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हिमाचल हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: जमीन अधिग्रहण पर मुआवजे के साथ अतिरिक्त राशि पर भी मिलेगा ब्याज

Fri, 09 Oct 2026 05:55 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 09 Oct 2026 05:55 PM IST
सार

 हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता सोलेशियम (मुआवजे पर मिलने वाली अतिरिक्त राशि) पर ब्याज पाने का पूर्ण हकदार है।

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Significant Himachal High Court ruling: Interest to be paid on the additional amount alongside compensation fo
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता सोलेशियम (मुआवजे पर मिलने वाली अतिरिक्त राशि) पर ब्याज पाने का पूर्ण हकदार है। अगर सरकार आपकी जमीन का अधिग्रहण करती है, तो आपको मिलने वाले मुख्य मुआवजे और अतिरिक्त सोलेशियम राशि ही नहीं, बल्कि उस पर मिलने वाले ब्याज पर भी आपका पूरा अधिकार है। अदालत ने केंद्र सरकार और अन्य उत्तरदाताओं को निर्देश दिया है कि वे ब्याज सहित बढ़ी हुई मुआवजा राशि आठ सप्ताह के भीतर अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराएं। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने यह फैसला टेक राम की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए जारी किए हैं। गौरतलब है कि अदालत के समक्ष मुख्य विचारणीय प्रश्न यह था कि क्या याचिकाकर्ता भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत सोलेशियम की राशि पर ब्याज पाने का हकदार है या नहीं। 

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मुद्दा अब विवादित नहीं रह गया
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यह मुद्दा अब विवादित नहीं रह गया है। सर्वोच्च न्यायालय के सुंदर सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने दोहराया कि सोलेशियम पर ब्याज देय है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वरिष्ठ वकील ने याचिकाकर्ता के दावे का विरोध करते हुए तर्क दिया कि एक अन्य संबंधित मामले (यूनियन ऑफ इंडिया बनाम जगत राम) में हाईकोर्ट के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्थगनादेश दिया गया है। इसलिए इस याचिका को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में विवाद केवल सोलेशियम पर देय ब्याज को लेकर है।

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