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HP Panchayat Election: हिमाचल में 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव कराने के आदेश, जानें हाईकोर्ट ने क्या कुछ कहा

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 09 Jan 2026 10:27 AM IST
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सार

 हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव को समय पर करवाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद शुक्रवार सुबह अंतिम फैसला आया । 

The High Court has given its final decision to conduct the hp Panchayat elections in Himachal on time.
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया 30 अप्रैल तक पूरा करने के आदेश दिए हैं। पंचायत चुनाव समय पर करवाने के लिए प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग को आदेश देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सांविधानिक प्रावधानों का पालन किया जाए। संविधान के अनुच्छेद 243-ई के तहत पंचायती राज संस्थाओं का 5 साल का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराना अनिवार्य है। राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी आदेश सांविधानिक जनादेश को दरकिनार नहीं कर सकते।

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कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आपदा कानून का सहारा लेकर चुनाव नहीं टाल सकते और न ही डिजास्टर एक्ट आयोग के काम में बाधा बन सकता है। नियम के तहत छह माह तक छूट मिल सकती है, लेकिन सरकार इसे अपना अधिकार नहीं मान सकती। संविधान सर्वोच्च है और चुनाव आयोग एक स्वतंत्र सांविधानिक निकाय है। फैसले में कोर्ट ने कहा कि जहां परिसीमन कार्य पूरा हो चुका है, वहां आरक्षण रोस्टर का काम तुरंत शुरू करें और जहां पर यह कार्य नहीं हुआ है, वहां प्रशासनिक तैयारियां 28 फरवरी तक पूरी की जाएं।

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न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने सुझाव दिया कि मार्च में बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए चुनाव प्रक्रिया में शिक्षकों के बजाय अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों की मदद ली जा सकती है, ताकि छात्रों की पढ़ाई और चुनाव प्रक्रिया दोनों प्रभावित न हों। खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग, पंचायतीराज विभाग और शहरी विकास विभाग को निर्देश दिया कि वे आपसी खींचतान खत्म कर चुनाव आयोग के मार्गदर्शन में मिलकर काम करें। राज्य चुनाव आयोग बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए राज्य सरकार, पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के साथ बातचीत कर तालमेल बिठाए।

न्यायालय ने राज्य चुनाव आयोग को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि 31 जनवरी को मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद किसी भी स्थिति में 30 अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि नए परिसीमन में देरी हो रही है तो चुनाव 2011 की जनगणना और पिछले परिसीमन के आधार पर कराए जा सकते हैं। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि आरक्षण रोस्टर के निर्धारण की प्रक्रिया 28 फरवरी तक हर हाल में पूरी कर ली जाए। इस फैसले के बाद, राज्य चुनाव आयोग को अब जल्द चुनाव कार्यक्रम अधिसूचित करना होगा। कोर्ट ने माना है कि शेष चुनावी प्रक्रिया 8 सप्ताह के भीतर पूरी की जा सकती है।

सरकार जानबूझकर चुनाव टालने की कर रही कोशिश : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार जानबूझकर चुनाव टालने की कोशिश कर रही है। बोर्ड परीक्षाओं, जनगणना और मानसून का बहाना बनाकर चुनाव को अनिश्चितकाल के लिए नहीं रोका जा सकता। वहीं राज्य चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि उनकी तैयारी पूरी है। सरकार के आरक्षण रोस्टर का इंतजार है। चुनाव समय पर करवाने के लिए आयोग ने समय-समय पर सभी डीसी को भी निर्देश जारी किए हैं, लेकिन सरकार आपदा कानून और पुनर्सीमांकन का हवाला देकर इसे टाल रही है।

उधर, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि प्राकृतिक आपदा के करण कई क्षेत्रों में सड़कें और बुनियादी ढांचा प्रभावित है, इसलिए चुनाव करवाना संभव नहीं है। इसके साथ ही कुछ पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन का काम लंबित है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि राज्य में जनजीवन सामान्य हो चुका है और सरकार अन्य बड़े आयोजन जैसे सरकार के 3 साल का जश्न कर रही है तो चुनाव क्यों नहीं। आपदा कानून और देविंद्र सिंह नेगी मामले के जिला परिषद शिमला के परिसीमन फैसले को चुनाव टालने के लिए एक ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है।

31 जनवरी को पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल होना है पूरा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल में पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट के फैसले का सरकार अध्ययन करेगी। उसके बाद जो कानूनी कार्रवाई करनी होगी, वह करेंगे। शुक्रवार को सचिवालय में मीडिया से बात करते हुए सीएम ने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम संसद में बना है, उसके कोई मायने हैं या नहीं, उस संभावना को हम तलाशेंगे। आपदा प्रबंधन अधिनियम के मायने क्या हैं, इसकी व्याख्या कोर्ट से पूछेंगे। दिसंबर-जनवरी को चुनाव करवाते तो बर्फबारी से दिक्कतें आती हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव पर जो फैसला दिया है, वह किस कानून के तहत दिया है, जबकि प्रदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है। सीएम ने कहा, अच्छा तो यह होता कि वो (कोर्ट) सरकार से पूछते। हम तो खुद ही चाहते हैं कि अप्रैल-मई में चुनाव हों। बच्चों की परीक्षाएं भी तब तक खत्म हो जातीं, लेकिन अब कानूनी व्याख्या की बात है। जो हाईकोर्ट के फैसले आ रहे हैं, उनमें कहीं न कहीं कानून की व्याख्या नहीं हो रही है।

सरकार के चर्चा के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने पर होगा फैसला : अनूप
हिमाचल प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा है कि राज्य सरकार कभी पंचायती राज चुनाव से पीछे नहीं हटी है। आपदा आने से पहले ही राज्य सरकार चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर चुकी थी। शुक्रवार को हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद महाधिवक्ता ने प्रेस वार्ता में कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेशों के बारे में राज्य सरकार के साथ चर्चा करेंगे। चर्चा के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने के संबंध में फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार चुनाव कराने के पक्ष में ही बात कर रही थी। अगर प्रदेश में जनता रहेगी, तभी चुनाव होंगे। रतन ने कहा कि अदालत के फैसले में जो टाइमलाइन तय की गई है, उसमें चुनाव करवाने में मुश्किल हो सकती है। उन्होंने कहा कि सभी तरह की अड़चन पर राज्य सरकार के साथ चर्चा की जाएगी। 
 
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