपये की कटौती सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का प्रमाण है।

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पेंशनरों का कहना है कि इसमें पेंशनरों की लंबित देनदारियों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। बजट में लंबित देनदारियों का कोई प्रावधान न होने के चलते पेंशनरों ने फैसला किया है कि इसके खिलाफ 30 मार्च को शिमला में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। पेंशनर नेताओं ने कहा कि इस प्रदर्शन में पेंशनरों के 18 संगठन शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और छुट्टी नगदीकरण जैसे वित्तीय लाभ नहीं दिए जा रहे हैं, जबकि जनवरी 2022 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को छठे वेतनमान के लाभ नहीं मिल रहे हैं। 

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उन्होंने कहा कि बजट में 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता, 44 महीने के बकाया एरियर और लंबित मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए भी कोई प्रावधान नहीं किया गया है। केवल क्लास-4 कर्मचारियों के बकाया का जिक्र किया गया है, लेकिन उसकी अदायगी कब होगी, यह स्पष्ट नहीं है। समिति का कहना है कि 5 मार्च को सुंदरनगर में पेंशनरों की राज्य कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। इसमें पेंशनरों ने तय किया था कि सरकार यदि बजट में लंबित देनदारियों की घोषण नहीं करती तो पेंशनर 30 मार्च को शिमला में राज्य स्तरीय धरना-प्रदर्शन करेगी। इसके लिए प्रदेशभर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

पेंशनरों ने सरकार से मांग की है कि लंबित वित्तीय लाभों का भुगतान, महंगाई भत्ते की किश्तें, एरियर और मेडिकल बिलों के लिए विशेष बजट का प्रावधान किया जाए। हिमाचल पथ परिवहन के पेंशनरों को 70 साल की उम्र पूरी करने वालों को एरियर, मंहगाई भते की 3% की किश्त और संशोधित बेतनमान का 50,000 रुपये की पहली किश्त की अदायगी तुरंत की जाए। वहीं बिजली बोर्ड में ओपीएस बहाल की जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पेंशनरों की मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 

सरकार वेतन कटौती के फैसले पर पुनर्विचार करे : प्रवक्ता संघ
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के राज्य अध्यक्ष अजय नेगी ने कहा कि ग्रुप-बी कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन का तीन प्रतिशत हिस्सा स्थगित करने के निर्णय पर सरकार को तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रुप-बी श्रेणी प्रदेश के उस मध्यवर्गीय कर्मचारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह वर्ग न तो उच्च आय वर्ग में आता है और न ही इसे किसी विशेष वित्तीय सुरक्षा का लाभ मिलता है। अधिकांश कर्मचारी हाउस लोन, वाहन लोन, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा खर्च और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों के आर्थिक दबाव में पहले से ही जूझ रहे हैं। ऐसे में वेतन का तीन प्रतिशत हिस्सा स्थगित करने का निर्णय उनके मासिक बजट को सीधे प्रभावित करेगा और जीवनयापन पर प्रतिकूल असर डालेगा।

नेगी ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च में वृद्धि ने कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में कर्मचारियों से वेतन का एक हिस्सा भविष्य के लिए स्थगित करने की अपेक्षा करना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत। उन्होंने कहस कि यह निर्णय कर्मचारी हितों के अनुरूप नहीं है। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। 

कर्मचारी वेतन कटौती पर आंदोलन की चेतावनी
प्रदेश सरकार के बजट में ए और बी श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन में तीन प्रतिशत कटौती के फैसले के दूसरे ही दिन कर्मचारी विरोध में उतर आए हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने निर्णय पर कड़ा एतराज जताया है।

विवि के शिक्षक कल्याण संघ हपुटा ने सरकार के फैसले को कर्मचारी विरोधी और असंवेदनशील करार देते हुए विरोध किया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार यह फैसला वापस नहीं लेती है तो विश्वविद्यालय के 1000 से अधिक कर्मचारी आंदोलन पर उतरेंगे।संघ के महासचिव डॉ. नितिन व्यास ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच वेतन में कटौती का निर्णय कर्मचारियों पर दोहरी मार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर राहत देने में विफल रही है, वहीं दूसरी ओर वेतन में कटौती कर कर्मचारियों को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही है।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है, बल्कि उनके मनोबल को भी कमजोर करता है। संघ ने लंबित 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता जारी न करने पर भी सरकार को घेरा और इसे कर्मचारियों का अधिकार बताया। इसके अलावा 2016 यूजीसी वेतनमान के एरियर का मुद्दा भी अब तक लंबित है, जबकि अन्य राज्यों में इसका भुगतान किया जा चुका है। ऐसे में हिमाचल के शिक्षकों के साथ भेदभाव के आरोप भी सामने आ रहे हैं।

संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने वेतन कटौती का फैसला वापस नहीं लिया और लंबित वित्तीय देनदारियों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो विरोध और तेज किया जाएगा। हपुटा ने संकेत दिए कि यह आंदोलन केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे कर्मचारी वर्ग का साझा आंदोलन बन सकता है। आने वाले समय में कर्मचारी संगठनों के एकजुट होने की संभावना भी जताई गई है।
 
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