Himachal High Court: अदालती आदेशों में देरी पर शिक्षा सचिव तलब, हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग की ओर से अदालती आदेशों के अनुपालन में देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए शिक्षा सचिव और अन्य अधिकारियों को 7 अगस्त तक आदेश लागू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि समयसीमा का पालन नहीं होने पर अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा। केंद्रीय विश्वविद्यालय नॉर्थ कैंपस और अन्य मामलों में भी सरकार को फटकार लगाई गई।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग की ओर से अदालती आदेशों के अनुपालन में लगातार हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश रोमेश वर्मा की अदालत ने मदन लाल और अन्य अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शिक्षा सचिव, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक और उच्चतर शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया कि 5 अगस्त 2024 के फैसले का अनुपालन 7 अगस्त तक हर हाल में किया जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा तक आदेश लागू नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई भी 7 अगस्त को तय की गई है। यह मामला अनुबंध के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को नियमित टीजीटी के समान वेतन, वरिष्ठता और पेंशन लाभ देने से जुड़ा है। याचिकाकर्ता वर्तमान में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं। अवमानना याचिका में राकेश कंवर सचिव (शिक्षा), आशीष कुमार कोहली निदेशक (प्रारंभिक स्कूल शिक्षा) और सुनीता सिंह निदेशक उच्चतर शिक्षा को पार्टी बनाया गया है।
हिमाचल हाईकोर्ट ने केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के नाॅर्थ कैंपस के निर्माण से जुड़े मामले में राज्य सरकार की सुस्ती पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि अगली सुनवाई तक फंड जमा करने की प्रक्रिया पूरी करने के आदेश का पालन नहीं किया तो शिक्षा सचिव को अदालत में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होना पड़ेगा। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने आदेश अतुल भारद्वाज की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर को होगी। 2 जून को हुई सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि विवि के नाॅर्थ कैंपस निर्माण के लिए वन संरक्षण अधिनियम के तहत करीब 30.04 करोड़ रुपये जमा करवाए जाने हैं। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को राशि जमा करने की समयसीमा बताते हुए शपथपत्र दायर करने का आदेश दिया था।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में आदेशों की अनुपालना न करने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की पीठ ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि अगली सुनवाई से पहले अदालत के फैसले को उसके मूल रूप और भावना के अनुसार लागू नहीं किया गया, तो शिक्षा निदेशक को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित रहना होगा। अदालती आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए 8 सप्ताह का समय दिया है। सुनवाई के दौरान उच्च शिक्षा निदेशक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को पुनः सेवा में रखने के एकल पीठ के आदेश को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद किसी कर्मचारी को दोबारा सेवा में बहाल करना व्यावहारिक नहीं है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश विपिन चंद्र नेगी की पीठ ने कहा कि सेवा की अवधि जो वर्ष 1999 में थी। उसके बाद 25 वर्षों के लंबे अंतराल को देखते हुए इस मोड़ पर पुनर्बहाली का निर्देश देना उचित नहीं होगा। ऐसी स्थितियों में एकमुश्त मुआवजा देना ही न्यायसंगत है। खंडपीठ ने एकल पीठ के 18 सितंबर 2025 के आदेश में संशोधन करते हुए कर्मचारी को 3.25 लाख का कुल मुआवजा देने का निर्देश दिया। अदालत ने यह फैसला सुकेत वन मंडल सुंदरनगर के मंडलीय वन अधिकारी की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता (भाग सिंह) को पहली बार वर्ष 1998 में दैनिक वेतनभोगी के रूप में रखा गया था और 30 नवंबर 2002 को उन्हें काम से हटा दिया गया।