Shimla: बायोमेट्रिक हाजिरी पर शिक्षा निदेशालय की भाषा से कॉलेज शिक्षक नाराज, शिक्षा निदेशक को भेजा पत्र
राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ ने निदेशक उच्च शिक्षा को पत्र भेजकर कहा है कि आदेश में इस्तेमाल की गई कुछ टिप्पणियां समूचे शिक्षक समुदाय की निष्ठा, ईमानदारी और पेशेवर प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, जो न केवल अनुचित बल्कि शिक्षकों के मनोबल को प्रभावित करने वाली हैं।
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उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से मंगलवार को जारी बायोमेट्रिक उपस्थिति संबंधी पत्र में प्रयोग की गई भाषा को लेकर हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ ने एतराज जताया है। संघ ने निदेशक उच्च शिक्षा को पत्र भेजकर कहा है कि आदेश में इस्तेमाल की गई कुछ टिप्पणियां समूचे शिक्षक समुदाय की निष्ठा, ईमानदारी और पेशेवर प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, जो न केवल अनुचित बल्कि शिक्षकों के मनोबल को प्रभावित करने वाली हैं। संघ के महासचिव डॉ. संजय कांगो ने कहा कि राज्य में मार्च 2026 से शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए जियोफेंस आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। उनकी यूनियन पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत अनुशासन की हमेशा समर्थक रही है। संघ का विरोध बायोमेट्रिक व्यवस्था से नहीं, बल्कि उस भाषा से है जिसके माध्यम से शिक्षकों के कार्य और प्रतिबद्धता को लेकर सामान्यीकृत टिप्पणियां की गई हैं।
उनका कहना है कि राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षक केवल कक्षाओं में अध्यापन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षाओं के संचालन, शोध गतिविधियों, एनएएसी प्रत्यायन, छात्र मार्गदर्शन, एनएसएस, एनसीसी, रोवर्स एंड रेंजर्स, युवा महोत्सव, खेल गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, करियर काउंसिलिंग, निर्वाचन कार्य, आपदा प्रबंधन तथा अन्य प्रशासनिक दायित्वों का भी निर्वहन करते हैं। संघ का कहना है कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में कॉलेज शिक्षकों की भूमिका बहुआयामी रही है। ऐसे में किसी एक प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में ऐसी भाषा का प्रयोग करना, जिससे यह संदेश जाए कि शिक्षक अपने दायित्वों के प्रति गंभीर नहीं हैं, उचित नहीं माना जा सकता। संघ ने कहा कि वर्षों से शिक्षक सीमित संसाधनों में भी उच्च शिक्षा संस्थानों को बेहतर बनाने में योगदान देते आए हैं और इस योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
व्यक्तिगत मामलों के आधार पर पूरे समुदाय को कठघरे में न खड़ा करें
संघ के उपाध्यक्ष डॉ. निखिल सारटा ने कहा कि यदि कहीं किसी स्तर पर अनियमितता या कर्तव्य निर्वहन में कमी के मामले सामने आते हैं तो विभाग के पास नियमानुसार कार्रवाई करने के पर्याप्त अधिकार हैं। लेकिन कुछ मामलों के आधार पर पूरे शिक्षक समुदाय की कार्यशैली और प्रतिबद्धता पर सवाल उठाना न तो न्यायसंगत है और न ही रचनात्मक। शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए विभाग और शिक्षक समुदाय के बीच परस्पर विश्वास, सम्मान और संवाद की आवश्यकता है। प्रशासनिक आदेशों और पत्राचार की भाषा ऐसी होनी चाहिए जो सहयोग और सहभागिता को बढ़ावा दे, न कि अविश्वास का वातावरण तैयार करे।