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Study Leave Rules : स्टडी लीव पर कर्मचारियों को मिलेगा पूरा वेतन, हिमाचल प्रदेश सरकार ने बदले नियम
Thu, 30 Jul 2026 11:39 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 30 Jul 2026 11:39 AM IST
सार
Himachal Study Leave Rules 2026 : हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्टडी लीव से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था लागू की है। संशोधित नियमों के अनुसार अध्ययन अवकाश के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन, महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता मिलेगा। यदि कर्मचारी को छात्रवृत्ति या स्टाइपेंड मिलता है तो उसका समायोजन लीव सैलरी में किया जाएगा। संशोधन को 7 अगस्त 2024 से प्रभावी माना जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्रीय सिविल सेवा (लीव) नियम, 1972 में संशोधन किया है। इस संशोधन के माध्यम से स्टडी लीव (अध्ययन अवकाश) से संबंधित प्रावधानों को बदला गया है, जिससे कर्मचारियों को उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए अवकाश लेने पर अधिक स्पष्ट लाभ मिल सकेगा। वित्त (विनियम) विभाग द्वारा 29 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, ये संशोधित नियम 7 अगस्त 2024 से प्रभावी होंगे।
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भारत के बाहर और भीतर अध्ययन अवकाश पर समान लाभ
संशोधित नियमों के अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी भारत के बाहर अध्ययन अवकाश पर जाता है, तो उसे अवकाश पर जाने से ठीक पहले प्राप्त होने वाले वेतन के बराबर लीव सैलरी मिलेगी। इसके साथ ही, उसे महंगाई भत्ता (डीए) और मकान किराया भत्ता (एचआरए) का भी लाभ दिया जाएगा। इसी प्रकार, भारत के भीतर अध्ययन अवकाश लेने वाले कर्मचारियों को भी अवकाश से पहले प्राप्त वेतन के बराबर लीव सैलरी के साथ-साथ नियमानुसार डीए और एचआरए का लाभ मिलेगा।
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छात्रवृत्ति और पारिश्रमिक के समायोजन का प्रावधान
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूर्ण वेतन दर से लीव सैलरी प्राप्त करने के लिए कर्मचारी को यह प्रमाणित करना होगा कि अध्ययन अवकाश के दौरान उसे किसी भी प्रकार की छात्रवृत्ति, स्टाइपेंड या अंशकालिक रोजगार के बदले कोई पारिश्रमिक प्राप्त नहीं हो रहा है। यदि अध्ययन अवकाश के दौरान कर्मचारी को इनमें से कोई भी राशि प्राप्त होती है, तो वह देय लीव सैलरी में समायोजित की जाएगी। हालांकि, इस समायोजन के बाद भी कर्मचारी की लीव सैलरी आधे वेतन वाले अवकाश (हाफ-पे लीव) से कम नहीं होगी।
नियमों के सरलीकरण का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य अध्ययन अवकाश संबंधी नियमों को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है। इससे कर्मचारियों को अपनी उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए अवकाश लेने में आसानी होगी और उन्हें स्पष्ट वित्तीय लाभ सुनिश्चित हो सकेगा। यह कदम कर्मचारियों के व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है।
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूर्ण वेतन दर से लीव सैलरी प्राप्त करने के लिए कर्मचारी को यह प्रमाणित करना होगा कि अध्ययन अवकाश के दौरान उसे किसी भी प्रकार की छात्रवृत्ति, स्टाइपेंड या अंशकालिक रोजगार के बदले कोई पारिश्रमिक प्राप्त नहीं हो रहा है। यदि अध्ययन अवकाश के दौरान कर्मचारी को इनमें से कोई भी राशि प्राप्त होती है, तो वह देय लीव सैलरी में समायोजित की जाएगी। हालांकि, इस समायोजन के बाद भी कर्मचारी की लीव सैलरी आधे वेतन वाले अवकाश (हाफ-पे लीव) से कम नहीं होगी।
नियमों के सरलीकरण का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य अध्ययन अवकाश संबंधी नियमों को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है। इससे कर्मचारियों को अपनी उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए अवकाश लेने में आसानी होगी और उन्हें स्पष्ट वित्तीय लाभ सुनिश्चित हो सकेगा। यह कदम कर्मचारियों के व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है।