HP Economic Survey: प्रति व्यक्ति आय में 9.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी, बेरोजगारी राष्ट्रीय औसत से अधिक
सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को विधानसभा में हिमाचल प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-20 को विधानसभा पटल पर रखा।
विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को विधानसभा में हिमाचल प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-20 को विधानसभा पटल पर रखा यह सर्वेक्षण अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से तैयार किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण राज्य की आर्थिक स्थिति का वास्तविक एवं साक्ष्य आधारित मुल्यांकन प्रस्तुत करता है जिसने राजकोषीय दबाव, जलवायु संवेदनशीलता तथा बदलती विकास प्राथमिकताओं की संदर्भ में प्रगति एवं उभरती चुनौतियों को रेखांकित किया गया है। यह सर्वेशन क्षेत्रीय प्रवृत्तियों, नीतिगत प्रयासों तथा सतत एवं समावेशी विकास के लिए आगे की दिशा का संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
प्रति व्यक्ति आय में 25,430 की बढ़ोतरी
अग्रिम अनुमानों के प्रचलित भावों पर प्रति व्यक्ति आय(पीसीआई) 2024-25 में 2,58,196 के मुकाबले वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2,83,626 अनुमानित है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस तरह प्रति व्यक्ति आय में करीब 25,430 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य की प्रति व्यक्ति आय भारत की आय से अधिक रही है। राज्य के प्रति व्यक्ति आय में 2011-12 में 87,721 से 2025-26 में 2,83,626 की तेजी से वृद्धि हुई है, जो 2011-12 की तुलना में 8.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज करती है। वर्ष 2011-12 में भारत की पीसीआई 63,462 थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,19,575 हो गई है। यह 2011-12 की तुलना में 10.0 प्रतिशत की सीएजीआर दर्ज करती है। वहीं युवा बेरोजगारी (15-29 वर्ष) 16.3 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 10.2 प्रतिशत से काफी अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य की 8.3 प्रतिशत वास्तविक वृद्धि दर भारत की 7.4 प्रतिशत वृद्धि दर से अधिक रही, जो राज्य के अपेक्षाकृत बेहतर आर्थिक प्रदर्शन को दर्शाती है।
सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2,53,886 करोड़ अनुमानित
अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रचलित भावों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद(जीएसडीपी) 2,53,886 करोड़ होने का अनुमान है, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह 2,30,587 करोड़ था जोकि वर्ष 2025-26 में 10.1 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर प्रदर्शित करता है। वहीं वितीय वर्ष 2025-26 के लिए स्थिर (2011-12) भावों या वास्तविक राज्य सकल घरेलू उत्पाद 1,56,681 करोड़ अनुमानित है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 1,44,656 करोड़ था और यह वित्त वर्ष 2024-25 के 6.4 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2025-26 के लिए 8.3 प्रतिशत वृद्धि दर प्रदर्शित करता है। वहीं सितंबर से आगे, सभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक खंडों में मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। शहरी मुद्रास्फीति में तीव्र नरमी आई और यह अक्तूबर से नवंबर के दौरान लगभग शून्य स्तर के निकट पहुंच गई, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक - संयुक्त में निरंतर गिरावट दर्ज की गई और यह दिसंबर तक घटकर लगभग 1 प्रतिशत रह गई।
प्राथमिक क्षेत्र के 8.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना
अर्थव्यवस्था को तीन व्यापक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जाता है। प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र की विकास दर को मूल भावों पर जीएसवीए के संदर्भ में मापा जाता है। मूल कीमत को निर्माता की कीमत के रूप में समझा जा सकता है। प्राथमिक क्षेत्र में फसल, पशुधन, वानिकी और लॉगिंग, मतस्य पालन, खनन और उत्खनन शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार वित वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र से सकल मूल्य वर्धित (जीएसवीए) में स्थिर भावों पर 8.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्राथमिक क्षेत्र का जीएसवीए स्थिर भावों पर 2024-25 में 17,362 करोड़ के मुकाबले 18,824 करोड़ हो गया। स्थिर भावों पर जीएसवीए में प्राथमिक क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में क्रमशः 1.9 प्रतिशत, 3.1 प्रतिशत और 8.4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की। यह उल्लेखनीय है कि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले प्राथमिक क्षेत्र राज्य की 53.98 प्रतिशत जनसंख्या को रोजगार देते हैं। इसलिए, हिमाचल में जीवन स्तर में सुधार के लिए इसकी आर्थिक सफलता महत्वपूर्ण है। वित्त वर्ष 2025-26 के अनुसार फसल क्षेत्र का जीएसवीए वास्तविक रूप से 11.9 प्रतिशत के विस्तार के साथ वित्त वर्ष 2024-25 में 7,516 करोड़ के मुकाबले 8,413 करोड़ रहने का अनुमान है। वास्तविक रूप से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वानिकी और लॉगिंग क्षेत्र का जीएसवीए 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ वित्त वर्ष 2024-25 में 5,764 करोड़ की तुलना में 6,018 करोड़ रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2025-26 (अ.अ.) में पशुधन क्षेत्र में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि, मत्स्य क्षेत्र में 7.0 प्रतिशत की वृद्धि और खनन और उत्खनन क्षेत्र में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
द्वितीयक क्षेत्र में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि की आशा
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए स्थिर (2011-12) भावों पर द्वितीयक क्षेत्र का जीएसवीए 66,324 करोड़ अनुमानित है जोकि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 61,561 करोड़ था। पिछले वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज होने की आशा है। इस क्षेत्र में विनिर्माण, बिजली, गैस, जल आपूर्ति, अन्य उपयोगी सेवाएं और निर्माण शामिल है। वर्ष 2025-26 के लिए स्थिर (2011-12) भावों पर विनिर्माण क्षेत्र में 5.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज होने की आशा है और 2024-25 में 40,250 करोड़ की तुलना में 2025-26 में 42,559 करोड़ होने का अनुमान है। वर्ष 2025-26 के लिए बिजली, गैस, जल आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाएं क्षेत्र ने 10.1 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर दर्ज की है। निर्माण क्षेत्र में 12.6 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज होने की आशा है और 2025-26 में 13,936 करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 12,380 करोड़ था।
सेवा क्षेत्र का सबसे अधिक योगदान
राज्य में सेवा क्षेत्र का जीएसवीए और रोजगार में सबसे अधिक योगदान है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सेवा क्षेत्र के लिए स्थिर (2011-12) भावों पर 62,581 करोड़ अनुमानित है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 57,643 करोड़ था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है। सेवा क्षेत्र में व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण से संबंधित सेवाएं, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और व्यावसायिक सेवाओं का स्वामित्व; लोक प्रशासन और अन्य सेवाएं शामिल हैं। सेवा क्षेत्र के सभी प्रमुख उप क्षेत्रों ने प्रदेश में 2025-26 में तीव्र वृद्धि दर को दर्शाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट क्षेत्र के जीएसवीए में 18.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी प्रकार, परिवहन, भंडारण, संचार तथा प्रसारण से संबंधित सेवाओं में 5.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि रियल एस्टेट, आवास स्वामित्व तथा पेशेवर सेवाओं में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
राज्य की समस्याएं और चुनौतियां: चार वर्षों में आपदाओं के कारण 46,000 करोड़ का नुकसान
राज्य ने चार वर्षों में आपदाओं के कारण 46,000 करोड़ का नुकसान उठाया, जोकि सकल राज्य घरेलू उत्पाद का लगभग 4 प्रतिशत वार्षिक है। जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि और बागवानी पर असर पड़ा है। सेब उद्योग पर बर्फबारी और ठंडे घंटे कम होने का प्रभाव पड़ा, कृषि मुख्यतः वर्षा निर्भर है और मौसम में बदलाव के प्रति संवेदनशील है। बार-बार होने वाली बादल फटने की घटनाएं, भूस्खलन और अचानक बाढ़ से महत्वपूर्ण सड़कों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे पर्यटन और बागवानी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर पड़ता है। सीमित राजस्व स्रोतों और केंद्रीय सहायता जैसे आरडीजी में कमी के कारण पूंजीगत व्यय घट रहा है। युवा बेरोजगारी (15-29 वर्ष) 16.3 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 10.2 प्रतिशत से काफी अधिक है। प्राथमिक क्षेत्र का हिस्सा 13.7 प्रतिशत तक घट गया, जबकि सेवा और उद्योग अब सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 86.3 प्रतिशत बनाते हैं। बागवानी के सकल मूल्य वर्धित में सेब का हिस्सा 76 प्रतिशत और फलों के क्षेत्र का लगभग 50 प्रतिशत है, जो उच्च सघनता को दर्शाता है।
कृषि-बागवानी
राज्य की अर्थव्यवस्था में प्राथमिक क्षेत्र के योगदान में वर्षों से निरंतर वृद्धि हुई है। वर्तमान कीमतों पर सकल बिक्री मूल्य (जीएसवीए) में कृषि और संबद्ध क्षेत्र का योगदान वित्त वर्ष 2021-22 में 22,428 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 32,415 करोड़ हो गया है। वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच वर्तमान कीमतों पर फसलों के सकल बिक्री मूल्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2021-22 में 13,722 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 18,515 करोड़ हो गया है। इसी अवधि में वर्तमान कीमतों पर सकल बिक्री मूल्य में फसल क्षेत्र का योगदान 35 प्रतिशत बढ़ा है। हिमाचल प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण फल फसल सेब है, जो कुल फल फसलों के क्षेत्रफल का लगभग 49.01 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2024-25 में कुल फल उत्पादन का लगभग 77.58 प्रतिशत है। सेब के अंतर्गत क्षेत्रफल 1950-51 में 400 हेक्टेयर से बढ़कर 1960-61 में 3,025 हेक्टेयर और वित्त वर्ष 2024-25 में 1,16,338 हेक्टेयर हो गया है। वित्त वर्ष 2007-08 और वित्त वर्ष 2024-25 के बीच सेब के अंतर्गत क्षेत्रफल में 21.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले कुछ वर्षों में सेब के उत्पादन में आए उतार-चढ़ाव ने सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात में सभी आयु वर्गों में यह स्पष्ट है कि वर्ष 2025-26 (दिसबंर, 2025 को समाप्त तिमाही) में हिमाचल प्रदेश का डब्ल्यूपीआर (50.4) उत्तराखंड (36.8), पंजाब, (37.8), हरियाणा (36.1) तथा भारत (402) की तुलना में बेहतर है। सर्वेक्षण के परिणामों से यह भी स्पष्ट होता है कि हिमाचल में अधिक महिलाएं (41.3 प्रतिशत) आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं, जो अखिल भारतीय स्तर तथा पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक है।