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इंडियन टेक्नोमेक घोटाला : मास्टरमाइंड को भगोड़ा घोषित करने की तैयारी, ईडी की विशेष अदालत में दी गई अर्जी

विश्वास भारद्वाज, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 20 Feb 2026 06:00 AM IST
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सार

 बहुचर्चित 2,100 करोड़ रुपये के इंडियन टेक्नोमेक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई की दिशा विदेशों में जुटाई गई संपत्तियों की ओर मोड़ दी है।

Indian Technomac scam: Preparations underway to declare mastermind a fugitive, ED files application in special
ED - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 2,100 करोड़ रुपये के इंडियन टेक्नोमेक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई की दिशा विदेशों में जुटाई गई संपत्तियों की ओर मोड़ दी है। जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपी और कंपनी के प्रबंध निदेशक राकेश कुमार शर्मा को औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित करने के लिए विशेष अदालत (ईडी) में अर्जी दाखिल की है। अदालत से राकेश शर्मा को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने का आग्रह किया गया है। कानून के शिकंजे से बचने के लिए मास्टरमाइंड राकेश भारत छोड़कर यूएई में रह रहा है। ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और डमी कंपनियों का एक ऐसा जाल बुना, जिसने न केवल सरकारी खजाने को चूना लगाया, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में भी सेंध लगा दी। सिरमौर के पांवटा साहिब (माजरा) में रिफाइंड नोबल अलॉयज बनाने के नाम पर खड़ी की गई इस कंपनी ने 1,396 करोड़ रुपये का लोन फर्जी प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स और कागजी बिक्री दिखाकर हासिल किया था। जांच में यह एंगल भी सामने आया है कि इस पैसे को व्यापार में लगाने के बजाय शेल कंपनियों के माध्यम से ओडिशा में अवैध खनन गतिविधियों में डायवर्ट किया गया। हाल ही में ओडिशा में हुई छापेमारी और लग्जरी कारों की जब्ती ने इस सिंडिकेट के संगठित स्वरूप को उजागर किया है। अब तक हुई 289 करोड़ रुपये की वसूली के बाद ईडी की नजर अब राकेश शर्मा की उन संपत्तियों पर है, जो उसने कथित तौर पर विदेशी धरती पर बनाई हैं।

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फ्लैशबैक : अब तक क्या-क्या हुआ 
शुरुआत (2009-2014): पांवटा साहिब में इंडियन टेक्नोमेक कंपनी ने परिचालन शुरू किया और फर्जीवाड़े की नींव रखी। पर्दाफाश (2014): वैट चोरी और बैंक लोन डिफॉल्ट के बाद घोटाला सामने आया, एमडी राकेश शर्मा फरार हो गया। पहली बड़ी गिरफ्तारी (2018): हिमाचल सीआईडी ने कंपनी निदेशक विनय कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया। ईडी की एंट्री व कुर्की (2019-2023): मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू हुई और दिल्ली-हिमाचल में 310 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई। बैंकों को राहत (अप्रैल 2025): ईडी ने जब्त 289 करोड़ रुपये की संपत्ति बैंकों के समूह को लौटाई।

 

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भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित होने पर क्या?
अगर विशेष अदालत किसी आरोपी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दे तो प्रवर्तन निदेशालय के पास भारत और विदेश में संपत्तियों की सीधी जब्ती का आधार आ जाता है। इसमें वह संपत्तियां भी शामिल होती हैं, जो सीधे तौर पर अपराध की कमाई से जुड़ी नहीं है। इसके अलावा आरोपी किसी भी दीवानी मामले में अपना बचाव करने का अधिकार खो सकता है। भगोड़ा घोषित होने पर इंटरपोल के जरिये रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने और संबंधित देश जहां आरोपी छिपा है, वहां से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा पाएगी।

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