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Dharamshala: दो माह बाद धर्मशाला लौटे तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा, हुआ भव्य स्वागत

अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 13 Feb 2026 08:22 PM IST
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सार

दलाई लामा 10 दिसंबर 2025 को धर्मशाला से रवाना हुए थे और कर्नाटक के मुंडगोड स्थित देओगुलिंग तिब्बती मठ में दो माह तक शीतकालीन प्रवास पर रहे। 

Tibetan spiritual leader Dalai Lama returns to Dharamshala after two months, receives grand welcome
दो माह बाद धर्मशाला लौटे तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा। - फोटो : संवाद
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विस्तार

तिब्बती आध्यात्मिक गुरु एवं 14वें दलाई लामा का शुक्रवार को धर्मशाला लौटने पर भव्य स्वागत हुआ। दलाई लामा 10 दिसंबर 2025 को धर्मशाला से रवाना हुए थे और कर्नाटक के मुंडगोड स्थित देओगुलिंग तिब्बती मठ में दो माह तक शीतकालीन प्रवास पर रहे। वहां पर धार्मिक आयोजनों के अलावा दलाई लामा ने कुल 15,935 श्रद्धालुओं से मिलकर उन्हें आशीर्वाद और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया। इनमें नोबेल शांति पुरस्कार विजेता लेयमा गबवी और प्रमुख भारतीय अधिकारी एवं राजनीतिज्ञों के साथ की गई मुलाकातें भी शामिल हैं। 9 फरवरी को दलाई लामा ने हुबली हवाई अड्डे से प्रस्थान किया और इसके बाद तीन दिन तक दिल्ली में चिकित्सा जांच व प्रमुख व्यक्तित्वों से मुलाकात की। उसके बाद वह शुक्रवार को धर्मशाला लौटे। धर्मशाला में धर्मगुरु के आगमन पर तिब्बती समुदाय और उनके अनुयायी कांगड़ा हवाई अड्डे से लेकर उनके निवास स्थान चुगलाखंग मठ तक जगह-जगह सड़क पर स्वागत के लिए उपस्थित रहे। सभी ने पारंपरिक स्कार्फ, फूल और अगरबत्तियां लेकर उनका स्वागत किया।

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22 को होगा 86वीं अभिषेक वर्षगांठ पर कार्यक्रम
मैक्लोडगंज स्थित चुगलाखंग मठ में 22 फरवरी को तेंजिन ग्यात्सो के 14वें दलाई लामा के रूप में अभिषेक की 86वीं वर्षगांठ पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की ओर से किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। यह अवसर दुनियाभर में बसे तिब्बती समुदायों, बौद्ध अनुयायियों और शांति के समर्थकों के लिए ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखता है। 22 फरवरी 1940 को ल्हासा स्थित पोटाला पैलेस में मात्र चार वर्ष की आयु में तेंजिन ग्यात्सो का औपचारिक अभिषेक दलाई लामा के रूप में हुआ। 1959 में तिब्बत की परिस्थितियों के चलते उन्हें भारत में शरण लेनी पड़ी और तब से वह धर्मशाला में निवास कर रहे हैं।

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