हिमाचल की जलवायु में बदलाव: पहाड़ों में बढ़ती गर्मी कृषि, बागवानी के लिए चुनौती; नौणी विवि की स्टडी में खुलासा
हिमाचल प्रदेश के मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि ठंड तेजी से घट रही है। जलवायु में बदलाव का असर कृषि फसलों व फलों के उत्पादन पर पड़ रहा है। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश में जलवायु में बदलाव का असर कृषि फसलों व फलों के उत्पादन पर पड़ रहा है। डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के 40 वर्षों यानी 1984–2023 के विस्तृत अध्ययन में सामने आया है कि राज्य के मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि ठंड तेजी से घट रही है। यह अध्ययन विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसके भारद्वाज की निगरानी में डॉ. प्रियंका जतन ने किया और डॉ. मोहन सिंह ने भी सहयोग किया।
अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में अधिकतम तापमान में करीब 2.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान में 0.55 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, हीट वेव हर वर्ष औसतन 1.11 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं, जो भविष्य के लिए गंभीर संकेत है। इसके विपरीत कोल्ड वेव हर साल लगभग 2.86 प्रतिशत कम हो रही हैं, जिससे पारंपरिक ठंड का पैटर्न बदल रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पिछले 40 वर्षों में राज्य में 669 हीट वेव, 161 गंभीर हीट वेव, 260 कोल्ड वेव और 37 गंभीर कोल्ड वेव दर्ज की गई हैं। यह आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं कि हिमाचल प्रदेश में मौसम में बदलाव साफ नजर आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती गर्मी का असर टमाटर और शिमला मिर्च जैसी संवेदनशील फसलों पर तो साफ दिखाई दे रहा है। अधिक हीट वेव के दौरान इन फसलों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सामान्य मौसम में उत्पादन बेहतर रहा।
तापमान में असंतुलन के कारण फसलों की वृद्धि प्रक्रिया और फूल-फल बनने की क्षमता प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि तापमान बढ़ने के साथ ही हीट इंडेक्स और वाष्पोत्सर्जन भी बढ़ रहा है, जिससे पानी की मांग में इजाफा हो रहा है। इसका सीधा असर सिंचाई व्यवस्था और जल संसाधनों पर पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव और अधिक गंभीर हो सकता है। इसके लिए समय रहते ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
तापमान में बढ़ोतरी से कृषि व बागवानी उपज पर भी इसका असर पड़ा है। यह चिंता का विषय है। फलों के उत्पादन की बेल्ट ऊपर की ओर सरकी है। विभाग बागवानों के लिए कई योजनाएं चला रहा है। -डॉ. संतीश शर्मा, बागवानी विभाग के निदेशक
- अध्ययन में समाधान सुझाया गया है कि जलवायु अनुकूल फसलों को बढ़ावा दिया जाए।
- सिंचाई प्रबंधन मजबूत किया जाए।
- अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू किया जाए। क्लाइमेट-स्मार्ट कृषि को अपनाया जाए।