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Shimla: सरकार ने विजिलेंस को सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे से किया बाहर, अधिसूचना जारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 12 Mar 2026 07:07 PM IST
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सार

 सरकार ने राज्य सतर्कता व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो(विजिलेंस) को सूचना का अधिकार(आरटीआई) अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है। 

hp govt has excluded Vigilance from the purview of the Right to Information Act.
हिमाचल सरकार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने  राज्य सतर्कता व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर कर दिया है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता की ओर से गुरुवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार ने आरटीआई एक्ट की धारा 24(4) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह कदम उठाया है। इस फैसले के बाद अब विजिलेंस ब्यूरो से सूचना नहीं मांग सकेंगे। राज्य सरकार ने जांच की गोपनीयता, सुरक्षा और खुफिया तंत्र की संवेदनशीलता एवं प्रशासनिक कार्यकुशलता के आधार पर विजिलेंस ब्यूरो को आरटीआई के दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया है। बताया गया है कि अधिनियम की धारा 24 के तहत केंद्र और राज्य सरकारों को सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को इस कानून से छूट देने का अधिकार है। केंद्र स्तर पर सीबीआई, आईबी, रॉ, ईडी और एनएसजी जैसी 20 से अधिक एजेंसियां इस दायरे से बाहर हैं।

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हालांकि, कई राज्यों में विजिलेंस ब्यूरो को पूरी तरह आरटीआई के दायरे से बाहर करने पर विवाद रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की जांच से जुड़ा विभाग होता है। आरटीआई एक्ट 2005 के तहत आवेदन पर 30 दिन में सूचना देना अनिवार्य है। यदि अधिकारी तय समय में सूचना नहीं देते या गलत जानकारी देते हैं, तो उन पर 250 रुपये प्रतिदिन (अधिकतम 25,000 रुपये) का जुर्माना लगाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

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तमिलनाडु, यूपी और हरियाणा में भी जांच एजेंसियां दायरे से बाहर पड़ोसी राज्य हरियाणा, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में भी खुफिया या विशेष जांच एजेंसियों को आरटीआई के दायरे से बाहर रखा गया है। एजेंसियों को आरटीआई से बाहर रखने के पीछे तर्क दिया जाता है कि जांच में कोई आरोपी आरटीआई से विभाग की केस फाइल या नोटिंग तक पहुंच बना ले तो सबूतों को मिटा सकता है और जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

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