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IGMC Study: महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले पित्ताशय की पथरी का खतरा दोगुना, स्पीति अध्ययन में बड़ा खुलासा

Mon, 06 Jul 2026 03:44 PM IST
Ankesh Dogra आदित्य सोफत, शिमला।
आदित्य सोफत, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 06 Jul 2026 03:44 PM IST
सार

आईजीएमसी शिमला के सर्जरी विभाग द्वारा स्पीति घाटी में किए गए अध्ययन में महिलाओं में पित्ताशय की पथरी का खतरा पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुना पाया गया है। शोध में 450 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। हार्मोनल बदलाव, बढ़ती उम्र और फैटी लीवर को प्रमुख जोखिम कारक माना गया है। विशेषज्ञों ने समय पर जांच और उपचार कराने की सलाह दी है।

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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

महिलाओं के शरीर की संरचना और हार्मोनल बदलाव से पित्ताशय की पथरी का जोखिम पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में दोगुना होता है। हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में अध्ययन के दौरान महिलाओं की जांच में यह खुलासा हुआ। 
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पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पित्ताशय की पथरी काफी अधिक पाई गई है। इसी के साथ फैटी लीवर, बढ़ती उम्र में भी गॉलस्टोन की संभावना कई गुना तक बढ़ जाती है। अगर समय पर जांच व उपचार न करवाया जाए तो कैंसर तक का खतरा बन सकता है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के सर्जरी विभाग ने यह अध्ययन किया है। इसमें पित्ताशय दुर्लभ बीमारियों का भी पता चला। शोधकर्ताओं ने 450 महिलाओं और पुरुषों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें 50 फीसदी से ज्यादा महिलाओं में पित्ताशय की पथरी पाई गई, यानी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में दोगुना जोखिम था। 

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इनका समायोजित ऑड्स रेशियो 2.04 था। बढ़ती उम्र एक निरंतर काम करने वाला कारक है। ऐसे में हर साल की बढ़ोतरी के साथ गॉलस्टोन बीमारी होने की संभावना चार फीसदी तक बढ़ जाती है। इसके अलावा गॉलब्लेडर पॉलिप्स (1.1%), गॉलब्लैडर की मोटी दीवार होना (1.3%), और गॉलब्लैडर के कैंसर का संदेह पैदा करने वाले संरचनात्मक लक्षण (0.9%) मिले हैं।

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ये हो सकते हैं कारण
विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में पाया जाने वाला एस्ट्रोजन हार्मोन पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा देता है। जब कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो वह जमने लगता है और पथरी का रूप ले लेता है। इसके अलावा प्रोजेस्टेरोन हार्मोन गॉल ब्लैडर की मांसपेशियों को ढीला कर देता है। इस कारण गॉल ब्लैडर पूरी तरह या सही समय पर सिकुड़ नहीं पाता। पित्त का बहाव धीमा हो जाता है, जिससे पथरी बनने का रास्ता साफ हो जाता है। बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से शरीर में इन हार्मोन का स्तर काफी बढ़ जाता है, जो पथरी के खतरे को दोगुना कर देता है।

पर्यावरणीय कारक भी एक बड़ी वजह
प्रदेश में अधिक ऊंचाई यानी 4,000 मीटर से अधिक में पित्ताशय की पथरी के कम पीड़ित मिले हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि स्पीति घाटी की कठिन परिस्थितियां वहां के समुदाय की जीवनशैली को बहुत हद तक प्रभावित करती हैं। घाटी में अत्यधिक सर्दियां पड़ती हैं, जहां तापमान -30 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है, जो लोगों को लंबे समय तक घरों के अंदर रहने के लिए मजबूर करता है। इससे पता लगा है कि पर्यावरणीय कारक जोखिम बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
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