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हिमाचल: नतीजों के बाद अब जिला परिषदों पर कब्जे की जंग, जोड़तोड़ में जुटी भाजपा-कांग्रेस

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 03 Jun 2026 06:00 AM IST
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सार

प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव परिणाम आने के बाद अब जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

Himachal: Post Results, Battle for Control over zila parishad Begins; BJP and Congress Engaged in Political Ma
भाजपा-कांग्रेस। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव परिणाम आने के बाद अब जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जिला परिषदों के अध्यक्ष के लिए जारी रोस्टर के तहत विभिन्न श्रेणियों में आरक्षण तय होने के बाद भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने समर्थित सदस्यों को अध्यक्ष बनाने के लिए जोड़तोड़ में जुट गए हैं। कई जिलों में निर्दलीय सदस्य भी जीतकर आए हैं। ऐसे में बैठकों और संपर्क अभियान का दौर लगातार जारी है।

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जिला परिषद अध्यक्ष पदों में इस बार छह सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं, जबकि चार अनारक्षित वर्ग के लिए तय हुई हैं। इसके अलावा दो सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगी। रोस्टर जारी होने के बाद अब जिलों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। रोस्टर के अनुसार जिला शिमला, कुल्लू, ऊना और बिलासपुर में जिला परिषद अध्यक्ष पद अनारक्षित वर्ग के लिए रहेगा। इन जिलों में दोनों प्रमुख दल अपने समर्थित जिला परिषद सदस्यों को एकजुट करने में लगे हैं।

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वहीं चंबा और हमीरपुर में अध्यक्ष पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा। कांगड़ा जिला परिषद अध्यक्ष पद महिला पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है, जिसके चलते यहां महिला नेतृत्व को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। जनजातीय जिल किन्नौर और लाहौल-स्पीति में अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा। मंडी जिला परिषद अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए तय किया गया है, जबकि सिरमौर और सोलन में यह पद अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा। कई जिलों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, जिसके चलते निर्दलीय सदस्य निर्णायक भूमिका में आ गए हैं। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन को लेकर बंद कमरों में बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है।

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