नगर निकाय चुनाव: 1426 ने ठोकी ताल, अंतिम दिन हुए 721 नामांकन; जानें किस जिले में कितने नामांकन हुए दाखिल
हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय के लिए तीन दिनों तक चली नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शनिवार दोपहर 3 बजे समाप्त हो गई। आखिरी दिन सबसे अधिक 721 उम्मीदवारों ने दावेदारी पेश कर चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश के नगर निकाय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया शनिवार को पूरी हो गई। 29, 30 अप्रैल और 2 मई को कुल 1426 नामांकन पत्र दाखिल हुए। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार नामांकन के तीसरे और अंतिम दिन पूरे राज्य में कुल 721 नामांकन पत्र प्राप्त हुए। कांगड़ा जिला में सबसे अधिक 269 नामांकन पत्र दाखिल किए गए, जबकि हमीरपुर में सबसे कम 55 नामांकन हुए। अन्य प्रमुख जिलों में चंबा से 62 और बिलासपुर से 44 नामांकन पत्र प्रस्तुत किए गए।
नगर निकाय चुनावों में ईवीएम के जरिए वोट डाले जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया के अगले चरण में 4 मई को संबंधित रिटर्निंग और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा सुबह 10 बजे से नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 4 मई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे, जिसके तुरंत बाद उन्हें चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए जाएंगे। मतदान 17 मई को सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक होगा।
निर्देशों में कहा गया है कि चुनाव विभाग पहले से ही फील्ड कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। साथ ही विभाग का स्टाफ फोटोयुक्त मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और अन्य चुनाव संबंधी समयबद्ध कार्यों में व्यस्त है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भारत निर्वाचन आयोग के वर्ष 1994 और 2010 के आदेशों का हवाला देते हुए कहा है कि स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों से संबंधित वार्ड परिसीमन, मतदाता सूची तैयार करने और अन्य चुनावी कार्य भारत निर्वाचन आयोग के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को नहीं सौंपे जाएं।
कांगड़ा जिले में 269, मंडी में 214, शिमला में 167, सोलन में 158, ऊना में 137, कुल्लू में 125, चंबा में 113, बिलासपुर में 96, सिरमौर में 92, हमीरपुर जिले में 55 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए।
आशा कार्यकर्ता नहीं लड़ सकेंगी पंचायत चुनाव
हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं को पंचायत चुनाव में किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया है। विभाग की ओर से जारी स्पष्टीकरण के अनुसार हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122 (1) (जी) उन व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोकती है जो सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, पंचायत, सहकारी समिति या किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में कार्यरत हैं।
इस धारा के दायरे में पूर्णकालिक, अंशकालिक, दैनिक वेतनभोगी और अनुबंध के आधार पर काम करने वाले सभी कर्मचारी आते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को भेजे गए इस पत्र में विभाग ने स्पष्ट किया है कि चूंकि आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति अंशकालिक आधार पर होती है और उन्हें मासिक मानदेय के साथ-साथ प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि दी जाती है, इसलिए वे सरकारी सेवा के दायरे में आती हैं। इसी आधार पर, उन्हें पंचायत चुनाव में पदाधिकारी बनने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।
