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Himachal News : 1572 मेगावाट बिजली से कमाई बढ़ाने की तैयारी, शेयर मार्केट जैसा होगा मॉडल; जानें सबकुछ
Sun, 02 Aug 2026 09:50 AM IST
Ankesh Dogra
अनिमेष कौशल, शिमला।
अनिमेष कौशल, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 02 Aug 2026 09:50 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश सरकार अब 146 जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली करीब 1572 मेगावाट बिजली को शेयर मार्केट की तर्ज पर बाजार की मांग और कीमत के अनुसार बेचेगी। इसके लिए पावर ट्रेडिंग कंपनियों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार का लक्ष्य बिजली की बेहतर कीमत हासिल कर राजस्व बढ़ाना है। भविष्य में इस मॉडल में सौर और पवन ऊर्जा को भी शामिल किया जाएगा।
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बिजली (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार अब अपनी जलविद्युत संपदा को अधिक कमाई का जरिया बनाने की तैयारी में है। राज्य सरकार 146 परियोजनाओं से मिलने वाली करीब 1572 मेगावाट बिजली को शेयर मार्केट की तर्ज पर बाजार की मांग और कीमतों पर नजर रखते हुए बेचेगी। इसके लिए सरकार ने पेशेवर पावर ट्रेडिंग कंपनियों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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ऊर्जा विभाग ने बिजली के विपणन और व्यापार के लिए ई-टेंडर जारी किए हैं। चयनित पावर ट्रेडर देश के विभिन्न बिजली बाजारों, एक्सचेंजों और राज्यों में बिजली की कीमतों पर नजर रखेंगे और जहां बेहतर दाम मिलेंगे, वहां बिजली बेचेंगे। सरकार को केंद्रीय, राज्य, संयुक्त और निजी क्षेत्र की कुल 146 जलविद्युत परियोजनाओं से निशुल्क बिजली और इक्विटी पावर के रूप में हिस्सा मिलता है। इन परियोजनाओं से कुल 1571.95 मेगावाट बिक्री योग्य बिजली उपलब्ध है।
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इसमें 1134.42 मेगावाट निशुल्क बिजली और 437.53 मेगावाट इक्विटी पावर शामिल है। जिस तरह शेयर बाजार में निवेशक सही समय देखकर शेयर खरीदते और बेचते हैं, उसी तरह बिजली बाजार में भी कीमतें हर समय एक जैसी नहीं रहतीं।
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गर्मी, सर्दी, उद्योगों की मांग और राज्यों की जरूरत के अनुसार बिजली के दाम बदलते रहते हैं। नई व्यवस्था में पावर ट्रेडिंग कंपनी बाजार की चाल पर नजर रखेगी और अधिक मांग वाले समय में बिजली बेचकर सरकार को ज्यादा राजस्व दिलाने का प्रयास करेगी। साथ ही बिजली की शेड्यूलिंग और व्यापारिक प्रक्रियाएं भी संभालेगी।
सरकार भविष्य में केवल जलविद्युत तक सीमित नहीं रहना चाहती। इसलिए इस व्यवस्था में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से मिलने वाली बिजली के विपणन की संभावनाओं को भी शामिल किया गया है। ऊर्जा निदेशालय के अधिकारियों का मानना है कि यदि बाजार आधारित यह मॉडल सफल रहा तो हिमाचल अपनी बिजली संपदा से कहीं अधिक राजस्व अर्जित कर सकेगा।
944 मेगावाट बिजली खुले बाजार में उपलब्ध
सरकार की लगभग 944 मेगावाट बिजली ऐसी है, जिसे सालभर खुले बाजार और बिजली एक्सचेंजों में बेचा जा सकता है। इसके अलावा 437 मेगावाट इक्विटी पावर की बिक्री भी विभिन्न माध्यमों से की जाएगी। सरकार ने यह विकल्प भी रखा है कि जरूरत पड़ने पर विद्युत बोर्ड और पावर कॉरपोरेशन की बिजली की खरीद-बिक्री भी इसी व्यवस्था के तहत कराई जा सकेगी।
सरकार की लगभग 944 मेगावाट बिजली ऐसी है, जिसे सालभर खुले बाजार और बिजली एक्सचेंजों में बेचा जा सकता है। इसके अलावा 437 मेगावाट इक्विटी पावर की बिक्री भी विभिन्न माध्यमों से की जाएगी। सरकार ने यह विकल्प भी रखा है कि जरूरत पड़ने पर विद्युत बोर्ड और पावर कॉरपोरेशन की बिजली की खरीद-बिक्री भी इसी व्यवस्था के तहत कराई जा सकेगी।