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Himachal News : नीदरलैंड का पियोनी फूल पहली बार भारत में खिला, पालमपुर के वैज्ञानिकों ने रचा इतिहास

Sun, 02 Aug 2026 02:34 PM IST
Ankesh Dogra विनोद राणा, पालमपुर (कांगड़ा)।
विनोद राणा, पालमपुर (कांगड़ा)। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 02 Aug 2026 02:34 PM IST
सार

पालमपुर स्थित CSIR-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों ने वर्षों के शोध के बाद पहली बार भारत में नीदरलैंड के प्रसिद्ध पियोनी फूल को सफलतापूर्वक विकसित किया है। सफेद और गुलाबी रंगों में खिले इस बहुमूल्य फूल का अब लद्दाख, लाहौल और नैनीताल के किसानों के खेतों में परीक्षण किया जा रहा है। सफल परिणाम मिलने पर इसकी व्यावसायिक खेती शुरू होगी, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और पर्वतीय किसानों की आय बढ़ने की संभावना है।

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सीएसआईआर पालमपुर के फार्म में खिला पियोनी फूल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अब तक नीदरलैंड से आयात किया जाने वाला बहुमूल्य और खूबसूरत पियोनी फूल भारत में पहली बार सफलतापूर्वक तैयार कर लिया है। सीएसआईआर पालमपुर के वैज्ञानिकों के वर्षों के शोध और मेहनत के बाद संस्थान के कृषि फार्म में पियोनी का फूल सफेद और आकर्षक गुलाबी रंगों में पूरी रंगत के साथ खिल उठा है। 

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इसे कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ठंडे और विशेष जलवायु वाले इलाकों में पनपने वाले इस फूल को अब व्यावसायिक खेती के उद्देश्य से लद्दाख, लाहौल और नैनीताल के उच्च पर्वतीय इलाकों में परीक्षण के तौर पर किसानों के खेतों में लगाया गया है। ठंडी जलवायु में उगने वाला यह पौधा लगभग चार साल के समय में पूरी तरह से तैयार होकर व्यावसायिक उत्पादन देने योग्य बनता है। इस फूल की सबसे बड़ी विशेषता और खूबी यह है कि एक बार पौधा पूरी तरह से जम जाने और कली लगने के बाद इसका झाड़ 25 से 30 वर्षों तक लगातार गुणवत्तापूर्ण फूल देता रहता है। 

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यदि यह शोध परीक्षण किसानों के खेतों में उम्मीद के मुताबिक बेहतर परिणाम देता है तो आने वाले दिनों में देश के ठंडे और दूरदराज के सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों की आर्थिकी में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिलेगा। वर्तमान समय में भारत के बड़े महानगरों में होने वाली भव्य शादियों, हाई-प्रोफाइल सम्मेलनों और अन्य बड़े आयोजनों में सजावट के लिए पियोनी फूल को विशेष रूप से नीदरलैंड से हवाई मार्ग से आयात किया जाता है। विदेशी आयात व परिवहन खर्चों के कारण यह फूल काफी महंगा पड़ता है। वर्तमान में नीदरलैंड से आने वाले इस एक फूल की बाजार कीमत 300 से लेकर 400 रुपये तक होती है। भारतीय किसान इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू करेंगे तो भारतीय बाजार में इसकी कीमत घटकर महज 100 से 150 रुपये प्रति फूल रह जाएगी। 

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लद्दाख, लाहौल व नैनीताल में ट्रायल के तौर पर किसानों के खेतों में सौ-सौ कलियां लगाई गई हैं। यह फूल नीदरलैंड से आयात पर निर्भरता कम करेगा और आम लोगों को काफी सस्ता पड़ेगा। सफल परिणाम आने पर यह ठंडे इलाकों के कृषि परिदृश्य को बदल देगा। -डॉ. भव्य भार्गव, प्रभारी, ट्यूलिप गार्डन, सीएसआईआर पालमपुर

संस्थान में लंबे शोध के बाद देश में पहली बार पियोनी फूल तैयार हुआ है। इससे आने वाले दिनों में ठंडे इलाकों के किसानों की आय में भारी इजाफा होगा और विदेशों से आयात होने वाला फूल बेहद कम कीमत पर उपलब्ध होगा। इस ऐतिहासिक सफलता के लिए संस्थान के वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं।  -डॉ. सुदेश कुमार यादव, निदेशक, सीएसआईआर पालमपुर

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