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Shimla News: एचपीयू और एसजेवीएन एआई से सौर ऊर्जा पर करेंगे शोध
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सोलर प्लांटों में आने वाली संभावित तकनीकी समस्याओं का पहले लग जाएगा पता, स्मार्ट सोलर सिस्टम और नवाचार पर रहेगा फोकस
4.15 करोड़ की परियोजना से होगा शोध का कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अत्याधुनिक शोध को गति देने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू हुआ है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से सोलर पीवी सिस्टम को अधिक कुशल, विश्वसनीय और स्मार्ट बनाने पर फोकस किया जाएगा।
इसके साथ ही एक ऐसा प्रेडिक्टिव डायग्नोस्टिक्स फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा जो सोलर प्लांट्स में संभावित तकनीकी समस्याओं का पहले ही संकेत दे सके। यह पहल एचपीयू और सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड के बीच हुए 4.15 करोड़ रुपये के समझौते के तहत आगे बढ़ रही है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य सोलर पैनलों की कार्यक्षमता में सुधार, ऊर्जा उत्पादन में आने वाली गिरावट के कारणों की पहचान और संभावित खराबियों का पहले से पूर्वानुमान लगाना है। इसके लिए मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। शोध के दौरान बड़े पैमाने पर डेटा एकत्र कर उसका विश्लेषण किया जाएगा जिससे सोलर सिस्टम के प्रदर्शन का सटीक आकलन संभव हो सके। इस परियोजना में फ्लोटिंग सोलर पीवी और एग्रो-पीवी जैसे उभरते मॉडल्स पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शोधकर्ता यह समझने का प्रयास करेंगे कि विभिन्न भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों में सोलर सिस्टम किस प्रकार व्यवहार करते हैं और उन्हें किस तरह अनुकूलित किया जा सकता है।
ग्रीन एनर्जी रिसर्च एक उभरता केंद्र : कुलपति
कुलपति महावीर सिंह के अनुसार यह शोध न केवल ऊर्जा उत्पादन को अधिक कुशल बनाएगा बल्कि रखरखाव की लागत को कम करने और सोलर परियोजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा। यह प्रदेश को ग्रीन एनर्जी रिसर्च के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी अहम कदम है। यह परियोजना उद्योग और अकादमिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है, जो भविष्य में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
एचपीयू ने शुरू की भर्ती
इस परियोजना के तहत अब शोध कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जूनियर रिसर्च फेलो के दो पदों पर भर्ती भी शुरू की गई है। चयनित अभ्यर्थियों को सीधे इस उन्नत शोध में शामिल किया जाएगा जहां उन्हें सोलर पीवी सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिलेगा। जेआरएफ के लिए इंजीनियरिंग या विज्ञान के संबंधित विषयों में उच्च योग्यता के साथ गेट और नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। चयनित उम्मीदवारों को 37,000 रुपये प्रतिमाह के साथ एचआरए दिया जाएगा। यह नियुक्ति परियोजना अवधि यानी तीन वर्ष तक रहेगी। आवेदन की अंतिम तिथि 9 अप्रैल तय की है, जबकि साक्षात्कार 10 अप्रैल को ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से होगी।
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4.15 करोड़ की परियोजना से होगा शोध का कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अत्याधुनिक शोध को गति देने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू हुआ है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से सोलर पीवी सिस्टम को अधिक कुशल, विश्वसनीय और स्मार्ट बनाने पर फोकस किया जाएगा।
इसके साथ ही एक ऐसा प्रेडिक्टिव डायग्नोस्टिक्स फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा जो सोलर प्लांट्स में संभावित तकनीकी समस्याओं का पहले ही संकेत दे सके। यह पहल एचपीयू और सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड के बीच हुए 4.15 करोड़ रुपये के समझौते के तहत आगे बढ़ रही है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य सोलर पैनलों की कार्यक्षमता में सुधार, ऊर्जा उत्पादन में आने वाली गिरावट के कारणों की पहचान और संभावित खराबियों का पहले से पूर्वानुमान लगाना है। इसके लिए मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। शोध के दौरान बड़े पैमाने पर डेटा एकत्र कर उसका विश्लेषण किया जाएगा जिससे सोलर सिस्टम के प्रदर्शन का सटीक आकलन संभव हो सके। इस परियोजना में फ्लोटिंग सोलर पीवी और एग्रो-पीवी जैसे उभरते मॉडल्स पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शोधकर्ता यह समझने का प्रयास करेंगे कि विभिन्न भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों में सोलर सिस्टम किस प्रकार व्यवहार करते हैं और उन्हें किस तरह अनुकूलित किया जा सकता है।
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ग्रीन एनर्जी रिसर्च एक उभरता केंद्र : कुलपति
कुलपति महावीर सिंह के अनुसार यह शोध न केवल ऊर्जा उत्पादन को अधिक कुशल बनाएगा बल्कि रखरखाव की लागत को कम करने और सोलर परियोजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा। यह प्रदेश को ग्रीन एनर्जी रिसर्च के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी अहम कदम है। यह परियोजना उद्योग और अकादमिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है, जो भविष्य में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
एचपीयू ने शुरू की भर्ती
इस परियोजना के तहत अब शोध कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जूनियर रिसर्च फेलो के दो पदों पर भर्ती भी शुरू की गई है। चयनित अभ्यर्थियों को सीधे इस उन्नत शोध में शामिल किया जाएगा जहां उन्हें सोलर पीवी सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिलेगा। जेआरएफ के लिए इंजीनियरिंग या विज्ञान के संबंधित विषयों में उच्च योग्यता के साथ गेट और नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। चयनित उम्मीदवारों को 37,000 रुपये प्रतिमाह के साथ एचआरए दिया जाएगा। यह नियुक्ति परियोजना अवधि यानी तीन वर्ष तक रहेगी। आवेदन की अंतिम तिथि 9 अप्रैल तय की है, जबकि साक्षात्कार 10 अप्रैल को ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से होगी।