HP Assembly Session: सुक्खू बोले- छह महीने में सभी पीएचसी को देंगे डॉक्टर, जरूरत के अनुसार होगा युक्तिकरण
सीएम बोले कि कई बार राजनीतिक लोग डॉक्टरों का स्थानांतरण कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार पदों का युक्तिकरण भी होगा।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि अगले छह महीनों में हिमाचल प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को डॉक्टर उपलब्ध करवाए जाएंगे। छह महीने में हर पीएचसी में डॉक्टरों की नियुक्तियां होंगी। सीएम बोले कि कई बार राजनीतिक लोग डॉक्टरों का स्थानांतरण कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार पदों का युक्तिकरण भी होगा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सभी मेडिकल कॉलेज आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज को छोड़कर नाम के रह गए हैं। इनके पास फेकल्टी नहीं है। सरकार पीजी सीटों को डबल कर रही है। उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों में मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करेंगे। एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के नियुक्ति के नियमों को सरल कर रहे हैं। किसी भी मेडिकल कॉलेज को बंद नहीं किया जाएगा।
400 डॉक्टरों की भर्ती पहली बार एक साथ होगी: सीएम
फेकल्टी को मजबूत करेंगे और नई नियुक्तियां करेंगे। एक साथ 400 डॉक्टरों की भर्ती पहली बार एक साथ की जा रही है। 236 चिकित्सकों के इंटरव्यू हो रहे हैं। सहायक प्रोफेसरों के पद भी भरेंगे। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल को विपक्ष से घिरता देखकर जवाब देने के लिए मुख्यमंत्री खुद खड़े हो गए। गुरुवार को सदन में भाजपा विधायक राकेश जम्वाल ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री की ओर से जो जवाब दिया गया है, उसके अनुसार सरकार के पास बेरोजगार डॉक्टरों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, जबकि सरकार का कहना है कि रोजगार की ओर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी बेरोजगार डॉक्टरों का आंकड़ा नहीं होने पर सवाल खड़ा किया। इससे पूर्व स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि सरकार चिकित्सकों के पर भरने का पूरा प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के तहत चिकित्सकों के 2337 पद स्वीकृत हैं और विशेषज्ञ चिकित्सकों के 683 पद मंजूर हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार 3000 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरणों ए क्लास कंपनियों से खरीद रही है। प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि दुनिया की ए क्लास कंपनियों से खरीद की जा रही है। मशीनें टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ खरीदी गई हैं। एम्स दिल्ली के लिए खरीदी गई मशीनों की तुलना में लगभग एक करोड़ रुपये कम कीमत पर उपलब्ध कराई गई हैं। प्रश्नकाल में विधायक केवल सिंह पठानिया ने टांडा मेडिकल कॉलेज में मशीनरी के लिए स्वीकृत राशि और उसमें से विभिन्न मशीनों पर किए गए खर्च का ब्योरा मांगा।
पठानिया ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे आम आदमी ने पहले सोचा भी नहीं था। वहीं, विधायक विपिन सिंह परमार ने अनुपूरक प्रश्न में पूछा कि रोबोटिक सर्जरी शुरू होने के बाद अब तक कितने ऑपरेशन हुए, इस पर कितना खर्च आया, क्या यह आयुष्मान और हिमकेयर योजना के तहत कवर है, मशीनें किस कंपनी की हैं और क्या खरीद में टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जवाब में कहा कि प्रदेश सरकार मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि कॉलेजों में कई चुनौतियां हैं, लेकिन सुधार की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और लगभग 3000 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरण खरीदे जा रहे हैं।
अनुराधा राणा ने उठाया किसानों से धोखाधड़ी का मुद्दा
किसानों के साथ हो रही कथित धोखाधड़ी के मामलों को कांग्रेस विधायक अनुराधा राणा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में किसानों के साथ धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। जिन मामलों में एफआईआर दर्ज होती है, उन्हीं में कार्रवाई होती है, जबकि अन्य मामलों में अपेक्षित कदम नहीं उठाए जाते हैं। निजी कंपनियों और किसानों के बीच होने वाले अनुबंधों में कई बार किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है, ऐसे में सरकार को हस्तक्षेप कर किसानों के हितों की रक्षा करनी चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जवाब देते हुए कहा कि ऐसे कई मामले होते हैं, जहां किसान और कंपनियां आपसी समझौते से अनुबंध करते हैं, इसलिए उनमें सीधे तौर पर सरकार की भूमिका सीमित हो जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां-जहां ठगी के मामले सामने आते हैं और एफआईआर दर्ज होती है, वहां कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है। धोखाधड़ी के मामलों में सरकार गंभीरता से कार्रवाई करेगी।