हिमाचल: पदोन्नत प्रधानाचार्यों ने पद ग्रहण नहीं किया तो रद्द होंगे आदेश, शिक्षा विभाग ने की सख्ती
प्रदेश शिक्षा विभाग में जिन प्रधानाचार्यों ने पदोन्नति के बाद निर्धारित समय में नई तैनाती पर पदभार ग्रहण नहीं किया, उनके पदोन्नति आदेश रद्द कर दिए जाएंगे।
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हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में जिन प्रधानाचार्यों ने पदोन्नति के बाद निर्धारित समय में नई तैनाती पर पदभार ग्रहण नहीं किया, उनके पदोन्नति आदेश रद्द कर दिए जाएंगे। ऐसे मामलों में अन्य पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का अवसर दिया जाएगा। विभाग ने पदोन्नत प्रधानाचार्यों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में विभाग ने 771 प्रधानाचार्यों को पदोन्नत कर विभिन्न स्कूलों में स्थानांतरित किया है। इसके बाद बड़ी संख्या में पदोन्नत अधिकारियों की ओर से एडजस्टमेंट के लिए मेडिकल आधार का सहारा लेने के मामले सामने आए हैं। इसी प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए विभाग ने यह सख्ती बरती है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कई पदोन्नत प्रधानाचार्य दूरदराज या कठिन क्षेत्रों में तैनाती से बचने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर रहे हैं। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए ऐसे मामलों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि अनावश्यक मेडिकल आधार पर एडजस्टमेंट की मांग से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है और स्कूलों में पद खाली रह जाते हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है। जो भी प्रधानाचार्य पदोन्नति के बाद नई जगह पर ज्वाइन नहीं करेगा, उसकी पदोन्नति निरस्त कर दी जाएगी और उसकी जगह दूसरे पात्र शिक्षक को मौका दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने सभी जिला उप निदेशकों को निर्देश जारी किए हैं कि पदोन्नत प्रधानाचार्यों की ज्वाइनिंग पर नजर रखी जाए और रिपोर्ट समय-समय पर मुख्यालय भेजी जाए। साथ ही, फर्जी या संदिग्ध मेडिकल प्रमाणपत्रों की जांच कर उचित कार्रवाई करने के भी आदेश दिए गए हैं।
स्पीकिंग ऑर्डर के आधार पर जारी हों लंबित पड़े वित्तीय लाभ : कोहली
स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने सभी उपनिदेशकों और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्यों को आदेश दिए हैं कि स्पीकिंग ऑर्डर के आधार पर लंबित पड़े वित्तीय लाभों को निर्धारित समय में जारी किया जाए। निदेशक ने कहा कि कई मामलों में स्पीकिंग आर्डर जारी होने के बावजूद डीडीओ की ओर से समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे विभाग को न केवल असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि अनावश्यक न्यायिक मामलों में भी उलझना पड़ रहा है। कई बार अदालत द्वारा कास्ट भी लगाई जा रही है। निदेशक ने कहा कि यदि भविष्य में किसी मामले में उच्च न्यायालय की ओर से प्रतिकूल आदेश पारित होता है, तो संबंधित डीडीओ, उपनिदेशक और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को इसके लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा। लागत की वसूली भी उन्हीं से की जाएगी। सभी संबंधित उप निदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां-जहां स्पीकिंग ऑर्डर जारी हो चुके हैं, वहां दो दिनों के भीतर चार्ज्ड हेड में बजट की मांग भेजना सुनिश्चित करें, ताकि भुगतान प्रक्रिया में देरी न हो।