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HP High Court: हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा- कट-ऑफ डेट के बाद ओबीसी प्रमाणपत्र जमा करवाने पर उम्मीदवार अयोग्य नहीं
भारती मेहता, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Tue, 13 Jan 2026 04:00 AM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार जो ओबीसी श्रेणी से संबंध रखता है, केवल आवेदन की कट ऑफ डेट तक वैध प्रमाणपत्र जमा न कर पाने के आधार पर उसे सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। पढ़ें पूरी खबर...
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आवेदन की अंतिम तिथि तक वैध प्रमाणपत्र जमा न कर पाने पर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार जो ओबीसी श्रेणी से संबंध रखता है, केवल आवेदन की कट ऑफ डेट तक वैध प्रमाणपत्र जमा न कर पाने के आधार पर उसे सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि जाति प्रमाणपत्र केवल उस तथ्य की पुष्टि करता है जो जन्म से अस्तित्व में है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा है कि कोई व्यक्ति अपनी जाति जन्म से प्राप्त करता है, न कि प्रमाणपत्र जारी होने की तिथि से। प्रमाणपत्र केवल उस स्थिति का एक प्रमाण है।
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अदालत ने कहा कि श्रेणी जन्म से निर्धारित होती है। आरक्षण का उद्देश्य समाज के पिछड़े वर्गों को समान अवसर प्रदान करना है। तकनीकी आधार पर (जैसे प्रमाणपत्र देरी से मिलना) इसे रोकना संवैधानिक भावना के खिलाफ है।चूंकि विभाग ने उम्मीदवार को लिखित परीक्षा में बैठने दिया और दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया, इसका अर्थ है कि उसे शुरू से ओबीसी उम्मीदवार माना गया था।
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अदालत ने एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने के कारण उस अंतिम चयनित उम्मीदवार को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा जो पिछले दो वर्षों से काम कर रहा है। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के पद पर 2023 से नियुक्ति दें जब से उसके अन्य साथियों को दी गई है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को पिछला वेतन तो नहीं मिलेगा, लेकिन उसकी वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ नियुक्ति की पिछली तिथि से ही गिने जाएंगे।
अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी ने सितंबर 2022 में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के 723 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। याचिकाकर्ता ने ओबीसी श्रेणी के तहत आवेदन किया और लिखित परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली। मेरिट सूची में स्थान पाने के बावजूद दस्तावेज सत्यापन के दौरान विभाग ने उन्हें नियुक्ति देने से मना कर दिया। कारण बताया गया कि आवेदन के समय जमा किया गया ओबीसी प्रमाणपत्र वैध अवधि से बाहर था और नया प्रमाणपत्र कट-ऑफ तिथि के बाद का था।
अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी ने सितंबर 2022 में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के 723 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। याचिकाकर्ता ने ओबीसी श्रेणी के तहत आवेदन किया और लिखित परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली। मेरिट सूची में स्थान पाने के बावजूद दस्तावेज सत्यापन के दौरान विभाग ने उन्हें नियुक्ति देने से मना कर दिया। कारण बताया गया कि आवेदन के समय जमा किया गया ओबीसी प्रमाणपत्र वैध अवधि से बाहर था और नया प्रमाणपत्र कट-ऑफ तिथि के बाद का था।
कंपनी को अगले आदेशों तक भुगतान नहीं करने के आदेश
उच्च न्यायालय ने एनएच निर्माण कंपनी और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए सूर्या कंपनी को न्यायालय के अगले आदेशों तक किसी भी प्रकार की पेमेंट न करने के आदेश जारी किए हैं। विभागीय अधिकारियों की ओर से जवाब न देने के लिए हिमाचल सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 30 मार्च को तय हुई है, उससे पहले जवाब दायर करने के निर्देश जारी किए हैं।
निर्माणाधीन राष्ट्रीय उच्च मार्ग 03 हमीरपुर से मंडी वाया सरकाघाट-धर्मपुर-कोटली का मामला हिमाचल उच्च न्यायालय में चल रहा है। हिमाचल किसान सभा धर्मपुर एवं सरकाघाट ने पांच साल से बन रहे इस उच्च मार्ग में बरती जा रही लापरवाही और घटिया किस्म के कार्य को लेकर उच्च न्यायालय में पीआईएल दायर की है। इसकी तीसरी सुनवाई सोमवार को हुई। लेकिन मुख्य निर्माण कंपनी गावर, सूर्या और बीआरएन ने अभी तक न्यायालय में अपना जवाब नहीं दिया है।
इस उच्च मार्ग के निर्माण का ठेका गावर कंपनी को दिया है और उसने आगे कार्य सूर्या को सबलेट किया है। कंपनी के प्रतिनिधि उच्च न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं, जिस कारण न्यायालय ने उनकी पेमेंट रोकने के आदेश जारी कर सरकार को जवाब दायर करने के लिए कहा है। शिकायतकर्ता पूर्व जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह, रणताज राणा, दिनेश काकू, पूर्ण चंद पराशर, अमृत लाल, बीडी शर्मा, सरवन सिंह ने कहा कि निर्माण कंपनियां धीमी गति से कार्य कर रही हैं।
उच्च न्यायालय ने एनएच निर्माण कंपनी और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए सूर्या कंपनी को न्यायालय के अगले आदेशों तक किसी भी प्रकार की पेमेंट न करने के आदेश जारी किए हैं। विभागीय अधिकारियों की ओर से जवाब न देने के लिए हिमाचल सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 30 मार्च को तय हुई है, उससे पहले जवाब दायर करने के निर्देश जारी किए हैं।
निर्माणाधीन राष्ट्रीय उच्च मार्ग 03 हमीरपुर से मंडी वाया सरकाघाट-धर्मपुर-कोटली का मामला हिमाचल उच्च न्यायालय में चल रहा है। हिमाचल किसान सभा धर्मपुर एवं सरकाघाट ने पांच साल से बन रहे इस उच्च मार्ग में बरती जा रही लापरवाही और घटिया किस्म के कार्य को लेकर उच्च न्यायालय में पीआईएल दायर की है। इसकी तीसरी सुनवाई सोमवार को हुई। लेकिन मुख्य निर्माण कंपनी गावर, सूर्या और बीआरएन ने अभी तक न्यायालय में अपना जवाब नहीं दिया है।
इस उच्च मार्ग के निर्माण का ठेका गावर कंपनी को दिया है और उसने आगे कार्य सूर्या को सबलेट किया है। कंपनी के प्रतिनिधि उच्च न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं, जिस कारण न्यायालय ने उनकी पेमेंट रोकने के आदेश जारी कर सरकार को जवाब दायर करने के लिए कहा है। शिकायतकर्ता पूर्व जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह, रणताज राणा, दिनेश काकू, पूर्ण चंद पराशर, अमृत लाल, बीडी शर्मा, सरवन सिंह ने कहा कि निर्माण कंपनियां धीमी गति से कार्य कर रही हैं।