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हिमाचल: सांसद सुरेश कश्यप ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग पर्यावरण नीति की जरूरत को लेकर लोकसभा में उठाया मुद्दा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 16 Mar 2026 01:09 PM IST
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सार

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग पर्यावरण नीति बनाए जाने की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया। पढ़ें पूरी खबर...

MP Suresh Kashyap Raises Issue in Lok Sabha Regarding Need Separate Environmental Policy for Hill States
भाजपा लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

भाजपा लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पहाड़ी राज्यों के लिए अलग पर्यावरण नीति बनाए जाने की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री से यह जानना चाहा कि हिमाचल प्रदेश सहित अन्य पहाड़ी राज्यों में तेजी से बढ़ते पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों, आधारभूत ढांचे के विस्तार, अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियों तथा बढ़ते वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा क्या विशेष कदम उठाए जा रहे हैं और क्या पहाड़ी राज्यों के लिए अलग और व्यावहारिक पर्यावरण नीति बनाने पर विचार किया जा रहा है।

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सांसद सुरेश कश्यप के प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र न केवल पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जीवन समर्थन प्रणाली प्रदान करता है बल्कि देश के मैदानी क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी के लिए जल, जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हिमालय से उत्पन्न नदियां और पारिस्थितिक तंत्र देश के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन का आधार हैं।

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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (GBPNIHE) द्वारा भारतीय हिमालयी क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में पर्यावरणीय स्थितियों का निरंतर अध्ययन किया जा रहा है। इस संस्थान द्वारा वायु गुणवत्ता, जल गुणवत्ता, ध्वनि स्तर और पारिस्थितिक तंत्र पर मानव गतिविधियों के प्रभाव का आकलन किया जाता है ताकि नीतिगत स्तर पर आवश्यक सुधार किए जा सकें।

उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण नीतिगत और नियामक उपाय लागू किए गए हैं। इनमें पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया, वन संरक्षण से जुड़े नियम, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अनुमति प्रक्रिया तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विकास गतिविधियों के लिए निर्धारित मानक शामिल हैं। इन प्रावधानों के तहत किसी भी विकास परियोजना को तभी अनुमति दी जाती है जब वह पर्यावरणीय मानकों और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर उपयुक्त पाई जाती है। मंत्री ने बताया कि निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन, धूल नियंत्रण, अपशिष्ट निपटान तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, ताकि पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सके।

इसके अलावा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत देश के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए व्यापक कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं, जिनमें भारतीय हिमालयी क्षेत्र के शहर भी शामिल हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों की सहभागिता से प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा सतत और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रणनीतियां तैयार की गई हैं, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों का विकास पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया जा सके। इसके तहत ढलानों के संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, मृदा अपरदन रोकने, अपशिष्ट प्रबंधन और पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अध्ययन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सतत विकास को ध्यान में रखते हुए विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययन और नीति संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए हैं, ताकि हिमालयी क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक रणनीति विकसित की जा सके। सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां, पारिस्थितिक संवेदनशीलता और प्राकृतिक संसाधनों की सीमाएं मैदानी राज्यों से भिन्न होती हैं, इसलिए इन क्षेत्रों के लिए विशेष नीति और दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमालयी क्षेत्रों के सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सांसद सुरेश कश्यप ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में पहाड़ी राज्यों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए और भी प्रभावी नीतियां लागू की जाएंगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों के विकास और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
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