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Shimla News: एचपीयू में एमएससी पर्यावरण विज्ञान प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल
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एसएफआई ने वीसी को सौंपा ज्ञापन, काउंसलिंग प्रक्रिया की समीक्षा, मेरिट आधारित प्रवेश की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। एसएफआई ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में एमएससी पर्यावरण विज्ञान की प्रवेश प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। एसएफआई ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा, विभागीय पुनर्गठन की जांच और मेरिट आधारित प्रवेश सुनिश्चित करने की मांग की है।
एसएफआई एचपीयू इकाई अध्यक्ष मुकेश ने आरोप लगाया कि सात जुलाई को जारी काउंसिलिंग सूचना में आवश्यक दस्तावेज की सूची नहीं थी। इससे कई अभ्यर्थी काउंसिलिंग के समय सभी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए। विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय दिए बिना ही प्रवेश सूची जारी कर दी गई। प्रवेश सूची जारी करने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि सूची विभागाध्यक्ष स्तर पर अंतिम रूप दी गई न कि विभाग परिषद या प्रवेश समिति की संस्तुति पर। एसएफआई ने भविष्य में सभी प्रवेश सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के तहत करने की मांग की है। ज्ञापन में पर्यावरण विज्ञान के दो विभागों के समानांतर संचालन को प्रशासनिक भ्रम का कारण बताया गया है। नियमित शिक्षकों की उपलब्धता के बावजूद अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति और कई नियमित शिक्षकों के शिक्षण कार्य से वंचित रहने का भी आरोप है। संगठन ने विभागीय पुनर्गठन और प्रशासनिक निर्णयों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। एसएफआई ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में एमएससी पर्यावरण विज्ञान की प्रवेश प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। एसएफआई ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा, विभागीय पुनर्गठन की जांच और मेरिट आधारित प्रवेश सुनिश्चित करने की मांग की है।
एसएफआई एचपीयू इकाई अध्यक्ष मुकेश ने आरोप लगाया कि सात जुलाई को जारी काउंसिलिंग सूचना में आवश्यक दस्तावेज की सूची नहीं थी। इससे कई अभ्यर्थी काउंसिलिंग के समय सभी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए। विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय दिए बिना ही प्रवेश सूची जारी कर दी गई। प्रवेश सूची जारी करने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि सूची विभागाध्यक्ष स्तर पर अंतिम रूप दी गई न कि विभाग परिषद या प्रवेश समिति की संस्तुति पर। एसएफआई ने भविष्य में सभी प्रवेश सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के तहत करने की मांग की है। ज्ञापन में पर्यावरण विज्ञान के दो विभागों के समानांतर संचालन को प्रशासनिक भ्रम का कारण बताया गया है। नियमित शिक्षकों की उपलब्धता के बावजूद अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति और कई नियमित शिक्षकों के शिक्षण कार्य से वंचित रहने का भी आरोप है। संगठन ने विभागीय पुनर्गठन और प्रशासनिक निर्णयों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है
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