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Shimla News: नगर निगम की चिह्नित डंपिंग साइट को नहीं मिली मंजूरी
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कनलोग, मल्याणा और आईजीएमसी के पास चिह्नित की जगहों के लिए एमसी ने वन विभाग से मांगी थी स्वीकृति
एमसी ने मलबा फेंकने के बदले लोगों से वसूलना था शुल्क
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर में निर्माण कार्य से निकलने वाले मलबे के निस्तारण की प्रक्रिया अधर में लटक गई है। शहर के कनलोग, मल्याणा और आईजीएमसी के पास बनीं डंपिंग साइटों में मलबा फेंका जाना था। इससे शहर में अवैध डंपिंग पर रोक लगाई जानी थी लेकिन महीनों बीतने के बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है।
इस योजना के तहत नगर निगम ने मलबा उठाने की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेकर लोगों और ठेकेदारों से शुल्क वसूलना था। इससे एक ओर शहर को साफ-सुथरा रखने में मदद मिलनी थी वहीं दूसरी ओर अनियंत्रित तरीके से हिल साइड और सड़कों के किनारे फेंके जाने वाले मलबे पर भी लगाम लगनी थी। नगर निगम ने इसको लेकर वन विभाग के पास मामला भेजा है। इसे लेकर निगम रिमाइंडर भी भेज चुका है लेकिन वन विभाग से अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। शहर में लगातार बढ़ रहे निर्माण कार्यों के चलते मलबे की समस्या गंभीर होती जा रही है। जगह-जगह अवैध डंपिंग से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। रात के समय वाहनों और पैदल आवाजाही करने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे रात के समय अधिकांश तौर पर हादसे का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
टीम नहीं पकड़ पाई एक भी मामला
शहर में अवैध डंपिंग रोकने को लेकर नगर निगम ने फिलहाल अपने स्तर पर छह पार्षदों की एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी ने शहर के अनाडेल, संजौली, नवबहार, मल्याणा वार्डों में निरीक्षण भी किया है। हालांकि निरीक्षण में कोई भी नहीं पकड़ा गया है। हालांकि निगम का कहना है कि आने वाले दिनों में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।
शहर को स्वच्छ और डंपिंग रहित बनाना उद्देश्य
नगर निगम शहर में मलबा निस्तारण के लिए स्थायी समाधान को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जल्द ही वन विभाग से मंजूरी मिल जाएगी, जिसके बाद डंपिंग साइटों को विकसित कर व्यवस्था लागू की जाएगी। निगम का उद्देश्य शहर को स्वच्छ रखना और अवैध डंपिंग पर पूरी तरह रोक लगाना है। इसको लेकर प्रयास लगातार जारी है।
-सुरेंद्र चौहान, महापौर नगर निगम शिमला
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एमसी ने मलबा फेंकने के बदले लोगों से वसूलना था शुल्क
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर में निर्माण कार्य से निकलने वाले मलबे के निस्तारण की प्रक्रिया अधर में लटक गई है। शहर के कनलोग, मल्याणा और आईजीएमसी के पास बनीं डंपिंग साइटों में मलबा फेंका जाना था। इससे शहर में अवैध डंपिंग पर रोक लगाई जानी थी लेकिन महीनों बीतने के बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है।
इस योजना के तहत नगर निगम ने मलबा उठाने की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेकर लोगों और ठेकेदारों से शुल्क वसूलना था। इससे एक ओर शहर को साफ-सुथरा रखने में मदद मिलनी थी वहीं दूसरी ओर अनियंत्रित तरीके से हिल साइड और सड़कों के किनारे फेंके जाने वाले मलबे पर भी लगाम लगनी थी। नगर निगम ने इसको लेकर वन विभाग के पास मामला भेजा है। इसे लेकर निगम रिमाइंडर भी भेज चुका है लेकिन वन विभाग से अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। शहर में लगातार बढ़ रहे निर्माण कार्यों के चलते मलबे की समस्या गंभीर होती जा रही है। जगह-जगह अवैध डंपिंग से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। रात के समय वाहनों और पैदल आवाजाही करने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे रात के समय अधिकांश तौर पर हादसे का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
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टीम नहीं पकड़ पाई एक भी मामला
शहर में अवैध डंपिंग रोकने को लेकर नगर निगम ने फिलहाल अपने स्तर पर छह पार्षदों की एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी ने शहर के अनाडेल, संजौली, नवबहार, मल्याणा वार्डों में निरीक्षण भी किया है। हालांकि निरीक्षण में कोई भी नहीं पकड़ा गया है। हालांकि निगम का कहना है कि आने वाले दिनों में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।
शहर को स्वच्छ और डंपिंग रहित बनाना उद्देश्य
नगर निगम शहर में मलबा निस्तारण के लिए स्थायी समाधान को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जल्द ही वन विभाग से मंजूरी मिल जाएगी, जिसके बाद डंपिंग साइटों को विकसित कर व्यवस्था लागू की जाएगी। निगम का उद्देश्य शहर को स्वच्छ रखना और अवैध डंपिंग पर पूरी तरह रोक लगाना है। इसको लेकर प्रयास लगातार जारी है।
-सुरेंद्र चौहान, महापौर नगर निगम शिमला