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Green Industrial Policy: हिमाचल में लागू होगी नई ग्रीन औद्योगिक नीति, प्रारूप तैयार

अमर उजाला ब्यूरो/संवाद, शिमला/ऊना। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 10 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

राज्य में नई ग्रीन औद्योगिक नीति लागू करने जा रही है। उद्योग विभाग की ओर से इसका प्रारूप तैयार कर लिया है। 

New Green Industrial Policy to be implemented in Himachal; draft prepared.
उद्योग(सांकेतिक)। - फोटो : संवाद
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विस्तार

हिमाचल सरकार राज्य में नई ग्रीन औद्योगिक नीति लागू करने जा रही है। उद्योग विभाग की ओर से इसका प्रारूप तैयार कर लिया है और अब इसे अंतिम रूप देने के लिए विधि विभाग से कानूनी राय ली जाएगी। सरकार ने अगस्त तक नई औद्योगिक नीति का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह नीति आगामी पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी। ड्राफ्ट में पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति में हरित और पर्यावरण अनुकूल उद्योगों को प्राथमिकता दी जाने वाली है। इसके तहत ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है, जिनसे प्रदूषण कम हो और ऊर्जा की खपत भी सीमित रहे।

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विशेष प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव तैयार

उद्योग विभाग ने नीति में सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक उपकरण, डाटा सेंटर, फार्मा, खाद्य प्रसंस्करण, हर्बल और प्राकृतिक उत्पाद आधारित इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव तैयार किया है। नई नीति में उद्योगपतियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध करवाने का प्रावधान भी किया गया है। विभाग का मानना है कि बिजली दरों में राहत मिलने से प्रदेश में निवेश बढ़ेगा और नए उद्योग स्थापित करने के लिए उद्यमी आकर्षित होंगे। छोटे उद्योगों को मशीनरी, बिजली शुल्क और परिवहन पर राहत देने का प्रस्ताव नीति में शामिल किया गया है। नई ग्रीन औद्योगिक नीति में उद्योगपतियों की भी राय ली गई है।

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ग्रीन औद्योगिक नीति में उद्योगपतियों की भी राय ली गई

गौरतलब है कि प्रदेश की पिछली औद्योगिक नीति 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। अब उद्योग विभाग नई नीति को अंतिम रूप दिया गया है। विभाग जल्द इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्तुत करेगा। नई ग्रीन औद्योगिक नीति से औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी। पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल में पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी चुनौती है, इसलिए उद्योगों के विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच तालमेल बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नीति में जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी अनिवार्य शर्तों में शामिल किया गया है। नई नीति लागू होने के बाद प्रदेश में निवेश बढ़ने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि हिमाचल में नई औद्योगिक नीति लाई जा रही है, जिसमें उद्योगपतियों को राहत दी जाएगी। नई नीति में नए इन्वेस्टरों को भी फायदा मिलेगा।

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प्रदेश के 12 जिलों में करीब 3,926 बड़े और मध्य उद्योग उद्योग संचालित

बता दें कि वर्ष 2019 की उद्योग नीति में प्रदेश को ए, बी और सी श्रेणियों में बांटकर उद्योगों को विभिन्न रियायतें दी गई थीं। पिछड़े और जनजातीय क्षेत्रों वाली सी श्रेणी में उद्योग स्थापित करने पर एसजीएसटी में सबसे अधिक छूट और प्लॉट खरीद पर 50 प्रतिशत से अधिक रियायत का प्रावधान था। प्रदेश के 12 जिलों में करीब 3,926 बड़े और मध्य उद्योग उद्योग संचालित हैं। उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिला बिलासपुर में 183, चंबा में 139, हमीरपुर में 80, कांगड़ा में 864, कुल्लू में 60, किन्नौर में 43, लाहौल और स्पीति में 10, मंडी में 260, शिमला में 170, सिरमौर में 196, ऊना में 727, सोलन में 1,194 उद्योग स्थापित हैं।
 

नई उद्योग नीति का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। अभी इसमें करीब दो महीने का समय लग सकता है। नई उद्योग नीति तैयार होते ही उसे मंजूरी के सरकार को भेज दिया जाएगा। -डॉ. यूनुस, निदेशक उद्योग विभाग


 

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