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Himachal: शिक्षा मंत्री बोले- सीबीएसई स्कूलों में सेवारत शिक्षकों को मेरिट पर मिलेगी नियुक्ति, तबादले होंगे

Thu, 02 Jul 2026 03:40 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 02 Jul 2026 03:40 PM IST
सार

147 संचालित सरकारी सीबीएसई स्कूलों में सेवारत शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का बयान आया है। 

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rohit thakur says: Serving teachers in CBSE schools will be appointed based on merit; transfers will also take
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में नई नियुक्तियों के बावजूद कुछ सेवारत शिक्षकों की सीबीएसई स्कूलों में सेवाएं जारी रहेंगी। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट सब कमेटी ने आवश्यकता अनुसार कुछ शिक्षकों को पुराने स्कूलों में ही रखने का प्रस्ताव तैयार कर रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि विभाग में रिक्तियां बहुत हैं, सभी को एडजस्ट किया जाएगा। इस मामले को कैबिनेट बैठक में लाया जा सकता है। गुरुवार को राज्य सचिवालय में मीडिया से बातचीत में रोहित ठाकुर ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों में मेरिट के आधार पर सेवारत शिक्षकों को नियुक्ति देने का शिक्षा विभाग ने पक्ष रखा है। सीबीएसई स्कूलों में प्रिंसिपलों को भी जल्द तैनाती दी जाएगी। पहले से तैनात शिक्षकों के तबादलों पर मंत्री ने कहा कि अगर सीबीएसई स्कूलों में भी जरूरत होगी तो वहां भी उन शिक्षकों को रखा जाएगा। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त शिक्षक भी रखे जाएंगे। पहली प्राथमिकता सीबीएसई स्कूलों के लिए चयनित शिक्षकों को तैनाती देने की रहेगी।

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अंतिम फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में शिक्षकों की नियुक्ति चयन परीक्षा की मेरिट के आधार पर करने की पैरवी की गई है। अब इस पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मामला मंत्रिमंडल की बैठक में भी लाया जा सकता है। उधर, विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कमेटी ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सीबीएसई स्कूलों के लिए पहले 136 विद्यालयों के हिसाब से लगभग 6,200 पदों की कैडर स्ट्रेंथ तय की गई थी। अब ऐसे स्कूलों की संख्या 158 हो चुकी है, जिनमें से करीब 151 विद्यालय संचालन में हैं। इन स्कूलों में बढ़ रहे दाखिलों को देखते हुए शिक्षकों की आवश्यकता भी बढ़ी है। समिति का मानना है कि चयन परीक्षा के माध्यम से योग्य शिक्षकों की नियुक्ति के बाद भी बड़ी संख्या में पद रिक्त रह सकते हैं। इसलिए अतिरिक्त पदों की व्यवस्था भी करनी होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मेरिट आधारित तैनाती का अर्थ यह नहीं होगा कि वर्तमान में कार्यरत सभी शिक्षक अपने स्कूलों से हट जाएंगे। जहां आवश्यकता होगी और प्रशासनिक दृष्टि से उचित होगा, वहां कुछ शिक्षकों को उसी स्कूल में बनाए रखने का विकल्प भी अपनाया जाएगा।
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शिक्षक संगठनों के विरोध के बीच सरकार पर दबाव

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों की नाराजगी को लेकर है। कई शिक्षक संगठन मेरिट आधारित तैनाती का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे बड़ी संख्या में शिक्षकों को दूरदराज और कठिन क्षेत्रों में स्थानांतरित होना पड़ सकता है। हालांकि, समिति ने अपनी रिपोर्ट में कानूनी पक्ष को प्राथमिकता देते हुए कहा है कि यदि सीबीएसई स्कूलों के लिए बनाई गई सब-कैडर व्यवस्था के अनुरूप नियुक्तियां नहीं की गईं तो मामला फिर से न्यायालय पहुंच सकता है। ऐसे में भविष्य के कानूनी विवादों से बचने के लिए मेरिट आधारित तैनाती सबसे उपयुक्त विकल्प होगा।

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