हिमाचल विधानसभा बजट सत्र: स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों, उपकरणों की खरीद पर पक्ष-विपक्ष में नोकझोंक
वीरवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक हुई।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि अगले छह माह में हिमाचल प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को डॉक्टर उपलब्ध करवाए जाएंगे। जरूरत के अनुसार पदों का युक्तिकरण भी होगा। वीरवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आईजीएमसी और टांडा को छोड़कर सभी मेडिकल कॉलेज नाम के रह गए हैं।
इनके पास फैकल्टी नहीं हैं। सरकार पीजी सीटों को डबल कर रही है। अगले छह महीनों में मेडिकल कॉलेजों को भी मजबूत करेंगे। एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के नियम सरल कर रहे हैं। किसी मेडिकल कॉलेज को बंद नहीं किया जाएगा। एक साथ 400 डॉक्टरों की भर्ती पहली बार एकसाथ की जा रही है। सहायक प्रोफेसरों के भी 100 पद भरेंगे। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल को विपक्ष से घिरता देखकर जवाब देने के लिए मुख्यमंत्री खुद खड़े हो गए।
मेडिकल कॉलेजों-अस्पतालों समेत एम्स चमियाना शिमला में एमबीबीएस डॉक्टरों के 81 और एमडी, एमएस एवं डीएनबी संकाय सदस्यों के 2060 पद मंजूर हैं। मेडिकल कॉलेजों में हर वर्ष 870 एमबीबीएस और 247 पीजी प्रशिक्षु पास ऑउट हो रहे हैं। पासऑउट होने के बाद इनमें से कुछ एमबीबीएस डॉक्टर एमडी, एमएस, डीएनबी और डिप्लोमा करते हैं और कुछ केंद्रीय व प्रदेश के संस्थानों एवं निजी क्षेत्र में नियुक्त होते हैं। सरकार ने 13 नवंबर 2025 को राज्य लोक सेवा आयोग को चिकित्सकों के 232 पद भरने के बारे में मांग पत्र भेजा था। जहां तक बेरोजगार चिकित्सकों की संख्या का प्रश्न है, इस बारे में कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 3000 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरणों ए क्लास कंपनियों से खरीद रही है। जवाब दिया कि दुनिया की ए क्लास कंपनियों से खरीद की जा रही है। मशीनें पारदर्शिता के साथ खरीदी गई हैं। प्रश्नकाल में विधायक केवल सिंह पठानिया ने टांडा मेडिकल कॉलेज में मशीनरी के लिए स्वीकृत राशि और उसमें से विभिन्न मशीनों पर किए गए खर्च का ब्योरा मांगा। पठानिया ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे आम आदमी ने पहले सोचा भी नहीं था। वहीं, विधायक विपिन सिंह परमार ने अनुपूरक प्रश्न में पूछा कि रोबोटिक सर्जरी शुरू होने के बाद अब तक कितने ऑपरेशन हुए, इस पर कितना खर्च आया, क्या यह आयुष्मान और हिमकेयर योजना के तहत कवर है, मशीनें किस कंपनी की हैं और क्या खरीद में टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। सुक्खू ने जवाब में कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक दीपराज ने आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने का मामला उठाया। सीएम सुक्खू ने कहा कि इस बारे में जल्दी सूचना एकत्र कर सदन में रखी जाएगी। इस पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने अनुपूरक प्रश्न करते हुए पलटवार किया कि सूचना नहीं देने से कब तक बचोगे। कहां-कहां बचोगे। आउटसोर्स पर लगे 15 हजार कर्मचारियों को निकाल दिया गया। जो बचे हैं, उन्हें तनख्वाह छह-छह महीनों के बाद भी नहीं दी जा रही है।
क्या समय पर वेतन देना सुनिश्चित करेंगे। वादा नौकरियां देने का किया गया था। आउटसोर्स पर नौकरियां देने वाली सारी एजेंसियां कांग्रेस नेताओं के नाम पर हैं। क्या आउटसोर्स पर नियुक्त करने से पहले पैसा लिया जा रहा है। ऐसी जानकारी क्या मुख्यमंत्री को है। इस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जवाब दिया कि अगर समय पर भुगतान नहीं करने की जानकारी है तो बता दें। इस पर कार्रवाई करेंगे। अगर कहीं पैसे लिए जा रहे हैं तो उसकी भी सूचना दें। वरना सूचना सही नहीं हुई तो उनके खिलाफ विशेषाधिकार का मामला बनेगा। सरकार हर कार्रवाई को तैयार है।
अनुपूरक बजट में हिमकेयर, सहारा योजना, चिकित्सा निकासी योजनाओं के लिए भी बजट रखा गया है। शिमला, टांडा, हमीरपुर, नेरचौक और एम्स चम्याणा में रोबोटिक सर्जरी, टांडा, हमीरपुर और एम्स चम्याणा में उन्नत परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना, हमीरपुर और टांडा के लिए पैट स्कैन की खरीद आदि के लिए 657.22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
अन्य विभागों को : शहरी विकास 520.38 90.00, ग्रामीण विकास 563.59 2.27, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता 147.56 109.50, सिंचाई एवं जलापूर्ति 489.52 475.19, उद्योग विभाग 131.32 16.22, विद्युत विकास 1154.50 3042.75, सड़क एवं परिवहन 250.72 96.89 करोड़।
पेश किए 40,461.95 करोड़ के अनुपूरक बजट में 36,374.61 करोड़ राज्य स्कीमों और 4087.34 करोड़ केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों के लिए रखे गए हैं। राज्य की स्कीमों में मुख्य रूप से 26,194.95 करोड़ रुपये वेज एंड मींस और ओवरड्राफ्ट के लिए प्रावधान किया गया। 4150.14 करोड़ रुपये का प्रावधान उपदान और बिजली को उदय योजना के तहत उपलब्ध करवाए गए ऋण को इक्विटी में बदलने, क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मरों की मरम्मत, 818.20 करोड़ प्राकृतिक आपदा राहत, 785.22 करोड़ जलापूर्ति एवं मल निकासी योजनाओं के लिए है। केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों के तहत अधिकतर राशि का चालू और नई विकास योजनाओं के लिए प्रावधान किया गया है। 2,453.97 करोड़ एनडीआरएफ से प्राप्त आपदा प्रबंधन, 688.40 करोड़ का प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, 352.18 करोड़ रेणुकाजी बांध विस्थापितों को मुआवजा देने का प्रावधान भी किया गया है।