Shimla Christ Church: समय से हार गईं शिमला की ऐतिहासिक घड़ियां, मरम्मत के अगले दिन ही फिर ठप
Shimla Christ Church Clock News: शिमला के रिज मैदान स्थित ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च की 153 साल पुरानी घड़ियां एक बार फिर बंद हो गई हैं। दो दिन पहले मरम्मत के बावजूद अगले ही दिन तीनों घड़ियां ठप हो गईं। 1873 में स्थापित ये घड़ियां चर्च की पहचान हैं, लेकिन बार-बार खराब होने से पर्यटक और स्थानीय लोग निराश हैं।
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हिल्स क्वीन शिमला के रिज मैदान पर स्थित ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च को राजधानी का ताज कहा जाता है। हालांकि चर्च पर लगी फाइबर से बनीं घड़ियां कई वर्षों से बंद हैं। सौ साल से अधिक पुरानी यह घड़ियां अब अपनी खराब स्थिति के कारण पर्यटकों के लिए निराशा का कारण बन रही हैं। यह उत्तरी भारत का दूसरा सबसे पुराना चर्च है, जिसकी खूबसूरती आज भी देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। लेकिन चर्च पर लगी बंद घड़ियों ने इसकी भव्यता पर कुछ हद तक असर डाला है।
इन घड़ियों की खासियत यह है कि तीनों घड़ियां एक साथ चलती हैं। रिज मैदान पर रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। स्थानीय लोग और सैलानी क्राइस्ट चर्च देखने भी जाते हैं, लेकिन बंद पड़ी घड़ियों को देखकर उन्हें निराशा होती है। इन घड़ियों को कई बार ठीक करवाया जा चुका है, लेकिन कुछ समय बाद फिर खराब हो जाती हैं। दो दिन पहले भी घड़ियों की मरम्मत करवाई गई थी, लेकिन एक दिन बाद ही दोबारा बंद हो गईं। चर्च की पादरी डॉ. विनिता रॉय ने बताया कि घड़ियों को कई बार ठीक करवाया है, लेकिन बार-बार खराब होने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
चर्च के ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। चर्च में लगी पांच बड़ी खिड़कियां भी इसकी विशेष पहचान हैं। यह कीमती कांच से बनी हैं और ईसाई धर्म के विश्वास, उम्मीद, परोपकार, धैर्य और विनम्रता का प्रतीक मानी जाती हैं। इनमें से एक खिड़की का कांच थोड़ा टूट गया है। वर्ष 2014 में चोरों ने इसी कांच को तोड़कर चर्च में घुसने का प्रयास किया था। इसके बाद से अब तक टूटे हुए कांच की मरम्मत नहीं हो पाई है।
शिमला के क्राइस्ट चर्च में 125 वर्ष पुराना पाइप ऑर्गन भी मौजूद है, जो एक ऐतिहासिक संगीत उपकरण है। इसे वर्ष 1899 में इंग्लैंड से यहां लाया था। इसे किंग ऑफ ऑर्गन कहा जाता है। यह तीन मंजिलों जितना बड़ा है और इसे बजाने के लिए इसके अंदर प्रवेश करना पड़ता है। इसके प्रत्येक हिस्से से अलग-अलग प्रकार की धुन और आवाज निकलती है।
क्राइस्ट चर्च में लगी घड़ियां वर्ष 1873 में स्थापित की थीं। इन्हें कर्नल डंबलेटन ने चर्च को भेंट किया था। वर्तमान में यह घड़ियां जंग की चपेट में आ चुकी हैं, जिसके कारण इनमें बार-बार खराबी आ रही है। चर्च के सामने बाईं और दाईं ओर तीन घड़ियां लगी हैं। इनकी खासियत है कि तीनों एक साथ चलती हैं। पहले यह घड़ियां मैकेनिकल प्रणाली से संचालित होती थीं, लेकिन अब इन्हें बिजली से चलाया जाता है। इनमें बैटरी लगाई गई है।
शिमला का क्राइस्ट चर्च वर्ष 1857 में नियो गौथिक शैली में बनकर तैयार हुआ था। इसकी नींव 9 सितंबर 1844 को बिशप डेनियल विल्सन ने रखी थी। इसका डिजाइन कर्नल जेटी बोयलियो ने तैयार किया था। नींव रखे जाने के करीब 13 वर्ष बाद चर्च का निर्माण पूरा हुआ। चर्च पर लगी बड़ी घंटी वर्ष 1860 में कर्नल डंबलेटन ने दान की थी।