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President Shimla Visit: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऐतिहासिक भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान का किया दौरा

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 20 Apr 2023 07:30 PM IST
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सार

राष्ट्रपति ने भवन में बने वायसरॉय के कमरों को भी देखा, जहां वह रहा करते थे। इस दौरान उन्होंने इसकी गैलरी से बाहर निकल कर आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य को निहारा।

President Draupadi Murmu visits the historic Indian Institute of Higher Studies
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान का दौरा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार  को भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज) के ऐतिहासिक भवन का दौरा किया। वह करीब 40 मिनट संस्थान में रुकी रहीं। यहां पर उन्होंने अंदर रखे ऐतिहासिक वस्तुओं, फोटो गैलरी, आधुनिक सुविधाओं से लैस पुस्तकालय और निदेशक के कार्यालय का दौरा किया। राष्ट्रपति ने भवन में बने वायसरॉय के कमरों को भी देखा, जहां वह रहा करते थे। इस दौरान उन्होंने इसकी गैलरी से बाहर निकल कर आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य को निहारा।

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राष्ट्रपति के आने पर राज्यपाल शिव प्रताप सिंह, संस्थान अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार, उपाध्यक्ष शेलेंद्र राज मेहता, संस्थान के निदेशक प्रो. नागेश्वर रॉव सचिव सुब्रत कुमार प्रधान ने स्वागत किया। राष्ट्रपति ने परिसर में यहां के अध्येताओं, सह अध्येताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सामूहिक चित्र भी खिंचवाया। इसके बाद उन्होंने भवन के अंदर तीन फोटो गैलरी का अवलोकन किया। इस दौरान निदेशक और संस्थान के अधिकारियों ने उन्हें इस ऐतिहासिक भवन और इसमें संजोकर रखी ऐतिहासिक घटनाओं की फोटो और वस्तुओं की विस्तार से जानकारी दी। इसमें वह टेबल भी शामिल था, जिस पर बैठकर 25 जून 1945 को शिमला कांफ्रेंस हुई थी। यह भारत-पाक विभाजन को टालने का अंतिम प्रयास था।
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राष्ट्रपति ने आगंतुक बुक में लिखा - मैं संस्थान में आकर खुश हूं
 राष्ट्रपति ने संस्थान का दौरा पूरा करने के बाद आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और लिखा - भारत के अग्रणी शोध संस्थान, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, जो मानविकी, समाज शास्त्र और प्राकृतिक विज्ञानों जैसे विषयों पर उच्च गुणवत्तायुक्त अकादमिक शोध को बढ़ावा दे रहा है। मैं यहां आ कर बहुत प्रसन्न हूं। मेरे पूर्व समकक्ष व प्रसिद्ध विद्वान डॉ. राधाकृष्णन द्वारा स्थापित यह संस्थान, शोध और वैचारिक आदान-प्रदान के द्वारा रचनात्मक वैचारिक प्रवाह व उन्मुक्त शोध को प्रोत्साहित करता है। मैं सभी शोधार्थियों, अधिकारियों व कर्मचारियों को संस्थान के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देती हूं।

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