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Shimla News: आईजीएमसी में तीन ऑपरेशन थियेटर, सी-आर्म मशीन एक
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सी-आर्म मशीन की कमी से हड्डी रोगियों को हो रही परेशानी, ऑपरेशन के लिए करना पड़ता है इंतजार
विभाग ने दूसरी मशीन की खरीद के लिए लिखा है पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में सी-आर्म मशीन की कमी खल रही है। अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञों के पास तीन ऑपरेशन थियेटर हैं, लेकिन इनमें एक ही सी-आर्म मशीन से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में हड्डी रोग से जुड़े ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विभाग की ओर से अस्पताल प्रबंधन को कई बार दूसरी सी-आर्म मशीन खरीदने के लिए पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे मरीजों को सीधे तौर पर परेशानी झेलनी पड़ रही है। अस्पताल में रोजाना हड्डी रोग से जुड़े कई ऑपरेशन होते हैं। ऐसे में एक मशीन से काम करना चिकित्सकों के लिए भी मुश्किल हो रहा है। शरीर में किसी हड्डी के टूटने पर प्लेट, रॉड या स्क्रू सही जगह लगे हैं या नहीं, इन सभी चीजों को चिकित्सक ऑपरेशन के दौरान ही सी-आर्म मशीन की स्क्रीन पर देख लेते हैं। इसके अलावा रीढ़ की हड्डी के बेहद बारीक ऑपरेशनों में न्यूरोसर्जन नसों को नुकसान पहुंचाए बिना सटीक जगह पर काम करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं लेकिन अस्पताल में एक ही मशीन होने के कारण एक समय में केवल एक ही ऑपरेशन हो पाता है। कई बार ऑपरेशन लंबा चलने से मरीजों को अगले दिन दोबारा बुलाना पड़ रहा है या फिर उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। गौरतलब है कि आईजीएमसी प्रदेश का प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है। यहां हड्डी रोग विभाग के पास तीन ऑपरेशन थियेटर हैं। इनमें दो ऑपरेशन थियेटर नियमित रूप से चलते हैं। इसके अलावा एक अन्य ऑपरेशन थियेटर आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। तीनों ऑपरेशन थियेटरों के लिए एक ही सी-आर्म मशीन उपलब्ध है। यदि आपात स्थिति में कोई मरीज ऑपरेशन के लिए आ जाए और दूसरा ऑपरेशन पहले से चल रहा हो तो चिकित्सकों को काफी परेशानी होती है और ऑपरेशन शुरू करने में देरी हो जाती है।
सरकार मुहैया करवाए मशीन
ऑपरेशन इनसेट के बाहर बैठे मरीजों के तीमारदार रुक्मिणी, हरीश, मनीषा और सुरेंद्र पांटा ने बताया कि आईजीएमसी बड़ा अस्पताल है, लेकिन यहां मरीजों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन थियेटर में भी मशीनरी पूरी नहीं है। इस कारण मरीज को ऑपरेशन के लिए ले जाने के बाद भी चिकित्सकों को सी-आर्म मशीन का इंतजार करना पड़ रहा है, क्योंकि पहले से एक ऑपरेशन चल रहा था।
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विभाग ने दूसरी मशीन की खरीद के लिए लिखा है पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में सी-आर्म मशीन की कमी खल रही है। अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञों के पास तीन ऑपरेशन थियेटर हैं, लेकिन इनमें एक ही सी-आर्म मशीन से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में हड्डी रोग से जुड़े ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विभाग की ओर से अस्पताल प्रबंधन को कई बार दूसरी सी-आर्म मशीन खरीदने के लिए पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे मरीजों को सीधे तौर पर परेशानी झेलनी पड़ रही है। अस्पताल में रोजाना हड्डी रोग से जुड़े कई ऑपरेशन होते हैं। ऐसे में एक मशीन से काम करना चिकित्सकों के लिए भी मुश्किल हो रहा है। शरीर में किसी हड्डी के टूटने पर प्लेट, रॉड या स्क्रू सही जगह लगे हैं या नहीं, इन सभी चीजों को चिकित्सक ऑपरेशन के दौरान ही सी-आर्म मशीन की स्क्रीन पर देख लेते हैं। इसके अलावा रीढ़ की हड्डी के बेहद बारीक ऑपरेशनों में न्यूरोसर्जन नसों को नुकसान पहुंचाए बिना सटीक जगह पर काम करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं लेकिन अस्पताल में एक ही मशीन होने के कारण एक समय में केवल एक ही ऑपरेशन हो पाता है। कई बार ऑपरेशन लंबा चलने से मरीजों को अगले दिन दोबारा बुलाना पड़ रहा है या फिर उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। गौरतलब है कि आईजीएमसी प्रदेश का प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है। यहां हड्डी रोग विभाग के पास तीन ऑपरेशन थियेटर हैं। इनमें दो ऑपरेशन थियेटर नियमित रूप से चलते हैं। इसके अलावा एक अन्य ऑपरेशन थियेटर आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। तीनों ऑपरेशन थियेटरों के लिए एक ही सी-आर्म मशीन उपलब्ध है। यदि आपात स्थिति में कोई मरीज ऑपरेशन के लिए आ जाए और दूसरा ऑपरेशन पहले से चल रहा हो तो चिकित्सकों को काफी परेशानी होती है और ऑपरेशन शुरू करने में देरी हो जाती है।
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सरकार मुहैया करवाए मशीन
ऑपरेशन इनसेट के बाहर बैठे मरीजों के तीमारदार रुक्मिणी, हरीश, मनीषा और सुरेंद्र पांटा ने बताया कि आईजीएमसी बड़ा अस्पताल है, लेकिन यहां मरीजों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन थियेटर में भी मशीनरी पूरी नहीं है। इस कारण मरीज को ऑपरेशन के लिए ले जाने के बाद भी चिकित्सकों को सी-आर्म मशीन का इंतजार करना पड़ रहा है, क्योंकि पहले से एक ऑपरेशन चल रहा था।
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