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बारिश का कहर: हिमाचल में 173 जिंदगियां गईं, 936 करोड़ से ज्यादा का नुकसान; 200 सड़कें और 39 पेयजल योजनाएं ठप

Thu, 13 Aug 2026 11:06 AM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 13 Aug 2026 11:06 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में मानसून 2026 लगातार भारी पड़ रहा है। अब तक आपदा और सड़क हादसों में 173 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 936.63 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान दर्ज हुआ है। 13 अगस्त सुबह तक प्रदेश में 200 सड़कें बंद, 45 बिजली ट्रांसफार्मर और 39 पेयजल योजनाएं प्रभावित रहीं। मंडी और कुल्लू में सड़क संपर्क सबसे ज्यादा प्रभावित है। पढ़ें पूरी खबर...

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l-monsoon rain 173 deaths 936 crore loss 200 roads closed
हिमाचल मानसून 2026 - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में मानसून इस बार सिर्फ पहाड़ों की परीक्षा नहीं ले रहा, बल्कि जनजीवन और सरकारी ढांचे पर भी भारी पड़ रहा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की 12 अगस्त तक की संचयी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान आपदा से 75 लोगों की मौत हुई है। वहीं सड़क हादसों में 98 लोगों की जान गई। इस तरह मानसून अवधि में आपदा और सड़क दुर्घटनाओं को मिलाकर 173 लोगों की मौत दर्ज की गई है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक मानसून सीजन में प्रदेश को 93,663.41 लाख रुपये यानी करीब 936.63 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें सार्वजनिक और निजी संपत्ति के साथ विभिन्न विभागों को हुआ नुकसान शामिल है।

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एक सुबह में 200 सड़कें बंद, 45 बिजली आपूर्ति केंद्र प्रभावित
बारिश का असर 13 अगस्त की सुबह भी कम नहीं हुआ। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 200 सड़कें बंद थीं। इसके अलावा 45 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर (DTR) बाधित रहे और 39 पेयजल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुईं। एक दिन पहले शाम के मुकाबले सड़क बंद होने की संख्या 209 से घटकर 200 हुई, लेकिन बिजली और पानी की स्थिति में अलग-अलग स्तर पर व्यवधान बना रहा।
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मंडी और कुल्लू में सड़कें सबसे ज्यादा प्रभावित
सड़क बंद होने के मामले में मंडी जिला सबसे आगे रहा। यहां 64 सड़कें बंद थीं। इसके बाद कुल्लू में 60, शिमला में 32 और चंबा में 24 सड़कें बंद रहीं। लाहौल-स्पीति में तीन, किन्नौर में दो और ऊना में चार सड़कें भी प्रभावित थीं। कुल्लू में बंजार उपमंडल की 19, कुल्लू की 23, आनी की आठ और निरमंड की 10 सड़कें बंद थीं। मंडी में सराज की 41 सड़कें प्रभावित रहीं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सीधा असर यातायात और ग्रामीण संपर्क पर पड़ रहा है।
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शिमला में 32 सड़कें बंद, 17 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित
राजधानी शिमला भी बारिश से अछूती नहीं है। 13 अगस्त सुबह तक जिले में 32 सड़कें बंद थीं। इनमें रामपुर क्षेत्र की 15, जुब्बल की 11, कोटखाई की दो और अन्य क्षेत्रों की सड़कें शामिल हैं। जिले में तीन डीटीआर बाधित रहे और 17 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुईं।

चंबा में 13 पेयजल योजनाएं प्रभावित
चंबा जिले में 24 सड़कें बंद रहीं। चंबा, भरमौर और अन्य उपमंडलों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। जिले की 13 पेयजल योजनाएं भी बाधित थीं। किन्नौर में रिस्पा लिंक रोड पानी का स्तर बढ़ने से बंद हुआ, जबकि चारंग जाने वाली लिंक रोड शंकुई नाला में फ्लैश फ्लड के कारण अवरुद्ध हुई।

आपदा में 75 मौतें, सड़क हादसों ने बढ़ाया आंकड़ा
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की जिला आधारित रिपोर्ट के अनुसार आपदा से सबसे ज्यादा मौतें लाहौल-स्पीति में 14, कांगड़ा में 12, कुल्लू में 9, चंबा में 9, मंडी में 6, सिरमौर में 7 और शिमला में 10 दर्ज की गईं। प्रदेश में आपदा से मौतों का कुल आंकड़ा 75 है। आपदा के अलावा सड़क दुर्घटनाओं ने भी बड़ा नुकसान किया। रिपोर्ट में सड़क हादसों से प्रदेश में 98 मौतें दर्ज हैं। कांगड़ा में 10, चंबा और सिरमौर में 16-16, कुल्लू में 13, शिमला में 11 और ऊना में छह मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुईं।

936 करोड़ का नुकसान: पहाड़ की अर्थव्यवस्था पर भी चोट
मानसून से हुआ कुल नुकसान केवल बंद सड़कों या बिजली-पानी की बाधाओं तक सीमित नहीं है। सरकारी संचयी रिपोर्ट में निजी और सार्वजनिक संपत्ति, कृषि-बागवानी, लोक निर्माण, जल शक्ति, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, मत्स्य पालन, ग्रामीण और शहरी विकास समेत कई क्षेत्रों में नुकसान दर्ज किया गया है। कुल नुकसान 93,663.41 लाख रुपये आंका गया है। यानी मानसून का असर पहाड़ों में दो स्तरों पर दिखाई दे रहा है-एक तरफ प्राकृतिक आपदाएं और सड़क हादसे जान ले रहे हैं, तो दूसरी तरफ लगातार बाधित हो रही सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सेवाएं सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर रही हैं।
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