Himachal Teachers Protest: शिमला में JBT शिक्षकों का हल्ला बोल, नई परिसर प्रणाली के खिलाफ हजारों टीचर्स जुटे
हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने नई परिसर प्रणाली के विरोध में शिमला के चौड़ा मैदान में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदेशभर से हजारों जेबीटी शिक्षक राजधानी पहुंचे हैं। शिक्षक नेताओं ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। इससे पहले 11 जुलाई को बगलामुखी मंदिर से प्राथमिक शिक्षा बचाव न्याय यात्रा शुरू की गई थी। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नई परिसर प्रणाली के विरोध में हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ का प्रदर्शन राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में शुरू हो गया है। प्रदेशभर से बड़ी संख्या में जेबीटी शिक्षक प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे हैं। शिक्षकों के पहुंचने का सिलसिला अभी भी जारी है।
प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में शिक्षक नेताओं ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से प्राथमिक शिक्षा की मौजूदा प्रणाली प्रभावित होगी और शिक्षकों की भूमिका सीमित हो सकती है।
इससे पहले 11 जुलाई को जेबीटी शिक्षकों ने बगलामुखी मंदिर से "प्राथमिक शिक्षा बचाव न्याय यात्रा" शुरू की थी। यह यात्रा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए शिमला पहुंची, जहां आज चौड़ा मैदान में शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। प्रशासन ने यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। चौड़ा मैदान में वाहनों की आवाजाही एक तरफ से नियमित रूप से जारी है।
वहीं, सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर चौड़ा मैदान में भारी संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। पुलिस प्रशासन की ओर से प्रदर्शन स्थल पर निगरानी रखी जा रही है ताकि यातायात और कानून व्यवस्था सुचारू बनी रहे। शिक्षक संघ का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
पूरा मामला नई परिसर प्रणाली को लेकर है, जिसका हिमाचल प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि यह व्यवस्था प्राथमिक स्कूलों की मौजूदा कार्यप्रणाली और जेबीटी शिक्षकों के अधिकारों को प्रभावित करेगी। वहीं शिक्षा विभाग इसे स्कूलों के बेहतर प्रबंधन और संसाधनों के सही उपयोग के लिए जरूरी बता रहा है।
क्या है नई परिसर प्रणाली?
नई परिसर प्रणाली के तहत आसपास के कई स्कूलों को एक समूह (कॉम्प्लेक्स) में जोड़ा जाना है। इस व्यवस्था में एक स्कूल को मुख्य स्कूल (लीड स्कूल/कॉम्प्लेक्स स्कूल) बनाया जाएगा, जिसके माध्यम से आसपास के छोटे स्कूलों का समन्वय किया जाएगा।
इसका उद्देश्य
- स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल
- शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक सहयोग बढ़ाना
- विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की सेवाओं का साझा उपयोग
- प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना
बताया जा रहा है कि यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूल कॉम्प्लेक्स की अवधारणा से जुड़ी है।
1. प्रशासनिक अधिकारों को लेकर चिंता
शिक्षकों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से प्राथमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और जेबीटी शिक्षकों की प्रशासनिक भूमिका कमजोर हो सकती है।
2. छोटे स्कूलों की पहचान खत्म होने का डर
शिक्षकों का तर्क है कि गांवों में चल रहे छोटे प्राथमिक स्कूलों की अपनी अलग पहचान और व्यवस्था है। कॉम्प्लेक्स प्रणाली से इन स्कूलों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
3. जवाबदेही में भ्रम
शिक्षकों का कहना है कि यदि कई स्कूलों को एक समूह में जोड़ा जाएगा तो यह स्पष्ट नहीं रहेगा कि किसी स्कूल की जिम्मेदारी किसके पास होगी।
4. जेबीटी कैडर की भूमिका
शिक्षक संघ का आरोप है कि नई व्यवस्था में प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की भूमिका को कम महत्व मिल सकता है।
शिक्षकों की मुख्य मांगें
- नई परिसर प्रणाली की अधिसूचना वापस ली जाए।
- प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में बदलाव से पहले शिक्षकों से चर्चा की जाए।
- जेबीटी शिक्षकों के अधिकार और पद की गरिमा सुरक्षित रखी जाए।
- प्राथमिक स्कूलों की मौजूदा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
- आंदोलन कैसे शुरू हुआ?
जेबीटी शिक्षकों ने 11 जुलाई को बगलामुखी मंदिर से 'प्राथमिक शिक्षा बचाव न्याय यात्रा' शुरू की थी। यह यात्रा प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से होती हुई शिमला पहुंची। इसके बाद चौड़ा मैदान में प्रदेशस्तरीय प्रदर्शन किया जा रहा है।