असली से कम नहीं पंकज की खिलौना गाड़ियां, नौकरी गई तो घर में ही शुरू कर दिया काम
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पंकज बद्दी में नौकरी करता था। लॉकडाउन में घर आना पड़ा। घर बैठे-बैठे बोर हो रहे थे तो मन में विचार आया कि खिलौना गाड़ियां बनाई जाएं। सोचा और शुरू कर दिया नया काम। अभी तक कई गाड़ियां बना चुके हैं। देखने वाले दंग रह जाते हैं, क्योंकि ये खिलौना गाड़ियां असली वाहन से कम नहीं दिखतीं। हमीरपुर जिला की पंचायत ग्वारडू के गांव कुसवाड़ के पंकज कुमार के हाथों में ऐसी कला है कि कागज, लकड़ी के साथ बनाए गए वाहनों को देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता है कि यह असली हैं या नकली। पंकज ने अपने आंगन में ही मिनी बस अड्डा बनाकर एचआरटीसी की बसों को स्थान दिया है। उसने अपने हाथों से ट्राला, टैंकर, टिपर, ट्रैक्टर, घर, मंदिर भी बनाए हुए हैं।
पंकज आत्मनिर्भर भारत बनाने की कड़ी में एक संदेश देते हुए दूसरे युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बने बने हैं। पंकज की मानें तो उसे बचपन से ड्राइंग का काफी शौक रहा है और जब भी समय लगता था तो ड्राइंग पर हाथ आजमा लेता। पंकज ने बताया कि खिलौना गाड़ियों को बनाने में दो से तीन दिन लग जाते हैं और इनमें असली गाड़ियों की तरह आटोमैटिक लाइटें लगाई गईं तो खिड़की से लेकर दरवाजे भी हूबहू असली गाड़ियों की तरह लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि फेसबुक के माध्यम से इन गाड़ियों की मार्केटिंग की है। लोगों के गाड़ियां खरीदने के फोन भी आए हैं।

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